बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-कॉमर्स में डिलिवरी बॉय की कमी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, August 15, 2020 07:19 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

ई-कॉमर्स में डिलिवरी बॉय की कमी

पीरजादा अबरार और समरीन अहमद /  April 01, 2020

एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और बिगबास्केट जैसी विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियां कह रही हैं कि वे अपनी सेवाएं बहाल कर रही हैं। लेकिन इसके बावजूद बहुत सी कंपनियों को उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की डिलिवरी में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इन्हें कफ्र्यू पास और डिलिवरी कर्मचारियों की कमी से जूझना पड़ रहा है। सूत्रों ने बताया कि कोविड-19 महामारी का प्रसार रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन सख्ती बरत रहा है, इसलिए डिलिवरी बॉय अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं।

देश में एक सामुदायिक और उपभोक्ता प्लेटफॉर्म लोकलसर्कल्स के संस्थापक और चेयरमैन सचिन तापडिय़ा ने कहा, 'ज्यादातर स्थानीय अधिकारी लॉकडाउन के नियमों को कड़ाई से लागू कर रहे हैं। इससे डिलिवरी बॉय अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं और वे अपने काम पर नहीं आ रहे हैं। इन डिलिवरी बॉय में से बहुत से प्रवासी हैं, जिनमें से बहुत से वापस अपने घर चले गए हैं। ऐसे में उन्हें वापस लाना बड़ी चुनौती होगी।' लोकलसर्कल्स विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करता है।

तापडिय़ा ने कहा कि देश के विभिन्न जिलों में बहुत से डिलिवरी बॉय को कफ्र्यू पास नहीं मिले हैं। इनका मिलना आसान नहीं है और इन्हें जारी करने की मैनुअल प्रक्रिया के कारण इनमें कई दिन लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन को कफ्र्यू पास के बजाय एक वैध पहचान-पत्र और ई-कॉमर्स कंपनी का लैटर स्वीकार करना चाहिए।

तापडिय़ा ने कहा, 'इसके अलावा कई गांवों में ई-कॉमर्स कंपनियों के बड़े गोदाम हैं। इन गांवों के सरपंच ई-कॉमर्स कंपनियों के डिलिवरी बॉय को गांव में आने-जाने नहीं दे रहे हैं, इसलिए ई-कॉमर्स कंपनियां देश भर से प्राप्त ऑर्डरों में से आधे से भी कम की डिलिवरी कर पाई हैं। संसाधनों और डिलिवरी बॉय के उपलब्ध न होने के कारण बड़ी तादाद में ऑर्डर लंबित पड़े हैं।' इन ई-कॉमर्स कंपनियों में से कुछ को डिलिवरी के लिए सभी मंजूरियां मिली हुई हैं, लेकिन उनके पास डिलिवरी बॉय की किल्लत है। इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन (आईएसएफ) की अध्यक्ष ऋतुपर्णा चक्रवर्ती ने कहा, 'ई-कॉमर्स क्षेत्र के मौजूदा हालातों के लिए नियोक्ता जिम्मेदार नहीं हैं। लॉकडाउन की घोषणा से दूसरे शहरों और कस्बों के कर्मचारी बोरियां-बिस्तर समेटकर अपने घर वापस चले गए।'

चक्रवर्ती ने कहा, 'ये ई-कॉमर्स कंपनियां आवश्यक सेवाएं मुहैया कराकर अपना परिचालन जारी रख सकती थीं, लेकिन उनके पास डिलिवरी के लिए कर्मचारी नहीं हैं। हालांकि मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है।'

ईवाई इंडिया में पार्टनर और नैशनल लीडर (ई-कॉमर्स एवं उपभोक्ता इंटरनेट) अंकुर पाहवा ने कहा कि केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स के लिए कुछ एकसमान नियम तय किए हैं, लेकिन राज्यों, शहरों और जिला स्तर पर स्थानीय प्रशासन अलग-अलग नियमों का पालन कर रहा है। उन्होंने कहा, 'गोदामों में कर्मचारियों की कमी से भी उत्पादों को पैक और डिलिवर करने के काम में अड़चन आ रही है। वहीं बहुत से डिलिवरी बॉय अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं, इसलिए वे अपने राज्यों में वापस लौट गए हैं। बहुत से लोग रोजगार बाजार से बाहर हो गए हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों को बड़ी तादाद में ऑर्डर मिल रहे हैं। लोग खरीदारी के लिए बड़ी तादाद में डिजिटल प्लेटफॉर्मों को अपना रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश डिलिवरी का पर्याप्त बुनियादी ढांचा ही मौजूद नहीं है।' विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियों के अधिकारियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार और पुलिस समेत स्थानीय सार्वजनिक सेवा एजेंसियों को देश भर में ई-कॉमर्स उद्योग में कार्यरत लाखों डिलिवरी बॉय का भरोसा जीतने और उन्हें सुरक्षा का आश्वासन देने की तत्काल आवश्यकता है। एक ई-कॉमर्स कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'डिलिवरी बॉय उपलब्ध नहीं हैं। उनकी उपस्थिति बहुत कम है।'

