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केंद्र के निर्देश के बावजूद बागान खोलने से इनकार

अभिषेक रक्षित / कोलकाता April 07, 2020

कोविड-19 के प्रकोप के कारण पश्चिम बंगाल के उत्तरी क्षेत्रों में स्थिति अभी भी गंभीर होने कारण राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चाय बागानों को कारोबार करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। राज्य सरकार का यह आदेश केंद्र की ओर से चाय उगाने वाली कंपनियों को देश भर में 50 फीसदी कार्यबल के साथ चाय उगाने का गतिविधि शुरू करने की अनुमति दिए जाने के बावजूद आया है।

बनर्जी ने राज्य सरकार के इस आदेश का कारण बताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल का उत्तरी हिस्सा रणनीतिक स्थान है जहां पर बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। यह इलाका पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्किम का एकमात्र  प्रवेश द्वार भी है।

बनर्जी ने कहा, 'हमें इसे कुछ और समय तक ध्यानपूर्वक देखने की जरूरत है और बागानों को अभी खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कलिम्पोंग में स्थिति ठीक नहीं है और चाय बागान में काम करने वाले कामगारों के संक्रमित होने के जोखिम से बचना बेहतर निर्णय है।'

बहुत से चाय बागान कलिम्पोंग के करीब हैं। हालांकि  ज्यादातर वे वर्ष भर स्वयं से ही पृथक्करण का पालन करते हैं। कलिम्पोंग में 2 अप्रैल को जान गंवाने वाली महिला के परिवार के छह सदस्यों में कोविड-19 की पुष्टि हुई है।

दार्जिलिंग और दोआर में एस्टेट वाले उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'राज्य प्रशासन पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में सक्रियता से स्थिति पर नजर रख रहा है और संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए यह निर्णय लिया गया होगा।' हालांकि चाय कंपनियों को लगता है कि उन्हें अपने घाटे की भरपाई की जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी, अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है।

जय श्री टी ऐंड इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी डीपी माहेश्वरी ने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि इस महीने थोड़ी भरपाई हो जाएगी। लेकिन अब यह उत्पादन पूरी तरह से बंद रहने का परिदृश्य होगा, जिससे भारी घाटा होगा।'

गुडरिक समूह के प्रबंध निदेशक अतुल अस्थाना ने कहा कि दार्जिलिंग में पहले से तैयार हो चुकी 8 लाख किलोग्राम की समूची फसल बरबाद हो चुकी है और दोआर की फसल को भी धक्का लगेगा।  अप्रैल में हुए उत्पादन में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी करीब 28 फीसदी है जो करीब 8.5 करोड़ किलोग्राम बैठती है। असम की हिस्सेदारी 54 फीसदी है और बाकी हिस्सा दक्षिण भारत का है।

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