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खुदरा बिक्री घटने से मॉल मालिकों पर बढ़ा दबाव

राघवेंद्र कामत और विवेट सुजन पिंटो / मुंबई April 07, 2020

मॉल डेवलपर्स और खुदरा कारोबारियों के बीच किराया माफी के विवादास्पद मुद्दे पर सहमति नहीं बन पा रही है। उनके बीच यह मतभेद ऐसे समय पर उभरे हैं जब ग्रॉसरी को छोड़ कर खुदरा उद्योग के पास 24 मार्च से घोषित बंदी के कारण किराया रोकने का कारण है।

डीएलएफ और फीनिक्स मिल्स जैसे डेवलपर कहते हैं कि खुदरा कारोबारियों ने पूर्ण बंदी होने के कारण 'अप्रत्याशित घटना' का उपनियम लगाने का संकेत दिया है जो किसी भी सूरत में बंदी की अवधि पर लागू नहीं होता है।

मुंबई, पुणे, बेंगलूरु और दूसरे शहरों में मॉल का परिचालन करने वाली फीनिक्स मिल्स के प्रबंध निदेशक शिशिर श्रीवास्तव कहते हैं, 'हमें खुदरा कारोबारियों के साथ किराये के मुद्दे पर मिलकर काम करना होगा। मॉल खुलने की गुंजाइश बनने के बाद ही हम निर्णय कर सकते हैं।'

मोदी सरकार की ओर से घोषित 21 दिनों की देशबंदी 14 अप्रैल को समाप्त हो रही है। लेकिन देश में कोरोनावायरस (कोविड-19)  के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकारें अपने स्तर पर बंदी की अवधि को बढ़ा सकती हैं। 

श्रीवास्तव कहते हैं कि सरकार के निर्देश के कारण जब मॉलों, मल्टीप्लेक्सों और खुदरा प्रतिष्ठानों को अस्थायी तौर पर बंद रखा गया है तो 'अप्रत्याशित घटना' का उपनियम लगाने को कोई अर्थ नहीं है। वह कहते हैं कि कारोबार फिर से शुरू हो जाएगा जिसका खुदरा कारोबारी बाजार कमजोर रहने का हवाला देकर विरोध कर रहे हैं।

वी-मार्ट रिटेल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के साथ साथ रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के सदस्य ने कहा कि मॉल मालिक पार्टनर हैं और ये खुदरा कारोबारी समस्या के उचित समाधान पर विचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि यह प्रयास मॉल मालिकों के साथ हमारे संबंध को खराब करने वाला है। वे महत्त्वपूर्ण पार्टनर हैं। लेकिन ज्यादातर खुदरा कारोबारी मॉल मालिकों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में नतीजे बातचीत के आधार पर अलग अलग होंगे।' किराया माफी के मुद्दे पर एक स्पष्ट कार्य योजना के अभाव में डेवलपरों ने कहा कि वे सामूहिक स्थल के रखरखाव पर लगने वाले शुल्क को घटाने और इसे खुदरा कारोबारियों के कंधों पर डालने पर काम कर रहे हैं। 

इसके उलट जिन डेवलपरों से बिजनेस स्टैंडर्ड ने बातचीत की है, उनका कहना है कि उन्होंने अब तक अपने ग्राहकों के लिए किराये की रसीद नहीं निकाली है जिसका मतलब है कि परिस्थिति की गंभीरता को पूरी तरह से उन पर ही नहीं छोड़ दिया गया है।

डीएलएफ शॉपिंग मॉल्स की कार्यकारी निदेशक पुष्पा बेक्टर ने कहा, 'ऐसे समय में हमें धैर्य से काम लेने की जरूरत है और नए सिरे से सामान्य होने के लिए कारोबारी रणनीति बनाई जानी चाहिए।' आरएआई के मुख्य कार्याधिकारी कुमार राजगोपालन ने कहा कि खुदरा कंपनियों के ज्यादातर प्रमुख उम्मीद कर रहे हैं कि कोविड-19 महामारी से उपजे संकट और उसके बाद हुई बंदी अप्रैल-जून तिमाही से आगे जा सकती है।

उन्होंने कहा, 'इस संकट से उबरने में करीब नौ महीने का समय लग सकता है और खुदरा कारोबारी सरकार, बैंकों और सहायोगी साझेदारों की सहायता से इस अवधि से पार पा लेंगे। आगे का रास्‍ता साझेदारी से निकलेगा।'  

आरएआई ने सरकार से तुरंत राहत कदम उठाने के लिए कहा है ताकि करीब 60 लाख लोगों को रोजगार देने वाले इस क्षेत्र को पर्याप्त पूंजी मिल सके। इसके तहत खुदरा कारोबारियों को ऋण भुगतान पर दी गई मोहलत को बढ़ाकर 270 दिन किए जाने, नकदी संकट से बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी मुहैया कराने और मजदूरी तथा वेतनों के भुगतान के लिए आसान क्रेटिड लाइन उपलब्ध कराने की जरूरत है।  भय इस बात है कि यदि तेजी से राहत उपाय नहीं किए गए तो बाजार में 30 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले छोटे और मध्यम खुदरा कारोबारी अगले कुछ महीनों में इससे बाहर हो जाएंगे।

बियोंड स्क्वायरफीट एडवाइजरी के संस्थापक सुशील एस डुंगरवाल ने कहा, 'ऐसा इसलिए है क्योंकि छोटे और मध्यम खुदरा ब्रांडों के पास प्रमुख जगहों पर भूस्वामियों के साथ अप्रत्याशित घटना का उपनियम नहीं है।'

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