बिजनेस स्टैंडर्ड - केंद्र की वित्तीय स्थिति पर भारी इस वर्ष की छाया
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 03, 2020 05:18 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

केंद्र की वित्तीय स्थिति पर भारी इस वर्ष की छाया

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  April 09, 2020

नया वित्त वर्ष शुरू हुए एक सप्ताह हो गया है। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार को 2020-21 के दौरान राजस्व के मोर्चे पर कितनी बड़ी चुनौती का सामना करना है। यह चुनौती न केवल कोविड-19 के प्रभाव से उपजेगी बल्कि वर्ष 2019-20 के दौरान राजस्व संग्रह का बढ़ाचढ़ाकर लगाया गया अनुमान भी इसकी वजह होगा।

सबसे पहले 2019-20 के राजस्व संग्रह प्रदर्शन को बजट के संदर्भ में देखते हैं। वर्ष 2019-20 में सकल कर राजस्व के 21.63 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान संशोधित अनुमानों में जताया गया था। परंतु अब यह स्पष्ट है कि वास्तविक सकल कर राजस्व 19.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा। यानी इसमें 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आएगी। यह अनुमान उल्लिखित राजस्व संग्रह आंकड़ों और 2019-20 के पहले 11 महीनों के रुझान पर आधारित है। पूरे वर्ष का प्रत्यक्ष कर संग्रह केवल 10.27 लाख करोड़ रुपये रहने की आशा है जबकि संशोधित अनुमान में इसके 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने की बात कही गई थी। यहां भी 1.43 लाख करोड़ रुपये की कमी है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर यानी सीजीएसटी संग्रह के 4.95 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो 5.14 लाख करोड़ के संशोधित अनुमान से कम है यानी 19,000 करोड़ रुपये की कमी। जीएसीटी क्षतिपूर्ति उपकर संग्रह भी अनुमान से 2,5000 करोड़ रुपये कम रहा।

सरकार के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से फरवरी 2019-20 में सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क संग्रह के क्रमश: 1.05 लाख करोड़ रुपये और 1.97 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान था। कोविड-19 के चलते मार्च में पेट्रोलियम खपत और आयात में भारी कमी आई है। यदि मार्च में सीमा और उत्पाद शुल्क फरवरी की दर से बढ़ते तो भी पूरे वर्ष का संग्रह 1.15 लाख करोड़ और 2.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो पाता।

यदि विनिवेश प्राप्तियों में आने वाली करीब 50,000 करोड़ रुपये की कमी को इसमें शामिल किया जाए तो कुल राजकोषीय घाटा 2.18 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी के एक फीसदी से अधिक होगा। परंतु केंद्र के राजकोषीय घाटे पर इसका असर कुछ कम हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी व्यय में कुछ बचत हो सकती है। इससे घाटे का विस्तार रोका जा सकेगा। सरकार को कुछ व्यय की भरपाई बजट से इतर उधारी से करनी होगी। अहम बात यह है कि कर राजस्व में कमी का 70 फीसदी ही केंद्र सरकार वहन करेगी।

ध्यान रहे कि चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक गत वर्ष सकल कर संग्रह का 30 फीसदी राज्यों को बांट दिया गया था। यदि वास्तविक संग्रह की तुलना में कमी आती है तो केंद्र को केवल 70 फीसदी यानी करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। बाकी बोझ राज्य उठाएंगे।

ऐसे में न केवल केंद्र बल्कि राज्यों पर भी राजस्व संग्रह कमी का सीधा असर होगा। हालात ज्यादा बिगड़े तो 2019-20 में केंद्र का राजस्व घाटा 0.7 फीसदी बढ़ सकता है और वास्तविक घाटा जीडीपी के 4.5 फीसदी के बराबर हो सकता है। जबकि संशोधित अनुमान 3.8 फीसदी था।

वर्ष 2019-20 में अधिकांश राज्यों के राजकोषीय सुदृढ़ीकरण को गहरा झटका लगेगा। यह राज्य सकल घरेलू उत्पाद के 3 फीसदी तक हो सकता है। अब यह तय है कि उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। जिन 19 राज्यों ने घाटे को 3 फीसदी के भीतर रखने की बात कही थी, उनमें से कई का घाटा बढ़ेगा।

परंतु चिंता केवल इतनी नहीं है। बड़ी चिंता यह है कि 2019-20 में कर राजस्व संग्रह में कमी का असर 2020-21 पर नजर आएगा। मैंने पहले भी कहा है कि 12 फीसदी की नॉमिनल राजस्व संग्रह वृद्धि दर कोविड-19 के प्रसार के बाद दूर की कौड़ी है। 2019-20 में 19.62 लाख करोड़ रुपये के कमतर कर राजस्व संग्रह के साथ 2020-21 में 24.23 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने के लिए हमें 23 फीसदी से अधिक की वृद्धि हासिल करनी होगी। यानी बजट में उल्लिखित दर के लगभग दोगुना। मौजूदा दौर में कोविड-19 के प्रभाव के बीच यह नामुमकिन लगता है।

यदि मान लिया जाए कि 2020-21 की नॉमिनल वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और कर उछाल (टैक्स बॉयन्सी) 1.2 फीसदी बनी रहेगी तो दोनों मानकों पर यह हकीकत से दूर नजर आता है। परंतु इन अनुमानों के आधार पर भी अनुमानित कर उछाल दर 1.6 तक ही जा पाएगी। यह दर भी आर्थिक मंदी के बीच लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। दूसरी ओर, विनिवेश प्राप्तियों में 223 फीसदी का इजाफा करना असंभव है और इससे सरकार का राजकोषीय घाटा लक्ष्य और भी अप्राप्य हो जाएगा।

ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार राजस्व संग्रह में संभावित गिरावट से अनभिज्ञ है। यह सही है कि उसने चालू वर्ष के अपने उधारी कार्यक्रम में बदलाव नहीं किया है लेकिन कम राजस्व संग्रह की स्थिति में सरकारी वित्त पर से दबाव कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने वेज ऐंड मींस एडवांसेस (डब्ल्यूएमए)की सीमा को चालू वर्ष की पहली छमाही में केंद्र के लिए 60 फीसदी और राज्यों के लिए 30 फीसदी बढ़ा दिया है।

डब्ल्यूएमए वह तरीका है जिसकी मदद से केंद्र और राज्य सरकारों को राजस्व और व्यय की अस्थायी विसंगति से उबारा जाता है। परंतु आरबीआई पहले ही कह चुका है कि यदि केंद्र अपनी डब्ल्यूएमए सीमा का 75 प्रतिशत तक इस्तेमाल कर लेता है तो वह बॉन्ड जारी करने पर विचार करेगा। केंद्र जरूरत पडऩे पर अपनी उधारी कभी भी बढ़ा सकता है।

हो सकता है इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी जाए कि चालू वर्ष में केंद्र के कर राजस्व अनुमान गलत कैसे हो गए। परंतु कोविड-19 की लंबी छाया को 2019-20 की राजस्व कमी ने और गहरा बना दिया है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।

Keyword: GST, CGST, Economic, Coronavirus, Lockdown, Covid-19, Pandemic, Virus, Flu, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, महामारी, राजस्व,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद उद्योग जगत में लौटेगा आत्मविश्वास?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.