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मांग के मोर्चे पर फिक्रमंद तेल कंपनियां

अमृता पिल्लै / मुंबई April 03, 2020

कच्चे तेल के दाम में उतार चढ़ाव और पेट्रोलियम की अनिश्चित मांग तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा रही हैं। ऐसी स्थिति पिछले एक पखवाड़े से है। उत्पादन में कटौती को लेकर हुए समझौते पर बातचीत करने के लिए गुरुवार को सऊदी अरब ने ओपेक प्लस देशों व अन्य उत्पादकों की 'तत्काल बैठक' बुलाई, जिसके बाद कच्चे तेल के दाम में 25 प्रतिशत की कमी आई। शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में एसऐंडपी प्लैट्स ने कहा, 'एनवाईएमईएक्स के फ्रंट मंथ कच्चे तेल का दाम 25.32 डॉलर प्रति बैरल रहा, जो 5.02 डॉलर ज्यादा है।'

अमेरिका के राष्ट्रपति ने गुरुवार को 10 मिलियन बैरल प्रति दिन से लेकर 15 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कटौती ककरने के लिए समझौते के संकेत दिए हैं। डेलॉयट टच तोमात्सू में पार्टनर देवाशीष मिश्र ने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट के बाद कल कच्चे तेल के दाम में अचानक तेजी आई, लेकिन तेल के दाम में गिरावट बनी रहेगी जो ओएमसी के लिए बेहतर है।'

उत्पादन में कटौती से कच्चे तेल के दाम में गिरावट रुक सकती है, लेकिन इससे मांग आपूर्ति की गणित स्थिर होने की संभावना नहीं है।

एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म में विश्लेषक ने नाम न दिए जाने की इच्छा जताते हुए कहा, 'मांग तेजी से गिर रही है।' तेल विपणन कंपनियों के अधिकारी भी इसी तरह की चिंता जता रहे हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने पहले ही रिफाइनरी उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की कमी कर दी है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) ने 20 प्रतिशत कटौती की है। दोनों कंपनियों ने भारतीय बाजार में उत्पाद की मांग में कमी को देखते हुए यह फैसला किया है।

अधिकारियों ने कहा कि अगर देशव्यापी बंदी की तिथि 15 अप्रैल से आगे बढ़ती है तो तेलशोधन संयंत्रों को तेज कटौती करने का फैसला करना पड़ सकता है।

एक सरकारी तेल कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'तेल कंपनियां कच्चे तेल के दाम में उतार चढ़ाव की स्थिति में काम करने की आदती हैं। एक दिन की तेजी या कमी से हमें कोई चिंता नहीं होती है। अगर कीमतें स्थिर बनी रहती हैं तो हमें भंडारण के नुकसान या फायदे की चिंता नहीं है। कच्चे तेल और उत्पाद के दाम का मिश्रण ज्यादा अहम है। अभी अन्य उत्पादों की तुलना में डीजल से मुनाफा बेहतर है।  इसके साथ ही स्थिर उच्च दाम भी कार्यशील पूंजी पर असर डालेगा।'

विश्लेषकों ने पहले ही मार्च तिमाही के लिए भंडार में ज्यादा कमी की बात की है। उपरोक्त उल्लिखित एक विश्लेषक ने कहा, 'भंडार में मौजूदा उतार चढ़ाव का असर जून तिमाही के आंकड़ों में नजर आएगा।' उन्होंने कहा कि ओएमसी ने अब तक विपणन के मामले में उत्पाद के दाम यथावत रखा है, यह कच्चे तेल के दाम में किसी तेजी की स्थिति में बफर का काम कर सकता है।

मांग में गिरावट को देखते हुए समाचारों में कहा गया है कि आईओसी और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) जैसी कंपनयों ने पहले ही कुछ आपूर्तिकतार्ओं को फोर्स मेजर जारी कर दिया है। बहरहाल इस कदम से उल्लेखनीय मदद मिलेगी।

उपरोक्त उल्लिखित तेल कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'इस तरीके का अपना सकारात्मक आर नकारात्मक असर है। अभी यह व्यापक तौर पर स्थापिक  होना बाकी है कि यह भगवान का काम है। इसमें यह समस्या है कि पंचाट की लागत कॉर्गो को रोकने की तुलना में ज्यादा आती है।' उपरोक्त उल्लिखित विश्लेषक ने कहा, 'कीमतों के मौजूदा उतार चढ़ाव की स्तिति में फोर्स मेजर तभी मददगार होगा, जब जून तिमाही के लिए भंडारण कम हो और अप्रैल में कीमतें ज्यादा होने पर भंडारण में किसी नुकसान से बचा जाए।' 

वहीं कुछ अन्य मध्यम से दीर्घावधि के हिसाब से भारतीय तेलशोधकों के मामले में निश्चिंत बने हुए हैं। मूडीज इन्वेस्टर सर्विस में कॉर्पोरेट फाइनैंस ग्रुप के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विकास हालन ने कहा, 'हमारा मानना है कि मौजूदा स्थिति ढांचागत होने के बजाय अस्थाई है। मध्यावधि से दीर्घावधि हिसाब से भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग स्थिर रहेगी और अगर तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं तो इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। बहरहाल विमान ईंधन की मांग सुधरने में अभी वक्त लग सकता है।'

Keyword: Oil, Crude Oil, Petroleum, OMC, Production Cut, कच्‍चा तेल, पेट्रोलियम, उत्पादन कटौती, ओएमसी,
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