बिजनेस स्टैंडर्ड - घर से काम करने का चलन कुछ फायदेमंद, कुछ उलझन
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घर से काम करने का चलन कुछ फायदेमंद, कुछ उलझन

इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  March 30, 2020

कोरोनावायरस की महामारी के बाद पैदा हुए हालात के बीच सरकार लोगों को एक दूसरे से संपर्क कम रखने की सलाह दे रही है। ऐसे में विभिन्न दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए घर से काम करना अति आवश्यक हो गया है। कई लोगों का तो यहां तक कहना है कि वायरस का संक्रमण खत्म होने के बाद भी दुनिया भर की कंपनियां घर से काम करने के चलन पर अधिक जोर देंगी।

फिलहाल यह संभावना कल्पना ही लग रही है, लेकिन इससे कम से कम कंपनियों को कर्मचारियों के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करने और अपनी शैली में सुधार करने का अवसर जरूर मिलेगा। कंपनियों में अमूमन पुराने तौर-तरीकों पर सवाल खड़े होते रहते हैं।

घर से काम करना फिलवक्त जरूरी हो गया है और इसकी वजह भी है। पहली बात तो यह कि घर से काम करने पर कर्मचारी कार्यालय आने-जाने के झमेले से बच जाएंगे और इस तरह समय की बचत मुमकिन हो पाएगी। घर बैठे काम करने से उनकी उपयोगिता भी बढ़ जाएगी क्योंकि कार्यालय स्थलों पर अक्सर बैठकों का दौर चलता रहता है, जिससे समय की बरबादी होती है। कंपनियों के लिए एक फायदा यह होगा कि उन्हें कार्यालय स्थापित करने की जरूरत नहीं होगी या इसके लिए कम से कम जगह की दरकार होगी। कुल मिलाकर कंपनियों को इससे खासी बचत होगी। समाजशास्त्रियों का कहना है कि लोग घर बैठे सप्ताह में पांच से सात घंटे अधिक काम करते हैं। इससे भी अच्छी बात यह है कि अधिक काम करने के बाद भी वे अपने परिवार और मित्रों के लिए अधिक समय निकाल लेते हैं और उनके कार्य और निजी जिंदगी के बीच संतुलन भी बेहतर बना रहता है।

हालांकि इस कहानी का अंत उतना खुशनुमा नहीं लग रहा है। शोध में यह पता चला है कि घर से काम करने की रणनीति आपात योजना का हिस्सा होना चाहिए। शोध में घर से काम करने के कई नुकसान भी बताए गए हैं। जब कर्मचारी घर से काम करते हैं तो अपने सहकर्मियों से जुड़े रहने के लिए उनके पास ई-मेल और फोन कॉल के विकल्प ही रहते होते हैं। इससे कंपनी में उन्नत कार्य शैली विकसित करने और आपसी सहयोग बढ़ाने में बाधा आती है। कार्यालय से कर्मचारियों को दूर रहकर काम करने के लिए कहने से एक अच्छी टीम और उन्नत कार्य शैली का विकास खासा मुश्किल है।

मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्राध्यापक थॉमस ऐलन ने अपने अध्ययन में कहा है कि अगर लोग एक दूसरे से 150 फुट से अधिक दूरी पर रहते हैं, उनमें लगातार संवाद की गुंजाइश कम होती जाती है। उन्होंने अपने अध्ययन के माध्यम से बताया है कि संवाद में आई इस कमी की भरपाई स्काइप या ब्रॉडबैंड सेवाओं के माध्यम से बिल्कुल नहीं की जा सकती है।

जब कोई घर से काम रकता है तो कामकाजी और घरेलू जिंदगी के बीच का अंतर खत्म होने लगता है। जब कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहती हैं तो इससे काम का तनाव दिमाग में चक्कर लगाता रहता है। कार्यालय में काम करने पर तनाव मोटे तौर पर लोग वहीं छोड़कर आते हैं। शुरू में घर से काम करना काफी खुशी का अहसास कराता है, लेकिन धीरे-धीरे उत्साह ठंडा पडऩे लगता है और कर्मचारी टीम के साथ काम करने और कार्यालय से जुड़ाव का अभाव अनुभव करने लगते हैं। इसकी वजह यह है कि लोग एक दूसरे से जितना अधिक दूर रहकर काम करते हैं, उनमें एक समूह में काम करने की आदत उतनी ही कम होने लगती है। जाहिर है, इससे उनकी उत्पादकता और एक समूह में काम करने की भावना पर असर होता है।

इससे अनावश्यक चिंताएं भी उत्पन्न होती हैं। जब आप घर से काम कर रहे होते हैं और आपके कॉल या ई-मेल नहीं जाते हैं तो आपके सहकर्मी आपको अधिक भाव नहीं देते हैं। कार्यालय में रहने पर इस तरह की भावनाएं मन को आहत नहीं करती हैं। कम से कम दो दिग्गज कंपनियां नकारात्मक असर की आशंका के मद्देनजर कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने से पीछे हट गई थीं। कुछ कंपनियां कर्मचारियों के व्यवहारों के मद्देजनर भी घर से काम करने के चलन को सकारात्मक दृष्टिï से नहीं देखती हैं। वर्ष 2013 में याहू की मुख्य कार्याधिकारी मारिसा मेयर ने कहा था कि कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से कार्यालय आना चाहिए। उन्होंने कहा था कि कर्मचारियों के बीच संवाद और सहभागिता बेहद जरूरी है और यह तभी संभव है जब कर्मचारी एक दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे। उस समय इस निर्णय के लिए मेयर की खासी आलोचना हुई थी, लेकिन उसी समय न्यू यॉर्क टाइम्स में एक खबर आई थी कि कुछ कर्मचारी घर से काम करने के समय का इस्तेमालअपना निजी कारोबार खड़ा करने में करते हैं।

आईबीएम ने भी घर से काम करने की अनुमति देने का निर्णय पलट दिया था। कंपनी ने कहा था कि उसका लक्ष्य कंपनी को अधिक गतिशील बनाना था और ऐसा तभी संभव है जब शीर्ष नेतृत्व और कर्मचारियों की टीम मिल कर काम करेंगे।

याहू ने अपने कर्मचारियों को घर से काम बंद करने के लिए कहा था। याहू ने कहा था कि आपसी चर्चाओं, नए लोगों से मिलने और जाने-अनजाने हुईं बैठकों से कुछ महत्त्वपूर्ण निर्णय निकल कर आते हैं। कोविड-19 का संकट खत्म होने के बाद कंपनियां एक बार फिर महसूस कर सकती हैं कि कार्यालयों में घर के मुकाबले अधिक काम निपटाए जा सकते हैं।

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