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केसीआर सरकार के कल्याण कार्यक्रमों को फंड की दरकार

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  04 03, 2020

के चंद्रशेखर राव (केसीआर) के नेतृत्व वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने उसे वर्ष 2018 में दोबारा सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई थी। यह एक बंपर चुनावी फसल थी। पार्टी को करीब 47 फीसदी मत मिले थे जो 2014 में हासिल मत फीसदी से 12.6 फीसदी अधिक थे। इसका नतीजा यह हुआ कि तेलंगाना में टीआरएस को पहले से 25 अधिक सीटें मिलीं। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने चुनाव में अपनी पूरी जान लगा दी थी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कांग्रेस का मत प्रतिशत पहले से जरूर बढ़ा लेकिन उसकी सीटों की संख्या 21 से घटकर 19 रह गईं। केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तो महज एक सीट ही जीत पाई और उसके प्रदेश अध्यक्ष भी चुनाव हार गए। हैदराबाद के पुराने शहर को एआईएमआईएम का गढ़ माना जाता है लेकिन उसे भी झटका लगा। हालांकि वह अपनी सात सीटें बनाए रखने में सफल रही लेकिन उसका मत प्रतिशत पिछले चुनाव से कम रहा। केसीआर को शानदार जीत दिलाने का काम उनके कल्याणकारी शासन ने ही किया। लेकिन बिलों के बढ़ते जाने और राजस्व संग्रह में गिरावट का सिलसिला शुरू होने के बाद अब खतरे की घंटियां बजने लगी हैं।

कोविड महामारी की चुनौती से निपटने के लिए प्रधानमंत्री के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी मुख्यमंत्रियों ने अधिक फंड जारी किए जाने की मांग रखी। लेकिन इस दौरान केसीआर का लहजा अधिक तेज एवं हताशा से भरा था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को तेलंगाना के वाजिब हिस्से से भी अधिक फंड जारी करना चाहिए क्योंकि वित्त आयोग द्वारा केंद्रीय करों के पूल में से राज्यों को देय अंश को 42 फीसदी से घटाकर 41 फीसदी कर दिए जाने से तेलंगाना को काफी नुकसान हुआ है। केसीआर का यह भी कहना था कि अपने वित्त का समझदारी से इस्तेमाल करने वाले तेलंगाना को केंद्रीय कर, राज्य आपदा राहत कोष, स्थानीय निकाय कोष अनुदान एवं अन्य अनुदानों में केंद्र सरकार को राज्य का वैध हिस्सा देना चाहिए। इसके अलावा जीएसटी क्षतिपूर्ति में भी तेलंगाना को केंद्र से समुचित भुगतान की मांग रखी। केसीआर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ऐसा नहीं होने पर तेलंगाना को अपनी कल्याणकारी नीतियों के लिए फंड जुटाने में समस्या होगी।

सच तो यह है कि 2010-2015 के दौरान केंद्र सरकार से तेलंगाना को कुल 46,740 करोड़ रुपये निर्गत किए गए। अगले पांच वर्षों में यह राशि बढ़कर 1,06,606 करोड़ रुपये हो गई। इस तरह वर्ष 2015-2020 में तेलंगाना को केंद्र से मिली राशि 2010-15 के दौरान जारी किए गए पैसे से करीब 128 फीसदी अधिक है। 

जीएसटी क्षतिपूर्ति को हरेक दो महीने पर जीएसटी उपकर कोष से राज्यों के लिए जारी किया जाना था। लेकिन जीएसटी उपकर संग्रह में गिरावट आने से यह क्षतिपूर्ति अक्टूबर के बाद से राज्यों को नहीं दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर संसद में बयान देने के अलावा बजट के बाद हैदराबाद में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार तेलंगाना के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं कर रही है, अन्य राज्यों की भी ऐसी ही शिकायतें हैं।

गत 8 मार्च को तेलंगाना के वित्त मंत्री हरीश राव ने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट विधानसभा में पेश किया था। उसमें नए वित्त वर्ष के लिए 44,245 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का प्रावधान रखा गया था जो वर्ष 2019-20 के संशोधित बजट अनुमान से 41.2 फीसदी अधिक है। वर्ष 2020-21 के लिए पूंजी आवंटन 22,061 करोड़ रुपये किया गया है जो 2019-20 के संशोधित अनुमान से 67.6 फीसदी अधिक है। इस बढ़े हुए आवंटन की वजह यह है कि जलापूर्ति, साफ-सफाई, आवास एवं शहरी विकास के मदों में व्यय 10,161 करोड़ रुपये यानी 2067 फीसदी की भारी वृद्धि की गई है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार ने कई और कल्याण योजनाएं शुरू करने का फैसला किया है जिनके लिए भुगतान करना होगा।

संभवत: भारत के किसी भी अन्य राज्य की कल्याणकारी वचनबद्धता तेलंगाना सरकार के समान नहीं है। कोविड-19 संकट के समय भी तेलंगाना सरकार गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को 12 किलो चावल और 1,500 रुपये की नकद सहायता दे रही है। बाहरी राज्यों से आकर तेलंगाना में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को भी सरकार की तरफ से 12 किलो चावल और 500 रुपये नकद राशि दी जा रही है। यह सहायता छोटी जोत वाले किसानों को मिलने वाले सालाना 10,000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान के अतिरिक्त है। सरकार चुनावों के समय लोगों से किए गए अन्य वादों को भी पूरा कर रही है।

कोविड-19 संकट के दौरान जमीन की बिक्री का पंजीकरण शून्य हो चुका है। सिनेमाघर भी बंद पड़े हुए हैं, लिहाजा सरकार को मनोरंजन कर से भी कोई राजस्व नहीं मिल पा रहा है। शराब की दुकानें बंद होने से आबकारी राजस्व भी नहीं आ रहा है। तेलंगाना के बजट के अनुसार  2020-21 में राज्य को आबकारी राजस्व के तौर पर ही 16,000 करोड़ रुपये मिलेंगे जो 2019-20 के संशोधित अनुमान से करीब 27 फीसदी अधिक है। इसी तरह बजट में स्टांप शुल्क एवं भूमि पंजीकरण से 10,000 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान किया गया है जो पिछले वित्त वर्ष से 55 फीसदी अधिक है। लेकिन कोविड-19 महामारी का प्रकोप फैलने के बाद किसी को नहीं मालूम नहीं है कि वित्त वर्ष 2020-21 में क्या होने जा रहा है?

मौजूदा हालात में सभी राज्यों को अपना वित्त पुनर्गठित करना होगा। लेकिन तेलंगाना के लिए यह समस्या कहीं अधिक बड़ी है। इसकी वजह यह है कि तेलंगाना सरकार ने जिस राह पर चलने का वादा किया है वह उससे दूर नहीं जा सकती है, अगर वह ऐसा करती है तो उसे बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। मुख्यमंत्री केसीआर और उनकी टीम को इस गतिरोध से निकलने के लिए वित्तीय जादू की जरूरत पड़ेगी।

Keyword: Telangana Government, KCR, TRS, Welfare Program, केसीआर सरकार, कल्याण कार्यक्रम, फंड,
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