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प्रत्यक्ष कर संग्रह में 2 दशक की बड़ी गिरावट संभव

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली March 30, 2020

भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह 31 मार्च को समाप्त चालू वित्त वर्ष में संशोधित अनुमान की तुलना मेंं 1.5 लाख करोड़ रुपये कम रह सकता है। यह पिछले 2 दशक के इतिहास में अनुमान की तुलना में कर संग्रह में सबसे बड़ी गिरावट होगी, जो सरकार के राजकोषीय लक्ष्यों को पटरी से उतार सकती है।

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक आयकर विभाग का अनुमान है कि कुल संग्रह 10.5 से 10.7 लाख करोड़ रुपये रह सकता है, जबकि संशोधित लक्ष्य 11.7 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। बहरहाल असल आंकड़े 1 अप्रैल को ही आएंगे।

अधिकारियों ने इस तेज गिरावट की वजह वैश्विक महामारी को बताया, लेकिन इस साल के शुरुआती महीने भी प्रत्यक्ष कर संग्रह के हिसाब से खराब थे। अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने कम से कम पिछले दो दशक के दौरान इस तरह की गिरावट नहीं देखी है।

विभाग के सूत्रों ने कहा कि महत्त्वाकांक्षी कर समाधान योजना विवाद से विश्वास से संग्रह बढऩे की उम्मीद थी, लेकिन जबसे यह योजना लागू की गई है, अब तक कोई बड़ी प्रविष्टि नहीं आई है और इस योजना को अब जून तक के लिए बढ़ा दी गई है। अब देशबंदी के बाद ही लोगों के सामने आने की संभावना है।

सरकार ने बजट अनुमान में चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 13.5 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य रखा था, जो पिछले साल की तुलना में 17 प्रतिशत ज्यादा था। बहरहाल साल के दौरान कारोबार और कॉर्पोरेट की मांग में भारी गिरावट देखी गई और लोगों की बड़े पैमाने पर नौकरियां गईं और निवेश लक्ष्य में भी कटौती हुई। उसके बाद कॉर्पोरेट कर ढांचे में बदलाव व कोविड-19 के हमले से स्थिति और खराब हो गई।

सरकार ने संशोधित अनुमान में कर संग्रह का लक्ष्य घटाकर 11.7 लाख करोड़ रुपये कर दिया, क्योंकि कॉर्पोरेशन कर दरों में कमी की वजह से 1.45 लाख करोड़ रुपये कम संग्रह होने और अर्थव्यवस्था सुस्त रहने का अनुमान था।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कर कार्यालय ने 18 मार्च तक 9.57 लाख करोड़ रुपये एकत्र किए, जो इसके पहले के साल की समान अवधि की तुलना में 5.3 प्रतिशत कम है।

सूत्रों ने कहा कि कर विभाग ने तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान अग्रिम कर भुगतान में आई कमी के बाद से कवायदें तेज कर दी थी। तीसरी तिमाही में कॉर्पोरेशन कर की वृद्धि में 5 प्रतिशत गिरावट आई। जनवरी में कुल कर संग्रह 7.3 लाख करोड़ रुपये था। चौथी तिमाही में कंपनियों के अग्रिम कर भुगतान में 10 प्रतिशत की गिरावट आई।

एक सरकारी सूत्र ने कहा कि इस गिरावट से केंद्र का राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है, जिसे बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी का 3.8 प्रतिशत कर दिया गया था।  जनवरी महीने में समग्र हिसाब से देखें तो राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 20 के बजट लक्ष्य की तुलना में 28.5 प्रतिशत ज्यादा हो गया था।

बहरहाल अब सरकार का ध्यान आर्थिक स्थिति पर नहीं है, बल्कि वह कोविड-19 के हमले का असर कम करने में जुटी हुई है, जिसने हर गतिविधि को रोक दिया है और अरबों की संपत्ति खत्म कर दी है।

कर विशेषज्ञों का भी कहना है कि प्राथमिकता अब राजकोषीय गणित नहीं बल्कि वैश्विक आपदा को रोकना है।

ईवाई में नैशनल टैक्स लीडर सुधीर कपाडिया ने कहा, 'इस समय तात्कालिक ध्यान वैश्विक महामारी को रोकने पर है, न कि राजकोषीय घाटे पर। इसके साथ ही केंद्र व राज्यों को खासकर छोटे व मझोले उद्योगों को मदद करने की जरूरत है। सरकार को होटल, पर्यटन, मनोरंजन, उड्डयन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत है, जो इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और पूरी तरह से देशबंदी के दौरान ठप हैं। कुल मिलाकरक भारत सहित कोई भी देश कर वसूली और राजकोषीय गणित सुधारने पर ध्यान नहीं दे सकता है। यहां तक कि अगर राजकोषीय घाटा 1-2 प्रतिशत बढ़ भी जाता है तो कारोबार को जिंदा रखने पर ध्यान देने की जरूरत है।'

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