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आखिरी तिमाही में घटीं परियोजनाएं

सचिन मामबटा / मुंबई April 01, 2020

आर्थिक सुस्ती और कोविड-19 महामारी के कारण बढ़ती अनिश्चितता के बीच वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में बहुत कम परियोजनाएं ही नजर आईं। नई परियोजनाओं की लागत मार्च 2020 में समाप्त हुई तीन महीने की अवधि में 7,000 करोड़ रुपये कम रही। यह जानकारी परियोजना ट्रेकर सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों से सामने आई है। नई परियोजनाओं का मूल्य मार्च 2019 में 2.98 लाख करोड़ रुपये थी जो मंगलवार को समाप्त तिमाही में घटकर 2.91 लाख करोड़ रुपये रह गई। मंगलवार को वित्त वर्ष 2020 का अंतिम दिन था। पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं में 71.3 फीसदी की कमी आई लेकिन अटकी परियोजनाओं के मूल्य में भी कमी आई है। अटकी परियोजनाओं के मूल्य में 82 फीसदी से अधिक की कमी हुई।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि जून तिमाही के आंकड़ों से धारणा और अधिक स्पष्ट होगी जब कोरोना के भय से नई परियोजनाओं में भारी कमी आने के आसार हैं।

कोविड-19 नया वायरस है जिसके कारण बीमारी को फैलने से रोकने के लिए बंदी करने वाला चीन सबसे पहला देश है। उसके बाद कई देशों में बंदी की गई। इटली, फ्रांस और स्पेन में ऐसा किए जाने के बाद भारत ने भी 25 मार्च को देशबंदी की घोषणा की थी। विश्लेषकों की राय में नई परियोजनाओं पर इसका दीर्ध अवधि का असर हो सकता है। 

देशबंदी होने से आपूर्ति शृंखला और श्रमिकों की उपलब्धता बाधित है। कोरोनावायरस के मामले से पूंजीगत माल बनाने वाली कंपनियों की दो तिमाही का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है क्योंकि उनका राजस्व इन्हीं परियोजनाओं पर निर्भर करता है। यह जानकारी 31 मार्च को जारी की गई कैपिटल गुड्स रिपोर्ट से सामने आई है जिसे शोध विश्लेषकों चिराग शाह, अमित अनवानी और आदिल खान ने लिखा है।

ये सभी ब्रोकरेज कंपनी आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की खुदरा विभाग आईसीआईसीआई डाइरेक्ट से जुड़े हैं।

रिपोर्ट कहती है, 'कोरोनावायरस के वास्तविक प्रसार का आकलन कर पाना कठिन है और फिलहाल तेल कीमत में गिरावट अभी भी चरम पर पहुंचना बाकी है। हालांकि, इससे घरेलू बाजार में तीन से छह महीने के राजस्‍व और लाभ से हाथ धोना पड़ सकता है जबकि यूरोप के देशों, अमेरिका, पश्चिम एशिया और चीन पर निर्भर या उनके साथ व्यापार करने वाली कंपनियों को तगड़ा झटका लग सकता है। इन कंपनियों को निकट भविष्य में अनिश्चितता से उच्च जोखिम उठाना पड़ सकता है।' इसमें कहा गया है कि मार्च 2021 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2021) में इस क्षेत्र को ऑर्डर, क्रियान्वयन पर दबाव के साथ साथ कार्यशील पूंजी, नकद प्रवाह, बही खाता और लाभ पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 

विदेशी ब्रोकरेज कंपनी जेफरीज इंडिया की इक्विटी विश्लेषकों लाविना क्वाडरोस और अपूर्वा बहादुर ने अपने 30 मार्च की कंपनी अद्यतन रिपोर्ट में कहा कि निजी क्षेत्र की पूंजीगत माल की दिग्गज कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो को प्राइस/बुक (पीबी) मूल्यांकनों पर दबाव देखने को मिला है जो इससे पहले वैश्विक वित्तीय संकट के समय देखने को मिला था।

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