बिजनेस स्टैंडर्ड - ब्याज दर पर कैंची चली मगर लघु बचत योजनाएं अब भी भली
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 03, 2020 07:02 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

ब्याज दर पर कैंची चली मगर लघु बचत योजनाएं अब भी भली

जयदीप घोष और संजय कुमार सिंह /  April 06, 2020

सरकार ने पिछले हफ्ते छोटी बचत दरों की ब्याज दर में अच्छी खासी कटौती कर दी। हालांकि यह अप्रत्याशित कदम नहीं था और रीपो दर तथा नकद आरक्षी अनुपात में भारीभरकम कटौती के भारतीय रिजर्व बैंक के कदम के बाद सरकार की इस घोषणा का इंतजार ही किया जा रहा था। मगर ब्याज दर में इतनी तगड़ी कैंची चलने का अंदशा शायद ही किसी को रहा हो। सरकार ने चालू तिमाही यानी अप्रैल से जून महीने के लिए लघु बचत दरों में 70 से 140 आधार अंकों की कटौती का ऐलान कर दिया, जो वाकई में अप्रत्याशित था।

सरकार के इस फैसले की सबसे ज्यादा मार बुजुर्गों और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) में रकम लगाने वालों पर पड़ी है। अभी तक सरकारें बुजुर्गों को रियायत और प्रोत्साहन देती आई थीं मगर इस बार वरिष्ठï नागरिक बचत योजनाओं के ब्याज की दर पूरे 120 आधार अंक कम हो गई। इन योजनाओं पर 8.6 फीसदी ब्याज मिल रहा था, लेकिन अब केवल 7.4 फीसदी ब्याज मिल रहा है। पीपीएफ भी 7.9 फीसदी के बजाय अब 7.1 फीसदी ब्याज ही देगा यानी उसमें भी 80 आधार अंक की कमी आ गई है। मगर सबसे ज्यादा कटौती 1 से 3 साल की सावधि जमा योजनाओं के ब्याज में की गई है। इनकी ब्याज दर 140 आधार अंक कम कर दी गई है। अछूती रही तो केवल बचत खाते पर ब्याज की दर। यह अब भी सालाना 4 फीसदी पर बरकरार है।

सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'ये दरें जानबूझकर ज्यादा रखी गई थीं। 10 साल के सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल फिलहाल 6.13 फीसदी के आसपास चल रहा है। ऐसे में पीपीएफ पर प्रतिफल की दर 7.9 फीसदी पर रखने की कोई तुक ही नहीं बनती। लघु बचत योजनाओं में ब्याज की दर ऊंची रहने का मतलब यह था कि बैंकों को भी अपनी जमा दरें ऊंची रखनी पड़तीं। ऐसे में अर्थव्यवस्था में कम ब्याज दर की सुविधा ठप पड़ जाती। छोटे निवेशक के लिहाज से देखें तो यह कदम नुकसानदेह है मगर व्यापक तस्वीर देखी जाए तो यह अनुचित नहीं लगता।'

बैंकबाजार के मुख्य कार्य अधिकारी आदिल शेट्टïी इस झटके के बाद भी लघु बचत योजनाओं से किनारा करने की सलाह बिल्कुल नहीं देते। उनके हिसाब से निवेश में इन योजनाओं का खास स्थान है। वह कहते हैं, 'दर में कटौती के बाद भी पीपीएफ, एनएससी, डाकघर सावधि जमा और दूसरी छोटी बचत योजनाएं निश्चित प्रतिफल देती हैं और उनमें पूंजी सुरक्षित भी रहती है। इनके जरिये हमारी निवेश की रणनीति तैयार होती है। दुनिया भर के हालात और मंदी की बढ़ती आशंका के बीच कम ब्याज दर देखकर इन योजनाओं में निवेश जारी रखने से परहेज मत कीजिए। याद रखिए कि दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिहाज से इन योजनाओं में निवेश अहम है।'

