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ओएमसी को राहत: कच्चे तेल में गिरावट से मदद मिलेगी

उज्ज्वल जौहरी /  04 06, 2020

 

 

बाजार में गिरावट के बीच हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम  (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल (आईओसी) जैसी सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के शेयरों में अपने 2020 के ऊंचे स्तरों से 30-40 प्रतिशत की कमजोरी आई है। हालांकि इन कंपनियों के लिए सकारात्मक बदलाव भी आया है। कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 18 साल के निचले स्तर पर आ गई हैं जिससे इन कंपनियों को दीर्घावधि के संदर्भ में संभावनाएं मजबूत हुई हैं। ओएमसी के शेयर हाल में 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद पिछले दो कारोबारी सत्रों में फिर से 15 प्रतिशत तक चढ़ गए थे। 
नकारात्मक खबर यह है कि तेल कीमतों में ताजा गिरावट और लॉकडाउन की वजह से मांग में कमी से इन्वेंट्री नुकसान (कच्चे तेल और उत्पादों पर) के साथ साथ मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा, और इस वजह से ओएमसी की अल्पावधि आय प्रभावित होगी। सेंट्रम ब्रोकिंग के विश्लेषकों को कमजोर मार्जिन, इन्वेंट्री नुकसान, मांग में कमी आदि को देखते हुए चौथी तिमाही में ओएमसी के परिचालन एवं शुद्घलाभ में 66-86 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका हैँ
वहीं अच्छी खबर यह है कि इन नकारात्मक घटनाक्रम का प्रभाव अब शेयर कीमतों पर दिख चुका है। आय में कटौती के बावजूद सेंट्रम ब्रोकिंग ने तीन ओएमसी के शेयरों के लिए सस्ते मूल्यांकन की वजह से खरीदारी की रेटिंग दी है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार कमजोरी इन कंपनियों के लिए अच्छा संकेत है, क्योंकि इससे उनके विपणन मार्जिन में वृद्घि, कार्यशील पूंजी जरूरतों में कमी और सब्सिडी बोझ के खतरे में कमी लाने में मदद मिलेगी। सरकार को भी केरोसिन और कुकिंग गैस कीमतों को लकर कई और सुधार लाने का अवसर मिलेगा, जो ओएमसी के लिए सकारात्मक होगा।
इस वजह से अल्पावधि चिंताओं को दरकिनार करते हुए विश्लेषकों का कहना है कि ओएमसी वृद्घि के लिहाज से अच्छी स्थिति में बनी रहेंगी, क्योंकि लॉकडाउन समाप्त होने पर इनके लिए मांग बढऩे की संभावना है। विपणन मार्जिन (पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन पर) का परिदृश्य भी मजबूत बना हुआ है। रिलायंस सिक्योरिटीज के योगेश पाटिल का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत में प्रति 1 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट की वजह से ओएमसी के शुद्घ विपणन मार्जिन में 0.45 रुपये प्रति लीटर (45 पैसे) तक का इजाफा होता है। हालांकि सरकार द्वारा खुदरा ईंधन पर शुल्क बढ़ाए जाने की स्थिति में यह मार्जिन कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है।
कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि डीजल और गैसोलिन पर सकल खुदरा विपणन मार्जिन (प्रति लीटर आधार पर)का उनका अनुमान 27 मार्च 2020 को एक सप्ताह पहले के 8.1 रुपये और 7.1 रुपये से सप्ताह-दर-सप्ताह बढ़ाकर 11.8 रुपये और 13.3 रुपये कर दिया गया। सकारात्मक संदर्भ में, प्रमुख पॉलिमर के लिए भी मार्जिन हाल के सप्ताह में बढ़ा है। नाफ्था और गैस कीमतों में गिरावट की वजह से इस मार्जिन में इजाफा हुआ है।
एडलवाइस का कहना है कि वैश्विक रूप से जीआरएम में तेज गिरावट आई है और भारत में रुझान समान बना हुआ है। हालांकि ओएमसी का खुदरा ईंधन मार्जिन बढ़ा है, और इससे कमजोर बिक्री और कमजोर सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) की भरपाई हुई है।
उनका कहना है, 'हमारा मानना है कि वित्त ओएमसी की वर्ष 2021 की अनुमानित आय में हमारा 12-21 प्रतिशत कटौती का अनुमान फिलहाल पर्याप्त है। दरअसल, हम मान रहे हैं कि भारतीय रिफाइनरियां दीर्घावधि में मजबूत स्थिति में होंगी, क्योंकि वे प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाएंगी।' वित्त वर्ष 2021 के अनुमानों में कटौती के बावजूद ओएमसी के लिए 20-75 प्रतिशत की आय वृद्घि का संकेत दिख रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि तीनों कंपनियों में एचपीसीएल की कुल राजस्व में खुदरा बिक्री की सबसे ज्यादा भागीदारी है और वह विपणन मार्जिन के लिए बेहतर परिदृश्य से लाभान्वित होने के लिहाज से मजबूत स्थिति में है। यह शेयर पिछले दो कारोबारी सत्रों में 10 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है, जबकि आईओसी के शेयर ने इस अवधि में 3.4 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई। एचपीसीएल की तुलना में आईओसी के लिए चिंताएं ज्यादा हैं। 

 

 
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