बिजनेस स्टैंडर्ड - कहीं मंडियां खुलीं तो कहीं मुश्किलें
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कहीं मंडियां खुलीं तो कहीं मुश्किलें

बीएस संवाददाता /  April 01, 2020

देशव्यापी लॉकडाउन के एक सप्ताह बाद देश के बहुत से हिस्सों में कृषि मंडियां फिर चालू हो रही हैं। लेकिन ऐसा धीरे-धीरे हो रहा है और कुछ मंडियों में कारोबार अब भी पटरी पर नहीं आया है। ज्यादातर मंडियां कामगारों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के इंतजाम कर रही हैं। बहुत सी मंडियों में आवक और आपूर्ति को नियंत्रित किया जा रहा है ताकि भीड़भाड़ से बचा जा सके।

कई इलाकों से खबरें आ रही हैं कि किसानों को सब्जियां मंडी में न पहुंचने के कारण फेंकनी पड़ रही हैं या पशुओं को खिलानी पड़ रही हैं। गुजरात के हालात चिंताजनक हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान में तिलहन की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में तेल पेराई इकाइयां कह रही हैं कि उन्हें किसानों से सीधे खरीद की मंजूरी दी जाए।

वाशी सब्जी मंडी चालू है, लेकिन यहां भीड़ को दूर रखने के लिए एक व्यवस्था अपनाई गई है। मंडी में सब्जियों के आने और जाने का अलग-अलग समय तय किया गया है। अनाज मंडी में भी भीड़ घटाकर 20 फीसदी कर दी गई है।

वाशी मंडी के निदेशक सुशील सिंगाटकर ने कहा, 'कम से कम 1,500 लोग रोजाना मंडी में आते हैं, जिन्हें संभालना मुश्किल है। इसलिए हमने प्रवेश की एक निश्चित सीमा तय करने का फैसला लिया है।' वर्धा मंडी शुक्रवार को अनाज का कारोबार खोलने की योजना बना रही है। यह मंडी किसानों, कारोबारियों, मथाडिय़ों (कामगारों) और आढ़तियों के लिए खुली है, लेकिन आवक बहुत कम बनी हुई है।

वर्धा मंडी के चेयरमैन श्याम भीमरावजी कार्लेकर ने कहा, 'सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए हम एक समय 10 किसानों के बिक्री ऑर्डर स्वीकार कर रहे हैं और बिक्री नीलामी में 10 खरीदारों को शामिल होने की मंजूरी दे रहे हैं।' महाराष्ट्र में प्याज मंडी लासलगांव पहले त्योहार की वजह से और बाद में पास के गांव में कोरोनावायरस का एक मरीज मिलने से बंद है। किसानों को अपना प्याज अन्य मंडियों में बेचना पड़ रहा है।


गुजरात

गुजरात में ताजा सब्जियों और फलों पर तुलनात्मक रूप से कम असर पड़ा है, जबकि अनाज, दलहन और तिलहन पर ज्यादा असर पड़ा है। सौराष्ट्र की बड़ी मंडियों में किसान सब्जियां बेचने आ रहे हैं, लेकिन कारोबार बमुश्किल ही नजर आते हैं। अहमदाबाद कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) के सचिव दीपक पटेल ने कहा, 'रोजाना आवक हो रही है, जिस पर मामूली असर पड़ा है। उदाहरण के लिए पहले ताजा सब्जियों की दैनिक आवक 17,000 क्विंटल थी, जो अब घटकर 15,000 क्विंटल पर आ गई है।'

हालांकि अनाज और दलहन की आवक पर कुछ असर पड़ा है क्योंकि स्टॉक घट रहा है और नई आवक को बाजारों में पहुंचने में कुछ समय लग रहा है।

