बिजनेस स्टैंडर्ड - कोरोना की दुनिया में एकदूसरे पर निर्भरता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, May 29, 2020 11:38 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

कोरोना की दुनिया में एकदूसरे पर निर्भरता

जमीनी हकीकत
सुनीता नारायण /  April 06, 2020

मैं लॉकडाउन के समय यह लेख लिख रही हूं। भारत कोरोनावायरस के तीसरे और सामुदायिक प्रसार के सबसे भयावह दौर के मुहाने पर है और सरकार ने लोगों से सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां बंद करने और सामाजिक दूरी बनाने का आह्वान किया है। ऐसा करना बहुत जरूरी है। कम से कम मेरी याददाश्त में इससे पहले कभी भी ऐसा कोई मामला नहीं आया है जब कोई छोटी चीज इतनी तेजी से बेकाबू हो गई और उसने दुनिया के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया।

जनवरी में ही हमें पहली बार नोवेल वायरस के बारे में वास्तविक खबर मिली थी जो जानवरों से इंसान में आया था और चीन में लोगों की जान ले रहा था। हमने ऐसी तस्वीरें देखीं जिनमें लोगों को जबरदस्ती घरों में कैद किया जा रहा था, लाखों कारोबारों और घरों को बंद कर दिया गया, रातोरात अस्पताल बनाए गए और ऐसा लगता था कि इसे काबू में कर लिया जाएगा। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए झटका था लेकिन उम्मीद थी कि चीन इससे उबर जाएगा। चीजें सामान्य ढंग से चल रही थी। लेकिन तभी इस वायरस ने जल्दी ही अपने नए ठिकाने ढूंढ लिए -इटली और ईरान। इटली में चीजें पूरी तरह बेकाबू हो गई हैं और ईरान में इसने विकराल रूप ले लिया है। अब यह पूरी दुनिया में फैल चुका है और लगभग सभी देशों में लॉकडाउन की स्थिति है। यह पूरी तरह अविश्वसनीय लगता है।

जब मैं यह लेख लिख रही हूं तो भारत में कोरोनावायरस के मामलों की संख्या 4,000 के पार पहुंच चुकी है जिनमें से 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि दूसरे देशों की तुलना में यह संख्या बेहद मामूली है। इटली में करीब 125,000 मामले हैं और न्यूयॉर्क में  113,700 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है और हर छह दिन में इनकी संख्या दोगुनी हो रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि भारत में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है लेकिन सीमित जांच के कारण वे सामने नहीं आ रहे हैं। लेकिन यहीं असली सवाल उठता है। भारत जैसे देशों को क्या करना चाहिए जहां जांच की सीमित सुविधाएं हैं और जन स्वास्थ्य से जुड़ा बुनियादी ढांचा इससे भी ज्यादा सीमित है? सभी तथ्य इस ओर इशारा करते हैं  कि जब इसका सामुदायिक प्रसार होगा तो मरने वालों की संख्या बढ़ेगी क्योंकि ये देश मरीजों को गहन इलाज मुहैया नहीं करा सकते हैं।

यही वजह है कि भारतीयों के लिए यह बेहद जरूरी है कि इसे शुरुआत में ही काबू किया जाए और फैलने से रोका जाए। हम इसके सामुदायिक प्रसार से निपटने में सक्षम नहीं हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि हमें अपनी जांच क्षमताओं को बढ़ाना होगा लेकिन यह भी तय है कि अगर इसका सामुदायिक प्रसार हुआ तो हम कभी भी पर्याप्त संख्या में जांच नहीं कर पाएंगे। इसलिए संक्रमित लोगों की पहचान और उन्हें अलग-थलग करने के लिए जांच होनी चाहिए।

हमें यह समझना चाहिए कि हमें सामाजिक दूरी बनाए रखनी है ताकि भारत में दूसरे देशों की तरह इसका सामुदायिक प्रसार न हो। यह इतनी तेजी से फैलता है कि कई देशों में तो इसने कुछ ही दिनों में पूरी आबादी को अपनी चपेट में ले लिया। इस वायरस के लिए कोई बंधन नहीं है लेकिन इसे रोकने का एकमात्र तरीका यही है कि इसके प्रसार की शृंखला को तोड़ दिया जाए। हालांकि ऐसा करना मुश्किल है क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार थम जाएगी। यह खासकर गरीबों और अपना काम करने वालों की आजीविका को बरबाद कर देता है। सरकारों को ऐसे लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा और जरूरी चीजों का इंतजाम करना चाहिए ताकि वे इस अप्रत्याशित वैश्विक आपदा से निपट सकें।

लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है। हमारे लिए यह कुछ बुनियादी चीजों के बारे में सोचने का समय है। इनमें से एक मुद्दा वैश्विक सहयोग का है। किसी महामारी के लिए दुनिया पर कहर ढाने का यह सबसे अच्छा समय है लेकिन हम यह भी कह सकते हैं कि यह सबसे बुरा समय है। दुनिया में इस समय ऐसा कोई सम्मानित दूरदर्शी नेता या संस्था नहीं है जो हमें ऐसी आपदा से बाहर निकाल सके जो राष्ट्रीय सीमाओं से परे है। पिछले कुछ महीनों में हमने जो कुछ देखा है वह स्वार्थ और आत्म-संरक्षण की शर्मनाक पराकाष्ठा है।

जलवायु परिवर्तन जैसे एक और अस्तित्वगत खतरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की वकालत करने वाले हम जैसे अधिकांश लोगों के लिए यह खबर नहीं होनी चाहिए। कोरोनावायरस ने दुनिया के कई शक्तिशाली देशों को घुटनों पर ला दिया है लेकिन आश्चर्य की बात है कि इतने विकराल संकट से निपटने के लिए दुनिया के देशों के बीच वैश्विक सहयोग के लिए कोई चर्चा नहीं हो रही है। क्यों?  इसे काबू करने के लिए हम क्या कर सकते हैं और हमें क्या करना चाहिए? आने वाले हफ्तों में मैं इस पर और चर्चा करूंगी।

फिर जन स्वास्थ्य का भी मामला है। कोरोनावायरस हमें सिखाता है कि हम अपनी कमजोर कड़ी के बराबर मजबूत हैं। अगर हर किसी की जन स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच नहीं होगी या अगर जन स्वास्थ्य सेवा कमजोर होगी तो हम इस महामारी के सामने टिक नहीं पाएंगे। अधिकांश उभरते देशों और यहां तक कि अमेरिका में भी निजी स्वास्थ्य सेवा का यही हाल है। साथ ही देशों के भीतर क्षमता का निर्माण भी पर्याप्त नहीं है क्योंकि अगर किसी देश का कोई इलाका कमजोर हुआ या दुनिया का कोई देश कमजोर हुआ तो यह महामारी वहां पैर पसारेगी और फिर वहां से फैलेगी। कितने लंबे समय तक हम अपनी सीमाओं को बंद रख पाएंगे? यह व्यवस्था कैसे काम करेगी। इससे मेरा तीसरा सवाल पैदा होता है जो कोरोना के बाद वैश्वीकरण की प्रकृति के बारे में है। क्या हम अपनी व्यवस्थाओं की कमजोरी से सीखेंगे और वैश्विक भागीदारी के जरिये स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में निवेश कर उन्हें मजबूत बनाएंगे? आइए इस मुश्किल दौर में इस पर चर्चा करते रहें।

Keyword: Lockdown, Covid-19, Coronavirus, Pandemic, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, महामारी, सामुदायिक प्रसार, नोवेल वायरस,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जीडीपी में लगातार गिरावट मंदी का संकेत है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.