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लॉकडाउन में किसानों के सामने फसल कटाई का संकट

संजीव मुखर्जी /  March 30, 2020

हरियाणा के किसान सिमरन संधू को अपनी गेहूं की फसल से काफी उम्मीदें थीं। एक ओर उनकी फसल काफी अच्छी दिख रही थी और दूसरी ओर पिछले कुछ महीनों में बाजार कीमतों में तेजी आई थी।

हालांकि हाल में हुई दो घटनाओं ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया। जनवरी के आखिरी पखवाड़े में लगातार बारिश होती रही और अब कोरोनावायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन लग गया जिसके चलते खेतों में कटाई करने के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे हैं और कटाई मशीन को किराये पर लेना काफी महंगा हो गया है। उर्वरक तथा बीज बेचने वाली दुकानें बंद हो गई हैं और मूंग जैसी कम अवधि वाली गर्मियों की फसल की बुआई की संभावना भी धुंधली पडऩे लगी है।

वहीं दिल्ली की आजादपुर मंडी में काम करने वाले फल कारोबारी राजकुमार भाटिया को दूसरे तरह की एक समस्या है। लॉकडाउन के शुरुआती कुछ दिनों में फल से भरे ट्रक मंडी आते रहे लेकिन पुलिस द्वारा लॉकडाउन का सख्ती से पालन करने के चलते वहां माल ढुलाई के लिए श्रमिक तथा सामान ले जाने के लिए फेरी वाले ही नहीं थे। इस तरह की समस्याओं के चलते केंद्र तथा राज्य सरकारों ने पुलिस को आदेश दिया कि वे आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही पर रोक न लगाएं। भाटिया कहते हैं, 'गुरुवार के बाद से स्थिति थोड़ी ठीक हुई है लेकिन मैं अभी भी आशंकित हूं।'

शनिवार को कुछ खबरें आईं कि आजादपुर मंडी में टमाटर विक्रेताओं को टमाटर आपूर्ति के लिए कंटेनरों की व्यवस्था करने में बहुत मुश्किलें आईं और उनका आना-जाना पूरी क्षमता के साथ शुरू नहीं हो सका।

भारत की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शुमार कारगिल इंडिया के अध्यक्ष साइमन जॉर्ज कहते हैं कि होटल, रेस्त्रां जैसे फूड सर्विस कारोबार से खाद्य तेल की मांग बहुत कम हो गई है। हालांकि इस समय लोग घर का सामान काफी अधिक मात्रा में खरीद रहे हैं जिससे थोड़ी भरपाई हुई है। जॉर्ज को लॉकडाउन के शुरुआती कुछ दिनों तक अपने सभी 12 संयंत्र चालू रखने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा हालांकि उन्होंने इन बाधाओं का डटकर सामना किया। वह कहते हैं, 'मेरा मानना है कि अगले सप्ताह से कई चीजों पर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और ट्रकों की आवाजाही पटरी पर लौट आएगी।'

वह बताते हैं कि बिस्किट या इस तरह के पैकेट बंद किसी भी सामान ग्राहक तक पहुंचने से पहले वह एक पूरी प्रक्रिया से गुजरते है और यह प्रक्रिया बेहतर तरीके से चलनी चाहिए। इस प्रक्रिया में गेहूं, चीनी जैसे कच्चे माल को लाने, इकाइयों में प्रसंस्करण करने, पैकेजिंग से लेकर डीलर तथा खुदरा विक्रेताओं से बनी वितरण प्रणाली शामिल है। इस समय उत्पादक, प्रसंस्करणकर्ता, विक्रेता तथा खरीदार के बीच बनी चेन टूट गई है और इसे जल्द से जल्द ठीक किया जाना चाहिए। विकसित देशों से इतर, भारत में यह चेन विविधता से भरी है जो काफी विस्तृत, बिखरी हुई, असंगठित तथा छोटी कंपनियों  से भरी हुई है। एक छोटी सी गड़बड़ी से पूरी शृंखला बिखर जाएगी जिससे आपूर्ति बाधित होगी और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाएंगी। अभी भी कुछ बाजारों में पिछले कुछ दिनों में फल तथा सब्जियों की कीमतों में 30-40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।

जॉर्ज मानते हैं कि अधिकारियों द्वारा परेशान करने वाले भय को लॉजिस्टिक परिचालकों के दिमाग से निकालना होगा जिससे सभी 21 दिन के बजाय एक लंबी तैयारी कर सकें। केंद्र तथा राज्य सरकारों ने इस उलझन को दूर करने, ट्रकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने तथा मंडियों को सुचारु तौर पर काम करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं और ग्राहकों तक सामान पहुंचाने का यही एक रास्ता है।

शुक्रवार रात से केंद्र ने कुछ अन्य सेवाओं को लॉकडाउन से बाहर किया है, जिसमें मंडियां, खरीद एजेंसियां, खेत में काम करना, कृषि मशीनरी खरीद केंद्र, खेत में काम करने वाले मजदूर, उर्वरक-कीटनाशक तथा बीज निर्माता एवं पैकेजिंग इकाइयां और कृषि उत्पादों की राज्यों के बीच आवाजाही शामिल है। केंद्र ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है जो आपूर्ति शृंखला से जुड़ी समस्याओं को दूर करेगी।

उम्मीद है कि इससे फल तथा सब्जियों के साथ ही रबी सीजन की फसल कटाई, परिवहन तथा बिक्री आसानी से हो सकेगी। हरियाणा तथा पंजाब जैसे कुछ राज्यों ने गेहूं फसल की देर से कटाई करने पर आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

 

 

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