बिजनेस स्टैंडर्ड - रबी फसल का बचाव
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रबी फसल का बचाव

संपादकीय /  April 02, 2020

सरकार ने कृषि गतिविधियों को कोविड-19 महामारी के कारण लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन से बाहर रखकर सही कदम उठाया है। इसके साथ ही राज्य सरकारों ने किसानों और अन्य अंशधारकों से कहा है कि वे कामकाज के दौरान लोगों से अपेक्षित दूरी बनाए रखें तथा अन्य सावधानियों का पालन करें। कृषि क्षेत्र के लिए यह समय बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इस समय रबी की फसल पक रही है। सरकार की कोशिश है कि फसल कटाई सहजता से हो, उसका विपणन और भंडारण भी अच्छी तरह किया जा सके। इस बार असमय बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद गेहूं के उत्पादन का नया रिकॉर्ड कायम होने की आशा है। फसल की समय पर कटाई में किसी भी तरह की चूक से किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। यह देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी अच्छा नहीं होगा।

बहरहाल सरकार के इन प्रयासों के बावजूद किसानों की चिंताएं पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं। दरअसल श्रमिकों और ट्रकों की कमी के कारण खेती का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य जगहों से मजदूरों का पश्चिमोत्तर भारत के रबी की खेती वाले इलाके में जाना नहीं हो रहा है। जबकि फसल बुआई और कटाई के मौसम में आमतौर पर ऐसा देखने को मिलता था। इसके विपरीत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत देश के तमाम शहरी क्षेत्रों के श्रमिक जो आमतौर पर इस समय खेतिहर श्रमिकों की कमी दूर करने इन इलाकों में आ जाते थे, वे भी अब अपने गांवों को लौट चुके हैं। रेल और बस सेवाओं के ठप होने तथा कोरोनावायरस से उत्पन्न भय के कारण निकट भविष्य में श्रमिकों की उपलब्धता संभव नहीं नजर आती।

इतना ही नहीं श्रमिकों की कमी दूर करने के लिए खेतों में काम आने वाली मशीनें भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। कंबाइन-हार्वेस्टर ऐसी ही एक मशीन है जिसे किसान किराये पर लेते हैं। आमतौर पर यह मशीन इस समय तक मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में काम करना शुरू कर देती थी क्योंकि वहां फसल जल्दी पकती है। इसके बाद मशीनें राजस्थान, हरियाणा और पंजाब का रुख करती थीं जहां यह काम चल रहा होता। परंतु इस साल इनमें से कई मशीनें मध्य प्रदेश और गुजरात में फंस गई हैं क्योंकि मशीन चलाने वाले तथा उनके हेल्पर नहीं हैं। बहरहाल, अगर इन सारे हार्वेस्टर को काम पर लगा दिया जाए तो भी वे शायद ही कुल फसल का 50 से 60 फीसदी ही निपटा पाएं। इसके अलावा बड़ी तादाद में ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहन भी लॉकडाउन के कारण सामान्य रूप से नहीं चल पा रहे। उनमें से कई अनेक दिन से राजमार्गों पर फंसे हैं क्योंकि उन पर लदी वस्तुएं अनिवार्य वस्तुओं की श्रेणी में नहीं थी। अब जबकि कई प्रतिबंध शिथिल किए गए हैं तो हालात में सुधार हो सकता है। हालांकि हालात के पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। इससे कारोबारियों और आधिकारिक खाद्यान्न खरीद एजेंसियों दोनों के सामने माल ढुलाई की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

कृषि बाजारों में भी अभी सामान्य कामकाज शुरू होना बाकी है। दिल्ली की आजादपुर जैसे कुछ बड़े बाजारों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर जगह श्रमिक बाजार से आते हैं और वहां इनकी कमी हो गई है। कृषि उपज भंडारण सुविधा भी सीमित है। एफसीआई ने कहा है कि इस बार वह एक अप्रैल के बजाय 15 या 20 अप्रैल के पहले गेहूं खरीद नहीं शुरू कर पाएगा। कुछ कृषक संगठनों ने किसानों को 10,000 रुपये तत्काल देने की मांग की है ताकि उनका काम चल सके। इसे उपज खरीद के बाद समायोजित किया जा सकता है। इन मसलों को जल्द हल करना होगा ताकि रबी फसल की बरबादी न हो।

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