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आरबीआई ने राहत का दायरा और बढ़ाया

अनूप राय / मुंबई 04 01, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए वेज ऐंड मीन्स एडवांसेज (डब्ल्यूएमए) सीमा 30 प्रतिशत बढ़ा दी है। बढ़ी हुई सीमा 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। आरबीआई ने निर्यातकों को भी राहत दी है और इसके तहत उन्हें निर्यात से आने वाली प्राप्तियों के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय दिया है। आरबीआई ने कोरोना से देश में पैदा हालत को देखते हुए ये कदम उठाए हैं।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि बैंकों को अगले एक साल के लिए काउंटरसाइक्लिकल कैपिटल बफर (सीसीवाईबी) भी सक्रिय करने की जरूरत नहीं है। इसका आशय यह है कि बैंक सुरक्षित रकम के रूप में रखी पूंजी का इस्तेमाल कर सकते हैं। निर्यात से जुड़े राहत पर आरबीआई ने कहा कि निर्यातकों को 31 जुलाई तक की निर्यात प्राप्तियों के लिए 15 महीने तक का समय दिया गया है। सामान्य नियमों के तहत निर्यातकों को इसके लिए 9 महीने का समय दिया जाता है। अब आरबीआई ने यह समयसीमा छह महीने के लिए बढ़ा दी है। इससे निर्यातकों को भविष्य में होने वाले निर्यात सौदे के लिए विदेशी खरीदारों के साथ बेहतर नियम शर्तें तय करने में आसानी होगी।

निर्यातकों के संगठन फियो के अजय साहनी ने कहा कि उद्योग जगत ने आरबीआई से ऐसी रियायतों की मांग की थी। साहनी ने कहा कि इससे निर्यातकों की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'यह रियायत निर्यातकों के लिए एक उपाय के तौर पर भी काम करती है। मांग कम होने पर ग्राहक साख की मांग करते हैं और अब निर्यातक बाद में प्राप्तियां हासिल करने के मकसद से यह मांग पूरी कर सकते है। इससे निर्यातकों को विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिलती है।'

हालांकि मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि आरबीआई को उन निर्यातकों के लिए भी कुछ कदम उठाना चाहिए था, जो फारवर्ड अनुबंध से जुड़े हैं। चूंकि, निर्यात प्राप्तियों की समय सीमा बढा दी गई है, इसलिए निर्यातकों के लिए फॉरवर्ड अनुबंध का कोई मतलब नहीं रह गया है, लेकिन उन्हें अनुबंधों का पालन करना होगा। कारोबारियों के अनुसार इससे उन्हें नुकसान होगा। डब्ल्यूएमए एक अस्थायी नकदी व्यवस्था है, जिसके तहत केंद्र और राज्य आरबीआई से 90 दिनों तक के लिए उधार ले सकते है।

इससे उन्हें नकदी की किल्लत से निपटने में आसानी होती है। मंगलवार को आरबीआई ने केंद्र के लिए पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिए डब्ल्यूएमए बढाकर 1.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया था। केंद्र के मामले में आरबीआई ने कहा था कि अगर सरकार डब्ल्यूएमए रकम के 75 प्रतिशत तक हिस्से का इस्तेमाल करता है तो यह बॉन्ड जारी कर सकता है।

जानकारों का कहना है कि डब्ल्यूएमए सीमा में बढ़ोतरी से राज्यों को बॉन्ड बाजार पर अधिक निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।  वित्तीय जरूरतों के लिए राज्य बॉन्ड बाजार से उधार लेते हैं, लेकिन समतुल्य परिपक्वता वाले सरकारी बॉन्ड और राज्य के बॉन्ड के बीच अंतर 120 आधार अंक से अधिक हो गया है। सामान्य परिस्थितियों में यह अंतर 40 से 60 आधार अंक रहता है। राज्यों ने बॉन्ड बाजार से उधारी पहले ही बढ़ा दी है, जिससे प्राप्तियां बढ़ रही हैं।

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