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तंगहाल राज्यों ने महंगी दर पर जुटाई रकम

अनूप राय / मुंबई April 07, 2020

कोरोनावायरस से पैदा हुए हालात और विदेशी निवेशकों के हाथ समेटने के बाद रकम जुटाने के लिए राज्यों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। राज्य सरकारों ने मंगलवार को बॉन्ड बाजार से करीब 32,560 करोड रुपये जरूर जुटाए, लेकिन उन्हें यह सौदा काफी महंगा पड़ा। दूसरी तरफ आर्थिक सुस्ती के बीच बाजार में कारोबारी घंटे कम होने के बाद अपने पास अधिक से अधिक नकदी रखने के लिए निवेशक नकारात्मक बोली लगाने की रणनीति आजमा रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो वे जान बूझकर बॉन्ड के लिए काफी कम कीमतें दे रहे हैं। राज्यों एवं केंद्र सरकार की तरफ  से भारी उधारी देखते हुए घरेलू निवेशकों ने बॉन्ड बाजार में समतुल्य सरकारी बॉन्ड के मुकाबले 140 से 200 आधार अंत तक अधिक प्रतिफल की मांग की। राज्यों के पास निवेशकों की मांग पूरी करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। उदाहरण के लिए केरल ने 15 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड पर 8.96 प्रतिशत ब्याज का भुगतान किया। इतनी ही अवधि के सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल 6.92 प्रतिशत दर्ज की गईं। सामान्य हालात में सरकारी प्रतिभूतियों की तुलना में दूसरे बॉन्ड पर प्रतिफल में 60 से 70 आधार अंक से अधिक का अंतर नहीं रहता है।

उधारी कार्यक्रम के अनुसार देश के 19 राज्यों ने 37,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना तैयार की थी, लेकिन वे 32,560 करोड़ रुपये ही जुटा पाए। बॉन्ड बाजार में मौजूदा कारोबार पर एक बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा, 'बाजार में बॉन्ड की बिल्कुल मांग नहीं है। लिहाजा, बैंकों ने इस अंदाज में बोली लगाई कि रकम जुटाने वाले  तैयार नहीं हो पाए। हालांकि राज्यों को विवशता में बोलियां स्वीकार करनी पडीं।'

अधिकारी ने आगाह किया कि ऐसा न हो कि बॉन्ड बाजार में मौजूदा कारोबारी ढर्रा अपवाद न होकर सामान्य चलन का हिस्सा बन जाए। ऐसा हुआ तो आने वाले समय में केंद्र सरकार को भी रकम जुटाने के लिए भारी कीमत अदा करनी पड़ सकती है। अधिकारी के अनुसार द्वितीयक बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के जरिये बॉन्ड खरीदने की स्थिति में ही सरकार की नैया पार होगी। एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक में परिसंपत्ति-देनदारी प्रबंधन प्रमुख देवेंद्र दास ने कहा, 'राज्यों के बॉन्ड का बाजार में कारोबार नहीं होता है, इसलिए मांग कम है। बाजार में कारोबारी घंटे भी कम कर दिए हैं और इससे भी मांग के बारे में पुख्ता तौर पर कुड कह पाना मुमकिन नहीं लग रहा है। कुल मिलाकर बाजार आरबीआई से मदद की मांग कर रहा है।'

मंगलवार को बॉन्ड और मुद्रा बाजार 2 बजे बंद हो गया है, जो अमूमन 5 बजे शाम तक खुले रहते हैं। कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण 17 अप्रैल तक बाजार में सुबह 10 बजे से लेकर दोहपर 2 बजे तक कारोबार होगा। फस्र्ट रैंड बैंक के ट्रेजरी प्रमुख हरिहर कृष्णमूर्ति ने कहा, 'इस समय ज्यादातर लोग घर से ही काम कर रहे है, इसलिए कम लोग खरीदारी के लिए आगे आ रहे हैं। सावधि ऋण भुगतान तीन महीने तक टालने के आरबीआई के निदेश के बाद बैंकों को नकदी के मामले में सतर्क रहना होगा। पहले उन्होंने जिस सीमा तक नकदी आने का अनुमान लगाया था वैसा नहीं होता दिख रहा है।'

चालू तिमाही के लिए राज्यों ने 1.29 लाख करोड़ और केंद्र ने 21,0000 करोड़ रुपये तक उधार लेने की योजना तैयार की है,लेकिन आरबीआई ने अब तक इसमें ओएमओ के जरिये सहयोग नहीं किया है।

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