ऑल गुजरात रोलर फ्लोर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश सराफ ने कहा, 'मंडी में अनाज और दलहन की नीलामी बंद है। खेतों में फसल तैयार है, लेकिन मजदूर उपलब्ध नहीं हैं। आपूर्ति शृंखला भी प्रभावित हुई है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से परिवहन धीमा चल रहा है। मध्य प्रदेश और राजस्थान से कुछ आपूर्ति हो रही थी, जो अंतरराज्यीय लॉकडाउन की वजह से रुक गई है। हालांकि अभी तक कोई किल्लत नहीं है। उदाहरण के लिए गेहूं सरकार के एफसीआई गोदामों में उपलब्ध है। लेकिन निजी गोदाम खाली हैं क्योंकि नई आवक शुरू नहीं हुई है।'

दूसरी तरफ सौराष्ट्र क्षेत्र में राजकोट जैसे शहरों में 15 किलोग्राम के मूंगफली तेल के टिन के दाम बढ़कर 2,270 रुपये हो गए हैं। मंडी के सूत्रों के मुताबिक इस समय तेल पेराई लगभग बंद है और मंडी भी बंद है, जिससे मूंगफली की आवक थम गई है। सरकारी एजेंसी नैफेड ने नीलामी बंद कर दी है और इस समय उसके पास 6 लाख टन मूंगफली का स्टॉक है।


बिहार

बिहार में किसान एक अलग तरह के संकट का सामना कर रहे हैं। राज्य में उपज और मांग है, लेकिन कई अवरोधों की वजह से वितरण के प्रबंधन के लिए कोई केंद्रीकृत स्थान नहीं है। कई जगह किसान सब्जियां फेंक रहे हैं या उसका इस्तेमाल पशुओं को खिलाने में कर रहे हैं। गेहूं की खरीद में देरी हो रही है। मिल गेहूं नहीं खरीद पा रही हैं और आटे की आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इससे खुदरा बाजार में आटे की किल्लत पैदा हो रही है, जिससे कीमतें भी बढ़ रही हैं। अब सरकार ने हालात को सामान्य करने के लिए दखल दिया है।


उत्तर भारत

लॉकडाउन से राष्ट्रीय राजधानी में एशिया की सबसे बड़ी कृषि मंडी आजादपुर से फल एवं सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों ने कृषि एवं बागवानी उपजों की दिल्ली के भीतर और अंतरराज्यीय आवाजाही को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। यहां आसपास के इलाकों से फल-सब्जियों की आवक हो रही है, लेकिन दूर के इलाकों से आवक प्रभावित हुई है।

आजादपुर मंडी में चावला फ्रेश वेजिटेबल्स के रोहित चावला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'आजादपुर मंडी में कारोबार आधा हो गया है। हमारा ज्यादातर माल महाराष्ट्र से आता है लेकिन पिछले एक सप्ताह के दौरान राज्य से आने वाले ट्रकों की संख्या में भारी गिरावट आई है क्योंकि उनके चलने पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।' हालांकि पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा की कृषि मंडियों में हालात कमोबेश समान हैं। आजादपुर में ज्ञानचंद ऐंड संस के ज्ञानचंद ने कहा, 'उत्तर प्रदेश से कृषि उपजों की आवक कम हुई है, जबकि मांग पहले ही कम हो चुकी है।'


पश्चिम बंगाल

पूर्वी भारत के सबसे बड़े जिंस बाजारों में से एक कोलकाता के पोस्ता बाजार में दुकानें मंडी की योजना के अनुसार बारी-बारी से खुल रही हैं। यहां राज्य के बाहर से अनाज, दलहन और अन्य आवश्यक खाद्य उत्पादों की ताजा आपूर्ति नहीं हो रही है। लेकिन पोस्ता बाजार मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदन चक्रवर्ती ने कहा कि बाजार में अगले 15 दिन की मांग पूरी करने लायक स्टॉक मौजूद है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की उपलब्धता बड़ी समस्या है। यहां आलू और सब्जियों की आपूर्ति पर कम असर पड़ा है क्योंकि वे राज्य के विभिन्न जिलों से ट्रकों में आ रही हैं।

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