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अमेरिका-यूरोप से ऑर्डर रद्द होने की निर्यातकों को आशंका

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली April 01, 2020

फरवरी में निर्यात में अचानक से तेजी देखे जाने के बाद फिर से यह क्षेत्र संकुचन की दिशा में तेजी से बढ़ रह है। निर्यातकों को यह डर सता रहा है कि विदेशी मुद्रा की कमाई वाले क्षेत्र में बड़े ऑर्डर रद्द किए जा सकते हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, 'हमें मार्च में निर्यात में संकुचन के आसार दिख रहे हैं और बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए मांग में आई संचयी गिरावट का असर अप्रैल में नजर आएगा जिससे बड़े स्तर पर निर्यात में कमी आएगी।'

कोरोनावायरस की चपेट में बुरी तरह से फंसे अमेरिका और यूरोप के बड़े ग्राहकों की ओर से एक के बाद एक  ऑर्डर रद्द किए जाने से इंजीनियरिंग सामान और कपड़ा जैसे क्षेत्र को भारी चोट पहुंच सकती है। भारत से होने वाला इंजीनियरिंग निर्यात का 40 फीसदी इन्हीं दो बाजारों में जाता है। दूसरी तरफ यूरोप में भारत के प्रमुख कपड़ा  निर्यात गंतव्यों में सस्ते बांग्लादेशी और वियतनामी विकल्पों से इस क्षेत्र पर पहले से ही दबाव बना हुआ है।  अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा, 'इस उद्योग को बैंकों से तुरंत मंजूरी और पैकिंग क्रेडिट दिए जाने, निर्यात बिलों का देर से भुगतान और बिना किसी जमानत के अग्रिम सीमा को बढ़ाकर 25 फीसदी किए जाने की तुरंत आवश्यकता है।'

उन्होंने कहा कि इसके अलावा अग्रिम फॉरेक्स बुकिंग और ईएमआई को छह महीने तक स्थगित किए जाने पर किसी तरह का जुर्माना नहीं होना चाहिए।

छह महीने की सुस्ती के बाद फरवरी महीने में निर्यात को थोड़ी गति मिली थी। इससे शीघ्र ही कारोबार सुधरने की उम्मीद जगी थी। हालांकि नीति निर्माता अब तक इन बातों पर सहमत नहीं हैं। एक वरिष्ठ सरकारी व्यापार विशेषज्ञ ने कहा, 'गत महीने निर्यात में मामूली बढ़ोतरी हुई थी। इसके साथ ही तेल कीमतों में अचानक से तेजी आई थी जिससे भारत को रिफांइड पेट्रोलियम की बिक्री करने पर ज्यादा रकम मिल रही थी।'  

तेल की कीमतों में तेजी आने से भारत को 3.4 अरब डॉलर की कमाई हुई थी। फरवरी महीने में इसमें 10 फीसदी की उछाल रही, जबकि जनवरी में इसमें 7 फीसदी की कमी आई थी। लेकिन उसके बाद सऊदी अरब और रूस के बीच जबरदस्त कीमत युद्ध के कारण उनके यहां तेल के दाम घटकर 18 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 26 डॉलर प्रति बैरल रही। 

निर्यात को श्रमिकों की जबरदस्त कमी के कारण भी नुकसान हो रहा है। बड़ी संख्या में श्रमिकों के शहरी औद्योगिक क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्र में पलायन कर जाने के करण भी निर्यात को झटका लग रहा है। भारतीय परिधान विनिर्माता संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'श्रमिकों की किल्लत लगातार इस वजह से बनी हुई है कि उन्हें लग रहा है कि बंदी में रोजी रोटी चलाना मुश्किल होगा।'

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