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मुख्य श्रेणी के विदेशी निवेशकों के लिए नियम हुए आसान

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई 04 08, 2020

बाजार नियामक सेबी ने कैटिगरी-1 लाइसेंस के इच्छुक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए नियम आसान बना दिया है। इस कदम को शेयरों में विदेशी निवेश में इजाफे के तौर पर देखा जा रहा है। फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) सदस्य देशों के बाहर वाले मुल्कों के निवेशक अभी भी ऐसे पंजीकरण के पात्र हो सकते हैं, अगर भारत सरकार उन देशों को निर्दिष्ट करती है। इस कदम से मॉरीशस व पश्चिम एशिया जैसे इलाकों के जरिये आने वाले फंडों व निवेशों को फायदा मिल सकता है और भारत में विदेशी निवेश बढ़ सकता है। यह मानना है विशेषज्ञों का।

अभी एफएटीएफ के 39 सदस्य हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, लग्जमबर्ग, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन शामिल हैं। पश्चिम एशियाई देश मसलन बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत और यूएई इसके सदस्य नहीं हैं।

पिछले साल सितंबर में तीन श्रेणियों में वर्गीकरण के बाद करीब 80 फीसदी एफपीआई को कैटिगरी-1 यानी पहली श्रेणी में रख दिया गया। कैटिगरी-1 में रहने का मतलब अनुपालन का कम बोझ, सरल केवाईसी नियम और कम दस्तावेज की दरकार और निवेश पर काफी कम पाबंदी है। ऐसे निवेशक ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट सबस्क्राइब और जारी कर सकते हैं और प्रत्यक्ष हस्तांरण के प्रावधान में नहीं हैं।

पुनर्वर्गीकरण से पहले करीब तीन फीसदी एफपीआई ही कैटिगरी-1 का हिस्सा था और अधिकतर कैटिगरी-2 में शामिल थे। सिर्फ 13 फीसदी फंडों को ही कैटिगरी-3 में रखा गया था।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर राजेश गांधी ने कहा, यह कदम कैटिगरी-1 के तहत पात्र सूची का विस्तार एफएटीएफ सदस्य देशों से आगे करेगा। इसका मतलब ऐसे देशों से आने वाले एफपीआई के लिए न सिर्फ कम केवाईसी होगा बल्कि प्रत्यक्ष शेयर हस्तांतरण के नियमों से भी उन्हें छूट मिलेगी। गांधी ने कहा, एमएससीआई इंडेक्स में बदलाव के अलावा इससे भी देश में निवेश लाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों ने कहा कि गैर एफएटीएफ देशों मसलन मॉरीशस और पश्चिम एशिया के देश अब इस विशिष्ट सूची में शामिल होने के लिए लॉबीइंग कर सकते हैं।

विल्सन फाइनैंशियल सर्विसेज की निदेशक नेहा मालवीय ने कहा, यह स्थापित तथ्य है कि कैटिगरी-1 में आने वाले एफपीआई फंडों की निवेशकों के बीच ज्यादा स्वीकार्यता है, इसी वजह से दुबई, केमन द्वीप और मॉरीशस जैसे देश भारत सरकार से छूट पाने की कोशिश करेंगे।

मॉरीशस, केमन द्वीप, साइप्रस और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड से आने वाले ज्यादातर फंड अभी कैटिगरी-2 में वर्गीकृत हैं। भारत के साथ संधि में संशोधन के बावजूद मॉरीशस भारत में एफपीआई की रकम का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।

नांगिया एंडरसन के पार्टनर सुनील गिडवानी ने कहा, यह पहला मौका है जब एफएटीएफ सदस्यों के अतिरिक्त सरकारी अधिसूचित देश भी कैटिगरी-1 में पंजीकरण के पात्र होंगे। मॉरीशस, केमन द्वीप और इंडोनेशिया गैर-एफएटीएफ देशों में अहम हैं, क्योंकि ये भारतीय शेयर बाजारों में द्वितीयक निवेश के लिहाज से प्रासंगिक हैं।

गिडवानी के मुताबिक, कैटिगरी-1 की पात्रता एफपीआई को परिचालन में काफी लचीलापन मुहैया कराएगा और उन्हें नए निवेशकों को आकर्षित करने में मदद भी करेगा। उन्होंंने कहा, कैटिगरी-1 में पंजीकृत होने से एफपीआई के लिए भारतीय बाजार तक पहुंचने की प्रक्रिया प्रवेश समय में काफी आसान हो जाएगी क्योंकि उन्हें ऑफशोर ट्रांसफर टैक्स के प्रावधानों का अनुपालन करने की जरूरत नहीं होगी।

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