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अप्रैल से जून तक की अवधि निर्यातकों के लिए अहम

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 04 09, 2020

उद्योग निकायों ने एक सुर में मौजूदा पूर्ण बंदी को बढ़ाने के खिलाफ चेताया है। उनका कहना है कि बिना किसी उचित राहत के निर्यात को भारी नुकसान होगा और विदेश की बाजार हिस्सेदारी समाप्त हो जाएगी।

सूत्रों ने जानकारी दी है कि इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित दूसरे माल का प्रतिनिधित्व करने वाले राष्ट्रीय स्तर के निर्यातक निकायों ने पिछले दो दिनों में वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी चिंता से अवगत कराया है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि विनिर्माण इकाइयों को तुरंत शुरू किए जाने की जरूरत है ताकि व्यापार की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अप्रैल-जून निर्यात सीजन का लाभ उठाया जा सके।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) में कार्यरत एक  वरिष्ठ अधिकारी कहा, 'ऐसे समय पर जब चीन अपने फैक्टरियों को फिर से शुरू कर रहा और अतिरिक्त इन्वेंट्री को निपटाने के लिए बेचैन है, तब भारतीय निर्यातों को अब तक रद्द या स्थगित नहीं किए गए ऑर्डरों को पूरा करने में सक्षम बनाने की जरूरत है।'

उद्योग निकाय ने विनिर्माण को चालू रखने के लिए प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों में पृथक्करण स्थल बनाने और उसे सुचारु रखने का समर्थन किया है। 

इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी) के भारत प्रमुख रवि सहगल ने कहा, 'विभिन्न उद्योगों में यह वैश्विक कारोबार का सबसे अहम समय है। एक ओर जहां घरेलू बाजारों में कुछ सुरक्षा हो सकती है, वहीं वैश्विक बाजार दूसरे देशों के दबदबे के लिए खुला पड़ा है। भारत उस मोर्चे पर नुकसान नहीं उठा सकता है।'

भारत के कुल निर्यात सौदे में इंजीनियरिंग उत्पाद की हिस्सेदारी एक चौथाई है। ईईपीसी इंडिया ने रेखांकित किया है कि शीर्ष के जिन 25 बाजारों में भारत के इंजीनियरिंग निर्यातों की हिस्सेदारी 75 फीसदी से अधिक है उनमें से अधिकांश बड़े गंतव्य कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण बंदी या कठोर प्रतिबंधों में हैं। इनमें शीर्ष के तीन गंतव्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और जर्मनी हैं।

सहगल ने कहा, 'मार्च महीने की खेप में बाधा आई है। विदेशी खरीदार को यह बात समझाई जा सकती है और उन्हें एक महीने के लिए रोका जा सकता है लेकिन उसके बाद नहीं। यदि भारत इस महीने विश्व के लिए उत्पादन नहीं करता है तो वह 2020 के पूरे वर्ष के लिए विदेशी खरीदारों की योजना से बाहर हो जाएगा।'

फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, 'हम मार्च में भी सुस्ती की उम्मीद कर रहे हैं। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कोरोना के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में अप्रैल में भी मांग में गिरावट रहेगी, जो कमी की बड़ी वजह है।' फियो के मुताबिक कुल निर्यात ऑर्डर में से 30 प्रतिशत से ज्यादा अटक गए हैं।

रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक यूरोप के देशों व अमेरिका को किए जाने वाले परिधान निर्यात को झटका लगेगा, जो 2020 के गर्मियों के सीजन के लिए होने वाला था। कुल मिलाकर उद्योग बड़े पैमाने पर नकदी के संकट से जूझ रहा है और उसके पास खरीदारों की ओर से पैसे आने के बहुत कम विकल्प बचे हैं।आयात की लागत घटाने के लिए कॉन्फेडरेशन आफ इंडियन टैक्सटाइल इंडस्ट्री के चेयरमैन टी राजकुमार ने सुझाव दिया है कि सभी कच्चे माल, डाई, केमिकल्स, इंटरमीडिएटरीज, स्पेयर, एक्सेसरीज को एंटी डंपिंग शुल्क और बुनियादी सीमा शुल्क से छूट मिलनी चाहिए।

 प्रधानमंत्री को लिखे गए एक पत्र में अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि इस उद्योग में 1.29 करोड़ लोग काम करते हैं और अगर सरकार तत्काल लक्षित आर्थिक पैकेज की घोषणा नहीं करती है तो इन पर मुसीबत आनी तय है।

उन्होंने कहा, 'परिधान निर्यात मौसमी उद्योग है और उत्पाद खराब होने वाले उत्पादों की ही तरह से हैं क्योंकि ये टेलर मेड, विशेष डिजाइन, विशेष फैशन के होते हैं और ऑर्डर रद्द होने के बाद अगले साल इनका मूल्य मामूली या कुछ भी नहीं रह जाता है।'

उद्योग के अनुमान के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत अपैरल इकाइयां सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग क्षेत्र में हैं। इसमें श्रमिकों पर आने वाला खर्च सबसे ज्यादा- उत्पाद की लागत का 25 से 30 प्रतिशत तक होता है।

Keyword: निर्यातक, निर्यात, बाजार हिस्सेदारी, इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, भारतीय उद्योग पर,
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