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घर से काम : डेटा सुरक्षा की बनी बड़ी चुनौती

सुदीप्त दे /  April 02, 2020

इस समय घर से काम करना, कम से कम अगले कुछ सप्ताह तक एक आम बात बन गई है और कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में कंपनियों को अधिक व्यापक नीतियां बनाने की आवश्यकता है।

मौजूदा हालात में अधिकांश कारोबारियों तथा कंपनियों के लिए काम जारी रखना अहम प्राथमिकता है लेकिन घर से काम करने पर क्लाइंट डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना देता है।

साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं, 'कंपनियों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि जब वे अपने कर्मियों को किसी अहम परियोजना के संबंध में घर से काम करने की अनुमति देती हैं तो वे कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 के तहत इंटरमीडिएटरी बन जाती हैं। इसलिए, वे भारतीय साइबर कानून के नियम एवं विनियमन के तहत उचित पारिश्रमिक तथा दूसरे मापदंडों के अनुपालन के लिए कर्तव्यबद्ध हैं।'

भारत में डेटा संरक्षण कानून या साइबर सुरक्षा पर केंद्रित कोई कानून नहीं है। साथ ही, निजता को लेकर भी किसी विशेषीकृत कानून का अभाव है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके चलते कारोबारियों के लिए परिस्थिति थोड़ी जटिल हो जाती है क्योंकि जब कर्मी घर से काम करता है तब भी कारोबारी ही डेटा में सेंध लगने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

हालांकि कई कंपनियां, विशेषकर तकनीकी क्षेत्र की कंपनियां, घर से काम करने को लेकर अपनी नीतियां बना चुकी हैं लेकिन कई दूसरी कंपनियां ऐसे अनुबंधों के बारे में ई-मेल या फोन से जानकारी उपलब्ध करा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश कारोबारियों के लिए घर से काम करना परिस्थिति तथा काम विशेष के आधार पर आपसी समझ पर निर्भर करता है।

निशीथ देसाई एसोसिएट्स में एचआर-कानून के प्रमुख विक्रम श्रॉफ कहते हैं, 'कंपनियों ने अपनी नीतियों की समीक्षा करना शुरू कर दिया है और वे अपने काम का मानकीकरण कर रही हैं।' ट्राईलीगल में पार्टनर अतुल गुप्ता बताते हैं कि भले ही कोई व्यक्ति घर से काम कर रहा हो लेकिन ऐसी स्थिति में भी डेटा गोपनीयता से जुड़े प्रावधान लागू होते हैं। वह कहते हैं, 'कंपनियों को अपने कर्मचारियों को इसके बारे में ध्यान दिलाना चाहिए और घर से काम करते समय भी डेटा की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए आवश्यक तरीकों को लेकर शिक्षित करना चाहिए।' श्रॉफ कहते हैं कि कर्मचारी के साथ हुए अनुबंध या घर से काम करने वाली नीति में सेंध लगने पर कंपनी कानूनी कदम उठा सकती है।

भारत के आईटी उद्योग का आकार करीब 190 अरब डॉलर है और इसमें 40 लाख से ज्यादा कर्मचारी नौकरी करते हैं। इनमें से बहुत सी कंपनियां वैश्विक साझेदारों के लिए गंभीर तथा अहम परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। इस समय देश की अधिकांश कंपनियों को घर से काम करने पर जोर देना पड़ रहा है लेकिन इसके साथ ही कंपनियों को क्लाइंट की अनुमति के साथ साथ बहुत सी नियामकीय मंजूरियां तथा कई सरकारी विभागों से भी मंजूरी लेनी पड़ रही हैं।

नैसकॉम द्वारा जारी एक नोट में कहा गया, कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए क्लाइंट से अनुमतियां ले रही हैं और उन्होंने सुरक्षा एवं निजता जैसे मामलों की देखरेख के लिए आंतरिक स्तर पर एक टीम का गठन किया है। हालांकि उद्योग लॉबी समूहों का कहना है कि देश का आईटी उद्योग अभी भी कई अहम नियामकीय मुद्दों पर सरकार से बातचीत कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बदलाव पर काम कर रही कंपनियों को जल्द से जल्द घर से काम करने को लेकर व्यापक नीतियां बनानी चाहिए, उन्हें अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना चाहिए और अपने कर्मचारियों से इलेक्ट्रॉनिक तौर पर सहमति लेनी चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं कि जो कर्मचारी इन नीतियों को लेकर अपनी सहमति दे देते हैं सिर्फ उन्हें ही घर से काम करने की अनुमति दी जाए।

शार्दूल अमरचंद मंगलदास ऐंड कंपनी में पार्टनर आनंद भूषण कहते हैं, 'कंपनियां सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि उनके पास वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क या क्लाउड उपाय मौजूद हैं जिससे घर से काम करते हुए भी एक बेसिक स्तर की सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके।'

वह कहते हैं कि वर्तमान में लागू सामान्य प्रोटोकॉल, जैसे पासवर्ड साझा न करना, बैंकअप न बनाना और असुरक्षित इंटरनेट नेटवर्क का इस्तेमाल न करना आदि का पालन किया जाना चाहिए। दुग्गल कहते हैं, 'इस समय घर से काम करने जैसी स्थिति में कंपनियों को अपने कर्मचारियों के बीच क्षमता निर्माण पर अधिक ध्यान देना होगा।'

Keyword: Data Security, Work From Home, घर से काम, डेटा सुरक्षा,
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