बिजनेस स्टैंडर्ड - एनपीए पर छह महीने की मोहलत!
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एनपीए पर छह महीने की मोहलत!

रघु मोहन / मुंबई April 05, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्त मंत्रालय बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के वर्गीकरण की अवधि में छूट देने के मुद्दे पर विचार कर सकते हैं। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक 90 दिन तक मूलधन या ब्याज का भुगतान नहीं होने पर आवंटित ऋण एनपीए बन जाता है लेकिन इस अवधि को बढ़ाकर 180 दिन किया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक दिसंबर 2019 तक बकाया राशि को दबावग्रस्त या एनपीए के रूप में वर्गीकृत किए गए खातों का डाउनग्रेड किए बिना पुनर्निर्धारण और 18 से 24 महीने की न्यूनतम पुनर्भुगतान अवधि के साथ नए वित्त पोषण पर विचार किया जा सकता है। साथ ही नए कर्ज के लिए बैंकों द्वारा पूर्व शर्त के रूप में अतिरिक्त रेहन के आग्रह को भी आसान बनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि अगर एनपीए वर्गीकरण के लिए परिसीमन अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन की जाती है तो इसमें कई तरह की शर्तें  जोड़ी जा सकती हैं ताकि इसका दुरुपयोग न हो। इसमें ऋण शुरू और बंद होने की तारीख का उल्लेख हो सकता है और 2021 के खत्म होने पर यह फिर 90 दिन की पुरानी अवधि में लौट आएगा। साथ ही ऐसा अर्जित ब्याज, जो 1 जनवरी, 2020 के बाद न मिला हो, उसे 1 अक्टूबर से मार्च 2021 के अंत तक छमाही किस्त में चुकाने की अनुमति दी जा सकती है। इससे संभावना है कि एनपीए के वर्गीकरण के लिए परिसीमन अवधि 180 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।

इसमें मुख्य समस्या यह है कि केंद्रीय बैंक ने सावधि ऋण के भुगतान में तीन महीने की मोहलत दी है लेकिन साथ ही यह शर्त भी रखी है कि इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए खाता नियमित होना चाहिए। इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसमें कमजोर खातों की स्थिति और बदतर होगी। एक सूत्र ने कहा, 'इससे कमजोर खाते भुगतान में चूक कर सकते हैं और मौजूदा नियमों के मुताबिक उन्हें एनपीए घोषित किया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि ब्याज भुगतान में कोई छूट नहीं दी गई है। ये खाते ब्याज के भुगतान में सक्षम नहीं हैं क्योंकि जून 2020 तिमाही में बिक्री बहुत कमजोर रहेगी। उन्हें नया कर्ज जुटाने में भी मुश्किल होगी।'बैंकों को पुनर्वित्त के रूप में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) से मिलने वाली रकम पर नजर रखनी होगी। इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है।इसमें अंतरराष्ट्रीय लेखा मानक 10 का हवाला दिया जा सकता है जो रिपोर्टिंग अवधि के बाद की घटनाओं से संबंधित है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय संदर्भ में इसकी व्यावहारिकता का जांच कर ली गई है। वित्त वर्ष 2020 के लिए खातों को अंतिम रूप देते समय 30 सितंबर 2020 तक की प्राप्तियों, भुगतान, वसूली या प्रावधानों पर विचार किया जा सकता है या वित्त वर्ष 2020 में बैंकों के खातों में अतिरिक्तछह महीनों का लेखाजोखा होगा। माना जा रहा है कि इस बारे में भारतीय सनदी लेखा संस्थान के साथ बातचीत शुरू की गई है।केंद्रीय बैंक के 7 जून के परिपत्र के तहत प्रावधान के अतिरिक्त नियमों और तीन महीने की मोहलत को शामिल करना बेहद अहम कदम हो सकते हैं।

Keyword: NPA, Bank, Banking, RBI, एनपीए, भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई, गैर निष्पादित परिसंपत्ति,
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