बिजनेस स्टैंडर्ड - राहत मिले और लॉकडाउन घटे
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राहत मिले और लॉकडाउन घटे

सुरजीत दास गुप्ता और देव चटर्जी / नई दिल्ली/मुंबई April 03, 2020

भारतीय उद्योग जगत में इस बात को लेकर करीब-करीब आम राय है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार द्वारा घोषित राहत उपाय नाकाफी हैं। उसकी मांग है कि सरकार को कोविड-19 के कारण कारोबार को हुए नुकसान से निपटने के लिए एक व्यापक राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।

विभिन्न क्षेत्र की 25 बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई हैं। इनमें वित्तीय सेवा से लेकर बैंक, ऊर्जा, वाहन, बंदरगाह, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटीए इंटरनेट और रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनियां और कई बड़े कारोबारी समूह शामिल हैं।

सर्वेक्षण में शामिल 96 फीसदी मुख्य कार्याधिकारियों ने कहा कि ऋण के भुगतान पर तीन महीने की छूट की अवधि बढ़ाकर कम से कम एक साल की जानी चाहिए। इसे दो साल भी किया जा सकता है। 92 फीसदी मुख्य कार्याधिकारियों का कहना था कि इस संकट से निपटने के लिए कंपनियों से फिलहाल कर नहीं लिया जाना चाहिए या उनके आय कर में कटौती की जानी चाहिए।

सभी मुख्य कार्याधिकारियों ने एक सुर में सरकार से उद्योग जगत के लिए पैकेज देने की मांग की। कई मुख्य कार्याधिकारियों का कहना है कि ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के नियमों में ढील दी जानी चाहिए। दिवालिया कार्यवाही को लॉकडाउन हटने के बाद अगले छह महीने तक टालना चाहिए।

टीवीएस के प्रबंध निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने कहा, 'ऋण े भुगतान पर मिली छूट को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इससे ज्यादा जरूरी यह है कि एनपीए के नियमों में ढील दी जाए। अन्यथा एनबीएफ सी उद्योग चौपट हो जाएगा। सूक्ष्म, लघु और मझोली कंपनियों के लिए आईबीसी कार्यवाही को छह महीने के लिए टाल देना चाहिए।'

आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए कहा, 'सरकार को मांग बहाल करने के लिए पैसे झोंकने चाहिए। लेकिन उद्योग कर, पीएफ और ईएसआईसी जैसे वैधानिक बकायों के भुगतान में राहत चाहता है। साथ ही रोजगार से जुड़े नियमों में भी ढील दी जानी चाहिए और कार्यशील पूंजी की सीमा 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी की जानी चाहिए।' सरकार कंपनियों को राहत पैकेज देने पर विचार कर रही है लेकिन वे उससे कहीं व्यापक पैकेज की मांग कर रही हैं। कई क्षेत्रों में कारोबार करने वाली एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कहा, 'कुल पैकेज 100 अरब डॉलर का होना चाहिए। पहले गरीबों को फिर खुद का रोजगार करने वालों को और इसके बाद छोटी तथा मझोली कंपनियों के लिए इसकी घोषणा की जानी चाहिए। इस तरह सभी को इस संकट की स्थिति में सरकार की तरफ से राहत मिलनी चाहिए। बंदरगाह क्षेत्र की एक दिग्गज कंपनी के सीईओ ने कहा कि देश की जीडीपी में योगदान करने वाले सभी घटकों को जीडीपी का 10 से 15 फीसदी हिस्सा राहत के रूप में दिया जाना चाहिए।' इस बात पर सीईओ बंटे हुए हैं कि देश में मंदी आएगी या नहीं। हालांकि इस बात पर सभी एकमत हैं कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती जरूर आएगी।

सर्वेक्षण में शामिल 40 फीसदी सीईओ का कहना है कि मंदी अपरिहार्य है जबकि बाकी का इस बारे में सकारात्मक रुख है और उनका मानना है कि जीडीपी की विकास दर 1 से 3 फीसदी तक रह सकती है।60 फीसदी मुख्य कार्याधिकारियों ने कहा कि वे अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती या छंटनी नहीं करेंगे लेकिन 12 फीसदी का कहना है कि उनके पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है। बाकी सीईओ का कहना है कि वे अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं और इसका फैसला आने वाले दिनों में परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।हालांकि सर्वेक्षण में शामिल 52 फीसदी मुख्य कार्यकारी इस बात पर सहमत थे कि 14 अप्रैल के बाद लॉकडाउन को आंशिक रूप से हटा दिया जाना चाहिए। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई चर्चा से लगता है कि लॉकडाउन के चरणबद्ध तरीके से हटाया जा सकता है। लेकिन कई सीईओ का कहना है कि जिंदगी कारोबार से ज्यादा अहम है। 28 फीसदी सीईओ ने कहा कि लॉकडाउन और 15 दिन रहना चाहिए।एक प्रमुख इंटरनेट कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'मुझे आश्चर्य है कि कई सीईओ लोगों की जिंदगी बचाने पर जोर देने के बजाय कारोबार शुरू करने की बात कर रहे हैं।' लॉकडाउन में आंशिक छूट देने की वकालत कर रहे सीईओ ने इसे चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए अलग-अलग सुझाव दिए हैं। वित्तीय सेवा क्षेत्र की एक कंपनी के सीईओ ने कहा, 'शहरों और राज्यों में मुख्य सड़कों पर यातायात की अनुमति होनी चाहिए ताकि प्रवासी अपने घर जा सकें। साथ ही बड़ी औद्योगिक कंपनियों और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनों को अपना कामकाज शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसने मजदूरों और छोटे दुकानदारों को रोजगार मिलता है। मॉल नहीं खुलने चाहिए।' अन्य मुख्य कार्याधिकारियों ने शहरों में औद्योगिक क्षेत्रों को खोलने का सुझाव दिया।

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