बिजनेस स्टैंडर्ड - कोरोनावायरस के खिलाफ जंग: भारतीय उद्योग जगत साथ-साथ
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कोरोनावायरस के खिलाफ जंग: भारतीय उद्योग जगत साथ-साथ

विवेट सुजन पिंटो और गिरीश बाबू / मुंबई/चेन्नई March 30, 2020

भारत में कोविड-19 से संक्रमित रोगियों की लगातार बढ़ रही संख्या के मद्देनजर उन्हें अलग-थलग रखने की व्यवस्था काफी महत्वपूर्ण हो गई है। कोविड-19 से संक्रमित और संदिग्ध रोगियों के उपचार के लिए बिस्तरों और कमरों की भारी किल्लत के कारण इस ओर ध्यान देना आवश्यक है। एकीकृत स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी अपोलो हॉस्पिटल्स ने सोमवार को कहा कि उसने कोरोनावायरस रोगियों को अलग-थलग रखने की व्यवस्था के लिए के लिए प्रोजेक्ट स्टे-1 पहल शुरू की है। यह कंपनी द्वारा गुरुवार को शुरू किए गए कार्यक्रम प्रोजेक्ट कवच का हिस्सा है। इस पहल को उद्योग जगत के कई वित्तीय एवं आतिथ्य सेवा कंपनियों का समर्थन मिला है। इस प्रकार यह देश में अपने प्रकार का पहला कार्यक्रम है।

इसके तहत ओयो, लेमन ट्री और जिंजर होटल्स पहले चरण में पांच शहरों में कुल 500 कमरे उपलब्ध कराएंगे, जहां मरीजों को अलग रखने की व्यवस्था होगी।

हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), डॉयचे बैंक और भारतीय स्टेट बैंक रोगियों को अलग रखने की लागत उपलब्ध कराएंगे जिसमें आवास, चिकित्सा देखभाल और वाईफाई की लागत शामिल हैं। इसी प्रकार जोमैटो इन कमरों में रोगियों के लिए भोजन उपलब्ध कराएगी। फिलहाल जिन शहरों में यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है उनमें मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलूरु और चेन्नई शामिल हैं। अगले सप्ताह कोलकाता को भी इसमें जोडऩे की योजना है।

अपोलो हॉस्पिटल्स और बायोकॉन इन कमरों में चिकित्सा एवं जांच की सुविधा उपलब्ध कराएंगी। यहां रुकने वाले रोगियों से केवल दवाओं का खर्च लिया जाएगा।

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप की संयुक्त प्रबंध निदेशक संगीता रेड्डी ने कहा, प्रोजेक्ट स्टे 1 एक अभिनव कार्यक्रम है, जो कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करता है। हमने देश भर में 5,000 कमरों को इसमें शामिल करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है और मांग के आधार पर हर सप्ताह 50 से 100 अतिरिक्त कमरे जोड़े जाएंगे।

रेड्डी ने कहा कि जिन लोगों को कोविड-19 के लक्षण हैं वे इन होटलों में जांच करवा सकते हैं। उनके ठहरने के लिए बुकिंग की जा सकती है और उनके चिकित्सा का विवरण साझा किया जा सकता है ताकि जल्द से जल्द उनका इलाज हो सके। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन और तकनीक आधारित समाधानों की मदद से उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी और अस्पताल द्वारा प्रबंधित एक केंद्रीय सर्वर में डेटा रखा जाएगा।

हालांकि ओयो, लेमन ट्री और जिंजर इन कमरों में रहने के लिए प्रति व्यक्ति 1,200 से 3,000 रुपये के दायरे में रकम ले सकती हैं। भविष्य में अन्य भागीदारों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है क्योंकि अपोलो अस्पताल इसे गरीबों के लिए सब्सिडीयुक्त सुविधा मान रही है। पिछले सप्ताह टाटा समूह की टाटा ट्रस्ट और समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने कोविड-19 संकट से निपटने के लिए 1,500 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इस महामारी के खिलाफ जंग में साथ देने के लिए आगे बढऩे वाली कंपनियों में रिलायंस फाउंडेशन, महिंद्रा समूह, बजाज समूह, आईटीसी और एचयूएल शामिल हैं।

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