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छोटी बचत के ब्याज पर फिरी कैंची

जयदीप घोष / नई दिल्ली March 31, 2020

 

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते रीपो दर और नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में तगड़ी कटौती कर राहत दी थी, लेकिन आज सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों पर कैंची चलाकर आम आदमी को भारी झटका दे दिया। सरकार ने सभी लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में अप्रैल-जून तिमाही के लिए 70 से 140 आधार अंक कमी कर दी।

सबसे तगड़ी कतरब्योंत बचत योजनाओं में की गई है और इसमें सभी अवधियों की बचत योजनाएं शामिल हैं। एक से तीन साल की जमा पर ब्याज दर 140 आधार अंक कम कर दी गई है। पांच साल की आवर्ती जमा योजनाओं के लिए भी ब्याज में 140 आधार अंक की कमी की गई है। अभी तक इन पर 7.2 फीसदी ब्याज मिलता था, लेकिन अगली तिमाही में केवल 5.8 फीसदी ब्याज मिलेगा।

बुजुर्ग भी सरकारी कैंची से नहीं बच सके। वरिष्ठï नागरिक बचत योजना के ब्याज में 120 आधार अंक की कटौती की गई है, जिससे 8.6 फीसदी के बजाय अप्रैल से जून के बीच 7.4 फीसदी ब्याज ही मिलेगा। सार्वजनिक भविष्य निधि पर 7.9 फीसदी के बजाय 7.1 फीसदी ब्याज ही दिया जाएगा यानी इसमें 80 आधार अंक की कमी की गई है। राष्टï्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) पर ब्याज 110 आधार अंक घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया गया है। किसान विकास पत्र की ब्याज दर में भी 70 आधार अंक की कमी गई है और 124 महीनों में परिपक्व होने वाली इस योजना पर अब केवल 6.9 फीसदी ब्याज मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंदीदा 'सुकन्या समृद्घि योजना' भी दर कटौती से बच नहीं पाई। अभी तक 8.4 फीसदी ब्याज देने वाली इस योजना पर अगली तिमाही में केवल 7.6 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। सरकार के इस फैसले से केवल बचत जमा की दर बची है और उस पर पहले की तरह 4 फीसदी सालाना ब्याज दिया जा रहा है।

हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए दरों में कटौती का अनुमान पहले ही लगाया जा रहा था, लेकिन इतनी बड़ी कटौती पिछले कई सालों में नहीं की गई थी। बहराहल ब्याज कटौती के बाद भी इनमें से कई योजनाएं आकर्षक बनी रहेंगी क्योंकि उनमें ज्यादा ब्याज दिया जा रहा है। बैंक पहले ही जमा दरों में कटौती कर चुके हैं।


अगली छमाही 4.88 लाख करोड़ उधार जुटाएगी सरकार
अगले वित्त वर्ष के दौरान सरकार अप्रैल से सितंबर में बाजार से 4.88 लाख करोड़ रुपये का कर्ज जुटाएगी। कोरोनावायरस महामारी के असर से निपटने के प्रयासों के बीच सरकार संसाधन जुटाने में लगी है। आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती ने मंगलवार को हुई बैठक के निर्णय की जानकारी दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के बजट में बाजार से सकल 7.8 लाख करोड़ रुपये का उधार लिए जाने का अनुमान लगाया है। चालू वित्त वर्ष में इसके 7.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सकल उधारी में पिछले कर्जों के भुगतान के लिए गए कर्ज की राशि भी शामिल होती है। वित्त मंत्री ने 2020-21 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि 2019-20 के दौरान शुद्ध बाजार उधारी 4.99 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि नए वित्त वर्ष 2020-21 में इसके 5.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। भाषा

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