फ्लिपकार्ट लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए रेलवे और डाक विभाग जैसे संगठनों के साथ गठजोड़ की संभावनाएं तलाश रही है। फ्लिपकार्ट में चीफ कॉरपोरेट अफेयर्स ऑफिसर रजनीश कुमार ने कहा, 'देश भर में हमारे विक्रेताओं और वेंडरों से ग्राहकों तक आवश्यक आपूर्ति पहुंचाने के लिए हमारी टीम रेलवे सहित गठजोड़ की सभी संभावनाओं पर विचार कर रही है। इन सभी विचारों और सरकार के सहयोग से हमें बहुत जल्द आवश्यक वस्तुओं की डिलिवरी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।' उन्होंने कहा, 'हम भर्तियां कर रहे हैं और किराना और आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी आपूर्ति शृंखला और डिलिवरी कर्मचारियों को प्रोत्साहन दे रहे हैं ताकि ग्राहकों को उत्पादों की डिलिवरी के लिए क्षमता बढ़ाई जा सके।'

हालांकि ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने कहा कि वह धीरे-धीरे सेवाओं को बहाल कर रही है। लेकिन अगर आप इस प्लेटफॉर्म पर चावल या चाय जैसी आवश्यक वस्तु का ऑर्डर देते हैं तो यह ऐप दिखाता है कि बेंगलूरु जैसी जगह पर इसकी डिलिवरी कम से कम एक महीने में होगी, जो कंपनी का मुख्यालय है। एमेजॉन के प्रवक्ता ने कहा, 'हम धीरे-धीरे सेवाएं बहाल कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन से मंजूरी और पास मिलने के बाद शहरों में सेवाएं बहाल कर रहे हैं। हम सबसे पहले आवश्यक वस्तुओं के मौजूदा ऑर्डरों की डिलिवरी कर रहे हैं और केवल इन उत्पादों के ही ऑर्डर स्वीकार कर रहे हैं।' यह अग्रणी कंपनी अब तक आवश्यक वस्तुओं के लिए अपनी सेवाएं बेंगलूरु, पुणे, लुधियाना, लखनऊ, मैसूर, नोएडा, रायपुर, कोलकाता और हैदराबाद में बहाल कर चुकी है।  ई-हेल्थ स्टार्टअप मेडलाइफ करीब 20 शहरों में फिर से अपनी सेवाएं चालू कर चुकी है। कंपनी अपनी आपूर्ति शृंखला को प्रबंधित करने के तरीके तलाश रही है। कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ अनंत नारायण कहते हैं कि इस समय कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती काम के लिए कर्मचारी हासिल करना है। उन्होंने कहा, 'इस समय हमें यह मजबूत संदेश देने की जरूरत है कि हम सभी एहतियात बरत रहे हैं और लोगों को वापस लौटने और आवश्यक सेवाओं के लिए काम करने का भरोसा देते हैं।' कंपनी के प्लेटफॉर्म पर नियमित ऑर्डरों की तुलना में दोगुने या तिगुने ऑडर्र आ रहे हैं, लेकिन उसके पास कर्मचारी करीब 50 फीसदी कम हो गए हैं।

ऑनलाइन किराना स्टोर बिगबास्केट फिर से अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन यह पिछले एक सप्ताह से अपने ऐप पर बीबी स्टार ग्राहकों के भी ऑर्डर नहीं ले रहा है। सुपर डेली जैसी स्टार्टअप अब केवल दूध की आपूर्ति कर रही हैं और सब्जी, अंडे और ब्रेड जैसे अन्य उत्पादों की डिलिवरी बंद कर दी है। ब्रांडेड मीट और पोल्ट्री डिलिवरी स्टार्टअप लिसियस भी एक सप्ताह से अधिक समय से चल नहीं रही है। इसके ऐप पर सभी चीजें खत्म हैं।

Keyword: ECommerce, Delivery Boy, Amazon, Flipkart, BigBasket, Coronavirus, Lockdown, ई-कॉमर्स, डिलिवरी बॉय, एमेजॉन, फ्लिपकार्ट, बिगबास्केट,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के लाभांश से खजाने पर कम होगा बोझ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.