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मार्केट यार्ड घोषित होंगे गोदाम

राजेश भयानी /  April 06, 2020

देश के किसान अब जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि मंडी (ई-नाम) पोर्टल पर सीधे अपने उत्पाद बेचने में सक्षम हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को वे शर्तें पूरी करने के लिए कहा है, जिनके तहत ई-नाम से जुड़ते वक्त उन्होंने अपने गोदामों को मार्केट यार्ड (कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री एवं मूल्यांकन केंद्र) घोषित करने पर हामी भरी थी।

देश में लॉकडाउन के बीच किसानों की मदद के लिए कई अन्य उपायों पर भी काम चल रहा है। इनमें फसलों को किसान संगठनों के संग्रह केंद्रों तक पहुंचाने और वहां से ई-नाम पर इनकी बिक्री के प्रावधान भी शामिल हैं। इसके साथ ही परिवहन सेवा प्रदाताओं को ई-नाम प्लेटफॉर्म से जोडऩे पर भी विचार चल रहा है। ये सभी सुधार अप्रैल तक लागू करने की योजना तैयार की गई है। इस वर्ष अप्रैल में ई-नाम व्यवस्था को अस्तित्व में आए चार वर्ष पूरे हो जाएंगे।

राज्य की कृषि उत्पाद विपणन समितियां (एपीपीएमसी) जब इन ई-नाम व्यवस्था से जुड़ती हैं, तो उन्हें केंद्र सरकार की तरफ से सब्सिडी मिलती है। हालांकि इसके लिए राज्यों को तीन शर्तें पूरी करनी पडती हैं। सबसे पहले उन्हें वेयरहाउस विकास नियामक प्राधिकरण के तहत पंजीकृत गोदामों को मार्केट यार्ड घोषित करना पड़ता है। अन्य शर्तों में केंद्र के प्रस्तावित एपीएमसी कानून को लागू करना भी शामिल है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश ने अपने गोदामों को मार्केट यार्ड-मंडी घोषित कर दिए हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में ऐसे क्रमश: 14 और 23 गोदाम हैं। कोविड-19 संकट के बीच किसानों की परेशानियां दूर करने के लिए ये सभी कदम उठाए गए हैं। किसान अब तक अपने उत्पाद मंडियों तक लाते रहे थे, लेकिन कोरोनावायरस संक्रमण के प्रसार के बाद मंडियां या तो बंद हैं या फसल के परिवहन के लिए साधन उपलब्ध नहीं हैं।

दलहन, तिलहन पेराई इकाइयां और फ्लोर मिलों तक लॉकडाउन के कारण जिंस नहीं पहुुंच पा रहे हैं। इन दिक्कतों के बीच सरकार ने ई-नाम व्यवस्था से जुड़े राज्यों को डब्ल्यूडीआरए के तहत पंजीकृत गोदामों को बाजार के तौर पर अधिसूचित करने के लिए कहा है। देश के करीब 16 राज्य इस बात के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन उन्होंने अब तक अपने किसी गोदाम को मार्केट यार्ड घोषित नहीं किया है। सरकार में एक सूत्र ने बताया कि राज्यों को इस बारे में औपचारिक तौर पर सूचित किया जाएगा। सरकार ने ई-नाम पोर्टल से देश के 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की मंडियों को जोड़ दिया है। इनके अलावा देश की 416 और मंडियां भी ई-नाम पोर्टल से जोड़ी जाएंगी, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 1,000 हो जाएंगी।

ई-नाम व्यवस्था के किसान अपनी फसलें गोदामों तक ला सकते हैं। गोदामों में उनकी फसलों का वर्गीकरण गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा और अगर गोदाम मार्केट यार्ड घोषित किए गए हैं तो वे एक इलेक्ट्रिॉनिक रिसीट जारी करेंगे। यह रिसीट ई-नाम से जोड़ दी जाएगी। इस तरह, यह रिसीट फ्रीली ट्रांसफरेबल निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट, ईएनडब्ल्यूआर मानी जाएगी। इस प्रक्रिया के बाद किसानों पर उनकी बिकी फसलों की आपूर्ति की जिम्मेदारी नहीं होगी और खरीदारों को ही इसका प्रबंध करना होगा। रिपॉजिटरी ऐसी रिसीट और उनके हस्तांतरण का लेखा-जोखा उसी तरह रखेंगे जैसा डिपॉजिटरी प्रतिभूतियों के मामले में करते हैं। एनसीडीईक्स और अन्य निवेशकों द्वारा स्थापित रिपॉजिटरी एनईआरएल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी केदार देशपांडेय ने कहा, 'ईएनडब्ल्यूआर-ई-नाम संयुक्त व्यवस्था से गोदाम के स्तर पर बिक्री बढ़ेगी और किसानों के समक्ष मजबूरी में सस्ते दाम पर अपने उत्पाद बेचने की नौबत नहीं आएगी। इससे अनाज एवं अन्य फसलों के परिवहन पर आने वाला खर्च भी कम हो जाएगा, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।'

सरकार ने एक अन्य अहम सुधार की भी घोषणा की है, जिससे किसानों को मंडी आने की जरूरत नहीं होगी। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) अपने उत्पाद एपीएमसी में लाए बिना संग्रह केंद्रों पर बेच सकते हैं। दूर बैठे खरीदारों को कोई परेशानी नहीं हो, इसके लिए किसान अपने उत्पाद एवं इसकी गुणवत्ता के प्रमाण की फोटो अपने परिसरों से अपलोड कर सकते हैं। एफपीओ को उनके परिसरों से उत्पाद की आपूर्ति का अधिकार है या फिर वे सफल बोली के बाद इसे मंडी तक भी ला सकते हैं। देश में हजारों एफपीओ हैं। सरकार इनके संग्रह केंद्रों को गोदामों के तौर पर पंजीकृत कर रही है, जिन्हें बाद में ई-नाम से जोड़ा जा सकता है।

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