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कोविड-19 के इलाज के लिए तैयार बड़े अस्पताल

ज्योति मुकुल और ईशिता आयान दत्त / गुरुग्राम/कोलकाता April 01, 2020

गुरुग्राम शहर में बंद पड़े हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन के पास कुछ पुलिसवाले फोर्टिस हॉस्पिटल में पहुंचते हैं। उनमें से एक को बुखार है। उन्हें एक अलग रास्ते से ग्राउंड फ्लोर पर स्थित फ्लू क्लीनिक में भेजा जाता है। इस रास्ते से जाने वाले लोगों को अपनी कलाई पर ऑरेंज बैंड पहनना होता है।

अस्पताल में पहुंचने वाले हर व्यक्ति की पहले बुखार की जांच की जाती है और उसे अपनी यात्रा के इतिहास के बारे में जानकारी देनी होती है। जिन्हें बुखार की शिकायत नहीं होती है, उन्हें ग्रीन बैंड दिया जाता और बुखार, खांसी और सर्दी से पीडि़त मरीजों को ऑरेंज बैंड पहनना होता है। यहां तक कि अस्पताल में काम करने वालों को भी इस जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। दुनियाभर में कहर बरपा रही कोविड-19 महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए ये इंतजाम किए गए हैं।

दक्षिण कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में भी इसी तरह के नियमों का पालन किया जा रहा है। सुरक्षाकर्मी मरीजों और उनके परिजनों को एक मेज के पास ले जाते हैं जहां उनका उनके तापमान की जांच की जाती है। एएमआरआई और फोर्टिस देश के उन प्रमुख निजी अस्पतालों में शामिल हैं, जहां कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं और इस बीमारी के संदिग्धों तथा मरीजों के इलाज के लिए समर्पित कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। फोर्टिस ने पूरे देश में अपने 20 अस्पतालों में 262 बिस्तरों के साथ आइसोलेशन वार्ड बनाए हैं। इन अस्पतालों में कोविड-19 के 83 संदिग्धों और 28 पॉजिटिव मरीजों का इलाज हो रहा है।

फोर्टिस और एएमआरआई दोनों अस्पतालों में 40 से 50 आयुवर्ग का एक-एक मरीज वेंटिलेटर पर है। एएमआरआई का मरीज एक गैर सरकारी संस्था में काम करता है जो झुग्गियों में भोजन के पैकेट बांटती है।

गुरुग्राम में फोर्टिस ने अब तक कोविड-19 के छह मरीज भर्ती किए हैं जिनमें से चार को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। इनकी उम्र 30 से 40 के बीच है। अस्पताल नें अपने कॉरपोरेट हेल्थ चेक अप एरिया हेल्थ4यू को फ्लू क्लीनिक में बदला है, जहां नमूने एकत्र किए जाते हैं और सामान्य परीक्षण किए जाते हैं। रात में यह काम बेसमेंट में स्थित क्वारंटाइन कक्ष में होता है।

फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की जोनल डायरेक्टर डॉक्टर ऋतु गर्ग कहती हैं, 'अगर किसी व्यक्ति में कोविड-19 के संक्रमण का संदेह होता है तो उसे आपातकालीन आइसोलेशन वार्ड में ले जाया जाता है। कोविड-19 की जांच के लिए पहले नमूने सरकारी सिटी अस्पताल में भेजे जाते थे लेकिन अब उन्हें एसआरएल डायग्नोस्टिक में भेजा जाता है।

सरकार ने इस निजी लैब को कोविड-19 की जांच की अनुमति दी है जिसे लिए 4,500 रुपये की दर निर्धारित की गई है। अगर किसी मरीज में कोविड-19 के संक्रमण की पुष्टि होती है तो उसे अलग आइसोलेशन वार्ड में रखा जाता है। निदेशक एवं पल्मोनरी यूनिट के प्रमुख डॉक्टर मनोज गोयल ने कहा, 'हम इसे कोरोना वार्ड नहीं कहते हैं बल्कि ईआर आइसोलेशन वार्ड और आइसोलेशन वार्ड कहते हैं।'

फोर्टिस ने अपने कीमोथेरेपी डे केयर वार्ड को मुख्य आइसोलेशन वार्ड में बदला है। इसमें एक अलग प्रवेश द्वार है और साथ ही भोजन और बेवरिजेस सर्विस के लिए एक छोटी खिड़की भी है। पहले इसमें कैंसर के मरीजों को रखा जाता था। एएमआरआई के ढकूरिया यूनिट में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में चार बिस्तरों का एक वार्ड है और कोविड के संदिग्ध मरीजों के लिए एक अलग कमरा है। यहां आपातकालीन विभाग के प्रमुख और नोडल अधिकारी अशोक मिश्रा ने कहा कि इस वार्ड में तीन डॉक्टर और छह नर्स हैं।

हालांकि कोविड-19 के पॉजिटव या गंभीर मरीजों को आईटीयू में रखा जाता है जहां आइसोलेशन में दो बिस्तर हैं। विशेष रूप से कोविड-19 मरीजों के लिए बनाए आईटीयू में जाने का रास्ता अलग है। एएमआरआई में एक एक्स्ट्राकॉरपोरियल मेंबरेन ऑक्सीजिनेशन (ईसीएमओ) मशीन है जो सांस लेने में गंभीर समस्या आने पर मरीज को सहारा दे सकती है। ऐसी ही एक मशीन भुवनेश्वर यूनिट में भी है। इसका एक दिन के खर्च डेढ़ लाख रुपये है और तीन से पांच दिन तक मरीज को इसमें रखने पर साढ़े चार लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। एएमआरआई ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के मुख्य कार्यकारी और निदेशक रूपक बरुआ ने कहा कि अभी इसकी कीमत अहम नहीं है। उन्होंने कहा कि एएमआरआई कोविड के मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह तैयार है।

Keyword: Hospital, Clinic, Coronavirus, Lockdown, Covid-19, Pandemic, लॉकडाउन, कोरोनावायरस, महामारी, अस्पताल, क्लीनिक,
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