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असम में चाय बागान पर सरकार की नजर

अभिषेक रक्षित / कोलकाता March 29, 2020

असम सरकार ने राज्य के सभी 685 चाय बागानों में विशेष परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) शुरू करने का फैसला किया है। कोरोनावायरस संक्रमण के बावजूद यहां काम जारी रहेगा।

चाय बगान में काम करने वाले करीब साढ़े सात लाख श्रमिकों की सेहत की निगरानी के अलावा सरकार ने चाय बागान के अस्पतालों, शिशु गृहों और क्लब हाउसों को अस्थायी रूप से अपने कब्जे में लेने का फैसला किया है। इसके अलावा कोविड-19 के बारे में कामगारों और अधिकारियों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक चाय बागान को 5,000 रुपये दिए जाएंगे। इस उद्योग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य सरकार कोरोनावायरस संक्रमण के किसी भी मामले की निगरानी के लिए चाय बागान के सभी अस्पतालों और दवाखानों का नियंत्रण तथा प्रबंधन फिलहाल अपने कब्जे में लेगी। राज्य प्रशासन का मानना है कि यह कदम कुशल निगरानी के लिए जरूरी है और इसके लिए जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय भी किया जाएगा।

शिशु गृहों और क्लब हाउसों में भीड़ रोकने की कोशिश की जाएगी और हालात को देखते हुए उन्हें अलग केंद्रों में तब्दील किया जा सकता है। यहां रहने वाले या किसी आगंतुक में कोई लक्षण दिखे तो उसे 14 दिनों के लिए चाय बागान के भीतर ही अलग रखने का आदेश दिया गया है। स्थिति के मुताबिक ही राज्य सरकार चाय बागान के अस्पतालों को अपने नियंत्रण में रखकर जरूरी कार्रवाई करेगी।

चाय बागान प्रबंधन को भी जिला प्रबंधन के साथ समन्वय बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। चाय बागान मालिकों का मानना है कि इस तरह के उपायों से कामगारों के बीच भरोसे को बढ़ावा देने और कोविड-19 के जोखिम को उपयुक्त तरीके से कम करने में मदद मिलेगी। कुछ स्थानों पर बंद के आदेश के बावजूद चाय बागानों को चालू रखा गया है।

असम और पश्चिम बंगाल में चाय की पत्तियों को तोडऩे का सत्र मध्य मार्च से शुरू होकर नवंबर के अंत तक चलता है। आमतौर पर भारत के चाय केंद्र के रूप में मशहूर असम में देश के कुल चाय का लगभग 50 फीसदी उत्पादन होता है जो 2019 में करीब 139 करोड़ किलोग्राम था। उद्योग के अधिकारियों का तर्क है कि चाय बागान की अलग प्रकृति को देखते हुए संक्रमण का जोखिम कम है।

चाय बागानों से जुड़े एक कारोबारी का कहना है, 'ये चाय बागान ज्यादातर दूरदराज की जगहों पर हैं और शायद ही कोई इन बागानों में प्रवेश करता है या यहां से निकलता है। भीड़भाड़ वाली जगहों की तुलना में यहां जोखिम कम है क्योंकि यह जगह खुद ही सुदूर इलाके में है।'

हालांकि यहां भी चाय की पत्तियां तोडऩे वालों को एक-दूसरे से तीन मीटर की दूरी बनाए रखने का आदेश दिया गया है और हाथ साफ रखने के लिए चाय बागानों और चाय फैक्टरियों की तरफ से साबुन और हैंड सैनिटाइजर उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है और सभी कामगारों को मेलजोल से बचने को कहा गया है।

एक अन्य चाय बागान मालिक ने कहा, 'हम अपने चाय बागान में कोरोनावायरस के बारे में जागरूकता बढ़ा रहे हैं। इस महामारी को रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं।' श्रमिकों को आदेश दिया गया है कि वे चाय बागान परिसर छोड़कर बाहर न निकलें। इसके अलावा यहां आने वाले आगंतुकों का पूरा ब्योरा लिया जा रहा है। मसलन उन्होंने इससे पहले कहां की यात्रा की थी और अन्य सूचनाएं आदि। इस ब्योरे को रोजाना आधार पर जिला प्रशासन के साथ साझा किया जा रहा है।

हालांकि, चाय बागान मालिकों का कहना है कि कोरोनावायरस के वैश्विक स्तर पर फैलने और यात्रा से जुड़े सख्त प्रतिबंधों की वजह से बाहरी लोग इस वक्त चाय बागान में नहीं आ रहे हैं। उद्योग के एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, 'वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस का प्रकोप कितना भी दिखे, लेकिन चाय की मांग पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जैसे-जैसे कोरोनावायरस का खतरा कम होता जाएगा, हमें वैश्विक स्तर पर और देश में भी मांग को पूरा करने के लिए तैयार रहने की जरूरत होगी। अगर कोविड-19 का प्रसार रोकने के लिए जरूरी सख्त उपाय भी किए जाते हैं, तब भी चाय की पत्तियां तोडऩे की प्रक्रिया बंद नहीं हो सकती है।'

दूसरी ओर खेता समूह के स्वामित्व वाले रणगजौन चाय बागान ने वायरस के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन देकर काम बंद करने का फैसला किया है। इसमें लगभग 1,000 कामगार और 100 लोगों का ऑफिस स्टाफ काम करता है।

अन्य चाय बागान अधिकारियों ने कहा कि बंद करने पर फैसला इस बात पर निर्भर होगा कि हालात कैसे रहेंगे और कामगार लोगों से मेलजोल न बढ़ाने और व्यक्तिगत साफ-सफाई जैसे एहतियाती उपायों को लेकर कितने गंभीर होंगे।
Keyword: असम, चाय बागान, एसओपी, कोरोनावायरस संक्रमण, श्रमिक, अस्पताल, शिशु गृह, कामगार,
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