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संकट के बाद की तैयारी में जुटी फर्में

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली April 05, 2020

कोरानावायरस संकट के बीच कंपनियों ने भविष्य की रणनीति पर विचार करना शुरू कर दिया है। वाहन उद्योग के लिए पेंट बनाने वाली जापान की कंपनी निप्पॉन पेंट्स अपनी कारोबारी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। मारुति सुजूकी और टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियां इसकी ग्राहक हैं।

गुडग़ांव की यह कंपनी कोविड-19 के दौरान घर से कार्य करने के नए चलन को मिली सफलता देखेकर चकित है। इससे उत्साहित होकर कंपनी ने मुंबई में अपना बिक्री कार्यालय बंद करने का निर्णय लिया है और अब अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की हिदायत देने के बारे में सोच रही है। कंपनी अपने गोदामों की संख्या भी कम करने पर विचार कर रही है। देश में अपनी तीन फैक्टरियों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देेने के लिए कंपनी पेशेवर कंपनियों की सेवाएं लेना चाहती है। कर्मचारियों के बीच आपसी संपर्क कम रखने (सोशल डिस्टेंसिंग) के लिए कंपनी अलग-अलग पालियों में उन्हें बुलाना चाहती है। कंपनी में अध्यक्ष-ऑटोमोटिव रीफिनिशेस ऐंड वूड कोटिंग्स, शरद मेहरोत्रा कहते हैं, 'इसमें कोई शक नहीं कि कोविड-19 संकट के बाद कंपनियों के काम-काज के तरीके में खासा बदलाव आ जाएगा।'

भारत में कंपनी जगत के शीर्ष प्रबंधक कोविड-19 संकट की धार कमजोर होने के बाद के हालात में अपनी कारोबारी रणनीतियों, उत्पादों और मानक परिचालन नियमों में बदलाव करने के लिए ई-मेल और वीडियो कॉल का सहारा ले रहे हैं।

मारुति सुजूकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने कहा, 'यह पूरी कवायद लॉकडाउन खत्म होने तक नहीं हैं। दरअसल हम अपने कर्मचारियों को कई स्वास्थ्य एवं बचाव उपायों के साथ एक पूरी तरह अलग परिचालन प्रक्रिया के लिए तैयार कर रहे हैं। यह रणनीति दीर्घकाल के लिए तैयार हो रही है।'

कंपनियां यह मानकर चल रही हैं कि उन्हें हालात में सुधार के बाद सरकार से कुछ अनिवार्य निर्देश आ सकते हैं। कंपनियां पहले से ही इनकी तैयारियों में जुट गई हैं और वे थर्मल स्कैनर (शरीर का तापमान मापने वाला उपकरण) और सफाई एवं स्वच्छता पर विशेष जोर देने की तैयारी कर रही हैं।

वे अन्य अहम बदलावों पर भी विचार कर रही हैं। इनमें कोविड-19 संकट कमजोर होने या खत्म होने पर स्वचालन एवं स्थानीयकरण जैसे उपाय शामिल हैं। इस बारे में वाहन उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'रोजगार के लिहाज से यह अच्छी खबर नहीं है, लेकिन स्वचालन बढऩे से उत्पादकता में इजाफा होगा और कार्यशैली में अधिक लचीलापन आएगा।


दूसरे शब्दों में कहें तो श्रमिकों के अचानक पलायन और सोशल डिस्टेंसिंग की हालत में हमें चुनौतियों से निपटने में स्वचालन काफी मदद करेगा। स्थानीयकरण से लागत में कमी आएगी। इस तरह, हरेक को संतुलन स्थापित करने की दिषा में काम करना होगा।'कुछ कंपनियां अपने कार्यालयों का आकार छोटा करने पर विचार कर रही हैं क्योंकि घर से काम करने का प्रयोग सफल साबित हुआ है। वाहन, वित्तीय क्षेत्र, आतिथ्य, रक्षा एवं आईटी क्षेत्रों में उपस्थिति रखने वाली मुंबई स्थित एक बड़े समूह के चेयरमैन ने अपने कारोबार मुख्य कार्याधिकारियों से जानना चाहा है कि क्या वे विपणन एवं बिक्री विभागों के कर्मचारियों को एक दिन छोड़कर दूसरे दिन आने के लिए कह सकते हैं और किराया लागत कम कर सकते हैं।

सेवा क्षेत्र की कंपनियां अपनी कार्य प्रणाली अधिक सुरक्षित बनाने की दिषा में काम कर रही हैं। उदाहरण के लिए मोबाइल ऐप्लीकेशन आधारित यात्रा सेवा देने वाली कंपनी उबर इंडिया के लिए लॉकडाउन खत्म होने के बाद यात्रियों और चालकों के मन से संक्रमण का भय दूर करना सबसे बडी चुनौती है। कंपनी इसके लिए यात्री कार को अधिक सुरक्षित बनाने की रणनीति तैयार कर रही है। इसके लिए कार की छत से लेकर फर्श तक प्लास्टिक की परत लगाना और चालकों के लिए सैनिटाइजर और मास्क आदि अनिवार्य किए जाने पर विचार हो रहा है। भारत व दक्षिण एशिया में उबर के अध्यक्ष प्रदीप परमेश्वरन कहते हैं, 'हम स्वास्थ्य कर्मियों के इस्तेमाल में लगे 150 वाहनों में ऐसे प्रयोग करना चाहते हैं। लॉकडाउन के बाद यह संख्या बढाकर 2 लाख तक करने की तैयारियों में जुटे हैं।' कोविड-19 संकट खत्म होने के बाद कर्मचारियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर भी कुछ बदलाव होंगे।

नेस्ले इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबध निदेशक सुरेश नारायण कहते हैं, 'घर से लगातार काम करने से कर्मचारियों में तनाव एवं चिंता का स्तर खासा बढ़ गया है। इनसे निपटने के लिए कंपनी कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, मानसिक स्वास्थ्य पहल आदि शुरू किए हैं। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद ऐसे कार्यक्रम जारी रहेंगे।'कोविड-19 संकट के बाद मंदी या आर्थिक सुस्ती से निपटना कंपनियों के लिए तत्काल सबसे बड़ी चुनौती है। विभिन्न कंपनियों का षीर्श प्रबंधन इस मोर्चे पर पहले ही जुट गया है और वे फि लहाल अपने पास नकदी भंडार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

थॉमस कुक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक माधवन मेनन कहते हैं, 'हमारे बही-खाते में बड़ी मात्रा में नकदी है और हम सभी नकदी स्रोतों और देनदारियों की समीक्षा कर रहे हैं। अधिक से अधिक नकदी रखने के लिए सभी गैर-आवश्यक खर्च रोक दिए गए हैं।'(साथ में अनीश फडनीश, अर्णव दत्ता और सुदीप्तो डे)

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