बेशक ब्याज दरों में कटौती कर दी गई है मगर इनमें से कई योजनाओं पर ब्याज दर अब भी अधिक है और वे आकर्षक बनी हुई हैं। बैंक तो पहले ही जमा पर ब्याज दर में कटौती करने लगे हैं। भारतीय स्टेट बैंक रीपो दर में कटौती के बाद उधारी दरों में 75 आधार अंक की कटौती की मगर उसने खुदरा ग्राहकों के लिए जमा पर ब्याज दर में भी 20 से 50 आधार अंक की कमी कर डाली। नई परिस्थिति में अगर कोई व्यक्ति स्टेट बैंक की सावधि जमा में तीन महीने के लिए पैसा लगाता है तो उसे 5 फीसदी की दर से ब्याज हासिल होगा। लेकिन बैंक की एक साल की दर 5.70 फीसदी पर बरकरार है और वरिष्ठ नागरिकों को 50 आधार अंक ज्यादा यानी 6.2 फीसदी की दर से ब्याज हासिल होगा।

निवेश का प्रदर्शन देखें तो पिछले कुछ समय में डेट फंडों का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा है। पिछले तीन महीनों में अल्ट्रा शॉर्ट-टर्म फंड श्रेणी का औसत प्रतिफल 1.26 फीसदी रहा है और इनका एक साल का प्रतिफल 0.53 फीसदी रहा है। सभी डेट फंड श्रेणियों में इस श्रेणी का औसत प्रतिफल तीन महीने में -1.37 फीसदी से 4.46 फीसदी तक रहा है। पूरे साल के लिए प्रतिफल का -2.64 फीसदी से 15.68  फीसदी तक है।

जोखिम से परहेज करने वालों को भी अपने पोर्टफोलियो में इन योजनाओं को रखना चाहिए। उसकी वजह यह है कि डेट फंड की श्रेणी में काफी उथलपुथल चल रही है। पिछले 18 महीनों में बड़ी संख्या में कंपनियों ने डिफॉल्ट किया है, जिसकी वजह से फंड कंपनियों को ऐसी प्रक्रिया अपनानी पड़ी, जिसमें फंड कंपनी किसी भी एक पोर्टफोलियो में भुनाने लायक परिसंपत्तियों को उन परिसंपत्तियों से अलग करता है, जो फंसी होती हैं। अगर ऐसा नहीं किया जाए तो क्रेडिट प्रोफाइल पर असर पड़ सकता है। कुछ फंड कंपनियों ने अपनी अलग-अलग डेट योजनाओं में कई कंपनियों की प्रतिभूतियों का वर्गीकरण ऐसे ही करना शुरू कर दिया है और यह जोखिम लेने वालों के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है ।

निवेशक रकम लगाने के लिए कोई भी विकल्प चुनें मगर पहले उन्हें लघु बचत योजनाओं पर कर कटौती के बाद मिलने वाला प्रतिफल देखना चाहिए और उसकी तुलना निश्चित आमदनी वाली अन्य योजनाओं से करनी चाहिए। ऐसा करने पर पता चलेगा कि छोटी बचत योजनाओं का प्रदर्शन कितना जानदार रहा है।

राघव कहते हैं, 'सभी योजनाओं और अन्य डेट योजनाओं के प्रतिफल में भी कमी आएगी। आपको ऐसे विकल्प मिलने की संभावना नहीं है, जो आपको बेहतर प्रतिफल दर देंगे। कर मुक्त बॉन्ड भी द्वितीयक बाजार में बमुश्किल 5.5 फीसदी प्रतिफल दे पा रहे हैं, जबकि पीपीएफ खाते में निवेश कर आप अब भी 7.1 फीसदी प्रतिफल हासिल कर सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि पीपीएफ और सुकन्या समृद्घि खाते पर मिलने वाली रकम पूरी तरह कर मुक्त है। यह वजह भी इन योजनाओं को आकर्षक बनाती है।'

Keyword: Investment, Investor, Market, Stock, FPI, निवेश, शेयर बाजार, निवेशक, डेट फंड, एफआईआई, ब्याज दर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद उद्योग जगत में लौटेगा आत्मविश्वास?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.