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रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक : बीएस-6 ईंधन का सफर

अमृता पिल्लई / मुंबई March 30, 2020

 

पोर्ट ब्लेयर स्थित एक प्रयोगशाला में एक युवती ने कई हफ्तों तक ईंधन के कुछ नमूनों का परीक्षण किया। यह प्रयोगशाला इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (इंडियन ऑयल) की है, जो देश में दूरदराज के स्थानों में ईंधन टैंक को पूरे तरीके से सुखाने (बोन ड्राइंग) का काम करती है, जिससे वे बीएस-6 मानक वाले ईंधन को अपनाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएं। भारत एक अप्रैल 2020 से बीएस-4 के स्थान पर बीएस-6 मानक का ईंधन अपनाने जा रहा है।

इंडियन ऑयल में कार्यकारी निदेशक (गुणवत्ता-निगरानी) संजीव मजूमदार कहते हैं, हमें एक अप्रैल की समयसीमा से काफी पहले तैयार हो जाना था। यह समय के साथ एक दौड़ थी।

नए मानकों के तहत ईंधन में सल्फर की अधिकतम मात्रा 10 पीपीएम हो सकती है। मजूमदार की गुणवत्ता-निगरानी टीम को 3 साल से अधिक समय हो गया है और अब टीम ने साफ ईंधन की डिलिवरी देने की लंबी प्रक्रिया के अंतिम चरण को पूरा कर लिया है।  इंडियन ऑयल की तरह ही भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) जैसी दूसरी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने भी देशभर में कई परीक्षण इकाइयां स्थापित की हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके खुदरा आउटलेट में बीएस-6 मानक वाला ईंधन उपलब्ध है। इन तीनों कंपनियों ने बीएस-6 मानक के अनुसार तेल उत्पादन के लिए अपनी रिफाइनरी उन्नत करने पर करीब 35,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती दूर-दराज के इलाकों में स्थित आउटलेट में बदलाव की इस प्रक्रिया को पूरा करना है जहां बिक्री भी काफी कम होती है। बीपीसीएल के निदेशक (रिफाइनरी) आर. रामचंद्रन बताते हैं कि जिन पंपों पर बिक्री अधिक होती है, वहां से बीएस-4 मानक वाले तेल को बाहर निकालना आसान है क्योंकि वहं दैनिक उपभोग काफी ज्यादा है। हालांकि कम बिक्री वाले पंपों पर तेल कंपनियों को बोन-ड्राइंग प्रणाली का उपयोग करना होगा।

देश की अधिकांश रिफाइनरियों ने इस साल जनवरी से बीएस-6 मानक वाले ईंधन का उत्पादन शुरू कर दिया है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक अप्रैल 2020 तक यह देश के प्रत्येक पेट्रोल पंप पर उपलब्ध हो।

एक रिफाइनरी के प्रमुख ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कहा, ईंधन में सल्फर की मात्रा कम करने के लिए हमें रिफाइनरियों में अलग प्रसंस्करण इकाई लगाई है। रिफाइनरी अद्यतन करने की इस प्रक्रिया में करीब 3 साल का समय लगा। यह अतिरिक्त प्रसंस्करण इकाई तेल से सल्फर की मात्रा को कम कर देती है जिससे इसे बीएस-6 मानकों के अंतर्गत लाया जा सके।

हालांकि बाहर निकाला गया सल्फर व्यर्थ नहीं जाता। रिफाइनरी प्रमुख ने बताया, शेष बचे सल्फर को रासायनिक उर्वरक तथा दूसरे उत्पाद बनाने के लिए बेच दिया जाता है।

ईंधन आपूर्ति शृंखला रिफाइनरी से शुरू होती है और बहु-उत्पाद वाली पाइपलाइनों, टर्मिनलों, टैंकरों एवं डिपो की एक जटिल प्रक्रिया से गुजरते हुए अंत में खुदरा आउटलेट के तेल टैंक तक पहुंचती है।

टर्मिनल पर उत्पाद पहुंचने के बाद यह अलग-अलग टैंकों में बांट दिया जाता है। मजूमदार कहते हैं, रिफाइनरियों ने बीएस-6 ईंधन भेजना शुरू कर दिया है और हमें लगता है कि हमारे टैंक में बीएस-4 तेल अभी भी है। ऐसे में बोन-ड्राइंग प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती क्योंकि उसमें अभी भी तेल मौजूद है। इसलिए हम डाइलूशन (तनुकरण) की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं।

इस प्रक्रिया के तहत बीएस-4 तथा बीएस-6 मानक वाले ईंधनों को अलग-अलग स्तर के साथ मिलाते रहते हैं। कई बार इस प्रक्रिया को दोहराने से ईंधन बीएस-6 मानक का हो जाता है।

पेट्रोल पंपों पर भी इसी तरह की रणनीति अपनाई जाती है। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने पुष्टि की है कि उनके देशभर में स्थित सभी रिटेल आउटलेट बीएस-6 मानकों के अनुरूप हो गए हैं। इनमें इंडियन ऑयल द्वारा संचालित देश में सबसे ऊंचाई पर स्थित पेट्रोल पंप भी शामिल है जो हिमाचल प्रदेश की स्फीति घाटी के काजा में स्थित है।

बीएस-4 तथा बीएस-6 ईंधन को मिलाने की प्रक्रिया में भी कई स्तरों पर नमूना जांच की विधि अपनाई जाती है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बिक्री के साथ-साथ पुराना तेल खत्म हो रहा है। मजूमदार कहते हैं, पिछले एक महीने में हमने कई आउटलेट से नमूने लेकर जांच की है।

मजूमदार की टीम ने कई शिफ्ट में एक साथ मिलकर काफी कार्य दबाव के साथ प्रयोगशालाओं में लगातार परीक्षण करके अपने इस काम को अंजाम तक पहुंचा दिया है।

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