बिजनेस स्टैंडर्ड - कृषि उपज की बिक्री के नियमों में ढील
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कृषि उपज की बिक्री के नियमों में ढील

राजेश भयानी /  April 06, 2020

केंद्र सरकार की तरफ से जारी बहुत सी अधिसूचनाओं और हाल ही में राज्यों को लिखे गए पत्रों से उपभोक्ता की मेज पर कृषि एवं खाद्य उत्पाद समय पर और बिना किसी अड़चन के पहुंचेंगे। इन उपायों में एपीएमसी (कृषि उपज विपणन समिति) के क्षेत्राधिकार को मंडी क्षेत्र तक सीमित करना, बड़े खुदरा विक्रेताओं और जिंस प्रसंस्करणकर्ताओं को सीधे किसानों से खरीद की मंजूरी देना और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन की खातिर पास जारी करने के लिए प्राधिकरण को विकेंद्रित बनाना आदि शामिल हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से भेजे गए पत्र में राज्यों को सलाह दी गई है कि वे एपीएमसी अधिनियम और मंडियों को नियंत्रित करने वाले नियमों में तीन महीने के लिए ढील दें। इसके तहत किसानों को बिना किसी लाइसेंस या पंजीकरण प्रक्रिया के बड़े खरीदारों, प्रसंस्करणकर्ताओं और बड़े खुदरा विक्रेताओं को सीधे बिक्री की मंजूरी दी जाए। हालांकि कृषि राज्यों का विषय है, इसलिए राज्य सरकारों को यह मंजूरी देनी होगी।

इस कदम से हजारों दाल मिलें, तिलहन पेराई इकाइयां और आटा मिल इन जिंसों की सीधे खरीद कर पाएंगी। दलहन और खाद्य तेल प्रसंस्करण उद्योगों ने कहा है कि उन्हें सीधे किसानों से खरीद की मंजूरी दी जाए।

राज्यों को केवल तीन महीने के लिए सभी एपीएमसी का दायरा उनके मंडी क्षेत्र तक सीमित करने को कहा गया है। वेयरहाउस डेवलपमेंट ऐंड रेग्यूलेटरी अथॉरिटी में पंजीकृत सभी गोदामों को मार्केट यार्ड के रूप में अधिसूचित किया है। इससे किसानों को अपने दरवाजे पर जिंसों को बेचने में मदद मिलेगी। सभी प्रसंस्करणकर्ता, थोक खरीदार मंडी गए बिना किसानों से जिंसों की खरीद कर पाएंगे।

इसके अलावा गृह सचिव की तरफ से भी प्रशासकों और कृषि मंत्रालय की तरफ से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्रों में कहा गया है कि मंजूरी की प्रक्रिया को विकेंद्रित बनाया जाए। इनके अलावा केंद्र सरकार पहले ही ई-राष्ट्रीय कृषि विपणन प्लेटफॉर्म (ई-नाम) पर कारोबार के नियम नरम बना चुकी है। यह प्लेटफॉर्म 16 राज्यों में 585 मंडियों से जुड़ा है।

इन विभिन्न पत्रों में लोगों द्वारा रोजाना उपभोग किए जाने वाले खाद्य एवं किराने के उत्पादों को आवश्यक वस्तुओं के रूप में परिभाषित किया गया है। राज्यों एवं प्रशासकों को आवश्यक वस्तुओं की इस परिभाषा का पालन करने के लिए कहा गया है।

जिले के अधिकारी उन गतिविधियों और सेवाओं के लिए पास जारी कर रहे हैं, जो आवश्यक और छूट की श्रेणी के तहत आती हैं। हालांकि जिन उद्यमों की देश भर में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला है, उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्र सरकार ने कहा, 'सभी राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी जाती है कि वे उन कंपनियों या संगठनों को स्वीकृति पत्र जारी करें, जिनकी देश भर में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला है। राज्य सरकारें इन कंपनियों को अहम कर्मचारियों और कामगारों की सुगम आवाजाही के लिए रीजनल पास जारी करने की मंजूरी दें ताकि उनकी राष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला चालू रहे। ऐसी मंजूरियां कम से कम रखी जाएं।' राज्य प्रशासकों और मुख्य सचिवों से कहा गया है कि रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों के मनोनीत अधिकारियों को उन कर्मचारियों और ठेका मजदूरों को पास जारी करने की मंजूरी दी जाए, जो ऐसी सेवाओं के लिए आवश्यक हैं।

पत्र में कहा गया कि राज्यों के भीतर आवश्यक वस्तुएं ढोने वाले ट्रकों के लिए ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को यात्रा की मंजूरी दी जा सकती है और खाली ट्रक बिल, ई-वे बिल आदि अपने पास रख सकते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने किसान उत्पादक संगठनों को उपज मंडियों में लाए बिना ई-नाम पर बेचने की मंजूरी दी गई थी। नियमित ई-नाम गोदामों द्वारा जारी इलेक्ट्रॉनिक वेयरहराउस रिसिट कारोबार को आसान बनाएंगी। कारोबारी, प्रसंस्करणकर्ता ई-नाम प्लेटफॉर्म पर जिंस खरीद सकते हैं और अपने फैसले को आसान बनाने के लिए यह पता लगा सकते हैं कि किस गोदाम में जिंस उपलब्ध हैं।

एनसीडीईएक्स में ईवीपी (कारोबार) कपिल देव ने कहा, 'किसान इलेक्ट्रॉनिक वेयरहराउस रिसिट के जरिये अपने कीमत जोखिम की हेजिंग के लिए वायदा प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।'

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