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मूडीज ने भारतीय बैंकिंग का परिदृश्य किया नकारात्मक

देशबंदी से राज्यों के राजस्व पर होगा बुरा असर
कृष्ण कांत / नई दिल्ली April 02, 2020

 

केंद्र की तुलना में कुछ राज्य  देशबंदी से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।  वैश्विक महामारी का कुछ राज्यों के खजाने पर असर वित्त वर्ष 20 और अगले वित्त वर्ष के दौरान ज्यादा पड़ सकता है। परिवहन ईंधन, वाहनों की बिक्री, शराब, रियल एस्टेट लेन देन, बिजली और फिल्म एवं मनोरंजन पर लगने वाले अप्रत्यक्ष कर की हिस्सेदारी राज्यों के कुल कर राजस्व में बहुत ज्यादा

होती है।

इनमें से ज्यादातर आर्थिक गतिविधियां या तो पूरी तरह से ठप पड़ गई हैं या पिछले दो सप्ताह के दौरान तेजी से घटी हैं, जिससे राज्यों के कर राजस्व में गिरावट आई है। इसकी तुलना में केंद्र सरकार का ज्यादा राजस्व व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट, विनिर्माण व आयात कर से आता है, जहां कर की गिरावट बहुत तेज नहीं है और यह भी संभावना है कि देशबंदी खत्म होते ही इन कार्यों में अचानक बहुत तेजी आएगी।

इक्वीनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक और एमडी जी चोकालिंगम ने कहा, 'राज्यों के राजस्व बड़े पैमाने पर विभिन्न लेन देन पर लगने वाले कर से आते हैं, जो देशबंदी की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके विपरीत आमदनी और विनिर्माण पर लगने वाले कर का बड़ा हिस्सा केंद्र के पास जाता है।'

अर्थशास्त्रियों को यह भी उम्मीद है कि राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से मिलने वाले राजस्व में भी कमी आएगी क्योंकि बिक्री व गैर जरूरी वस्तुओं और सेवाओं पर लेन देन पूरी तरह से बंद हो गया है।

केयर रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'जीएसटी राजस्व का करीब 80 प्रतिशत गैर जरूरी वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले कर से आता है, जिसमें उभोक्ता एवं इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, फैशन और मनोरंजन वगैरा से आता है। वहीं ज्यादातर जरूरी सामान जैसे खाद्य एवं पर्सनल केयर के सामान या तो कर मुक्त हैं या कम कर वाले ढांचे में आते हैं।' 

राज्यों के वित्त पर भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक राज्यों के अपने कर राजस्व में जीएसटी की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत रखी गई थी, जबकि शेष राजस्व गैर जीएसटी करों जैसे बिक्री कर और वैट, राज्य उत्पाद, स्टांप एवं पंजीकरण शुल्क, वाहनों के पंजीकरण, बिजली पर लगने वाले कर व अन्य साधनों से आता है।

इस विश्लेषण को देखते हुए जीएसटी और गैर जीएसटी से मिलने वाले राज्यों के कर में मार्च और अप्रैल 2020 में तेज गिरावट आने की संभावना है।

उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2020 में सभी राज्य सरकारों ने बिक्री कर व मूल्यवर्धित कर (वैट) से 3.26 लाख करोड़ रुपये आमदनी का बजट मेंं अनुमान लगाया है। यह उनके कुल राजस्व का एक चौथाई और केंद्रीय कर में हिस्सेदारी सहित उनकी कुल प्राप्तियों का करीब 10 प्रतिशत है। डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन पर लगने वाले बिक्री कर व वैट से आने वाले राजस्व में भी गिरावट आएगी, जिनकी हिस्सेदारी अच्छी होती है।

इंडियन फाउंडेशन फार ट्रांसपोर्ट रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) के अनुमान के मुताबिक इस समय सिर्फ एक तिहाई ट्रक सड़कोंं पर चल रहे हैं और बसों व कोच की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। इसके परिणामस्वरूप डीजल की खरीद में भारी गिरावट हुई है, जो देश में ईंधन का सबसे बड़ा एकल स्रोत है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक 9गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनलिसिस सेल (पीपीएसी) के मुताबिक  वित्त वर्ष 20 के पहले 11 महीनों के दौरान भारत में कुल पेट्रोलियम खपत में डीजल की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत रही है। इसके बाद तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और मोटर स्प्रिट (पेट्रोल) की खपत हुई है।

राज्यों के उत्पाद शुल्क का ज्यादा हिस्सा शराब पर लगने वाले कर से आता है, जो 1.75 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान राज्यों ने लगाया था। यह वित्त वर्ष 202 में उनके खुद के कर राजस्व का 13 प्रतिशत होता है। देश भर में शराब की दुकानें बंद हैं, जिससे राज्यों के राजस्व का बड़ा स्रोत प्रभावित हो रहा है।

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