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वित्त क्षेत्र के शेयर अभी आकर्षक दांव नहीं

हंसिनी कार्तिक /  March 29, 2020

वित्त क्षेत्र में (एचडीएफसी लिमिटेड और बैंक दोनों), बजाज फाइनैंस, आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) जैसे कुछ प्रमुख शेयरों के मूल्यांकन में ताजा कमजोरी ने बैंकिंग एवं वित्तीय सेवा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी फि र से बढ़ा दी है। इनमें से ज्यादातर शेयर अब अपने 2008 के स्तरों के नजदीक कारोबार कर रहे हैं, जब दुनिया वैश्विक वित्तीय संकट की चपेट में आ गई थी। गिरावट को देखते हुए ब्रोकरों के बीच इसे लेकर सहमति बनती दिख रही है कि ये शेयर आकर्षक हो गए हैं। लेकिन यदि निवेशक गहराई से सोचें तो पता चलता है कि इन शेयरों पर कई तरह की चिंताओं के बादल छाए हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई द्वारा परिसंपत्ति गुणवत्ता पर ताजा व्यवस्था के बावजूद, शायद अभी समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं।

घट सकती है वृद्धि

हालांकि इसे लेकर काफी चर्चा की गई है कि वृद्धि लंबे समय से धीमी बनी हुई है, और यह चिंता देशव्यापी बंदी के संदर्भ में बेहद महत्त्वपूर्ण लग रही है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 संकट जून/जुलाई तक बना रह सकता है, लेकिन वास्तविक अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव ज्यादा लंबे समय तक बने रहने की आशंका है।

उनका कहना है, 'अल्पावधि में आर्थिक उत्पादन में समस्या बढ़ेगी, जिसकी आशंका बनी हुई है। हालांकि मध्यावधि वृद्धि पर इस मंदी के प्रभाव को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है और इस समस्या का समाधान लंबी प्रक्रिया हो सकती है।Ó फि लिपकैपिटल के विश्लेषकों का भी यही मानना है। इन विश्लेषकों का कहना है कि बैंक परिसंपत्ति गुणवत्ता नए स्तर संकट के लिहाज से ज्यादा नाजुक स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, 'ज्यादा अनिश्चितता लॉकडाउन की अवधि और अर्थव्यवस्था के सामान्य होने में लगने वाले समय को लेकर है।Ó वैश्विक स्तर पर बैंकिंग शेयरों को देश की वृद्धि दर के प्रतिनिधि के तौर पर देखा जाता है और भारत के खपत-केंद्रित अर्थव्यवस्था होने की  वजह से यह तर्क भारतीय बैंकिंग शेयरों के लिए भी अच्छा है। स्पार्क कैपिटल के अभिनेश विजयराज कहते हैं, 'धीमी वृद्धि अब भारत और बैंकिंग शेयरों के लिए नया सामान्य स्तर बन सकती है। चाहे एचडीएफसी बैंक हो या आरबीएल बैंक या एसबीआई, सभी के लिए जेपी मॉर्गन ने उनकी ऋण वृद्धि के अनुमानों को 6-17 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2021 के आय अनुमान को 2-79 प्रतिशत तक घटा दिया है और उनका मानना है कि उनकी सूची में शामिल बैंकिंग शेयर वित्त वर्ष 2021 में 1-14 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। यह 2010 के बाद से पहली बार है जब बैंकिंग शेयरों के आय अनुमान और शेयर कीमत लक्ष्य में इतनी ज्यादा कटौती की जा रही है, जो निवेशकों के लिए यह समझने के लिए एक अच्छा संकेत हो सकता है कि सिर्फ  वर्ष का निचला स्तर वाला मूल्यांकन ही बैंकिंग क्षेत्र में आशान्वित होने का कारण नहीं बन सकता है।


परिसंपत्ति गुणवत्ता की चुनौती

परिसंपत्ति वर्गीकरण को लेकर शुक्रवार को आरबीआई द्वारा बरती जा रही नरमी के बाद विश्लेषक इसे लेकर सहमत हैं कि इससे बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता को कुछ अल्पावधि राहत मिल सकती है। लेकिन उनका यह भी मानना है कि इस कदम से समस्या टल सकती है, लेकिन यह इसे समाप्त करने का प्रभावी उपाय साबित नहीं हो सकता।

जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का कहना है, 'हमारा मानना है कि मझोले कॉरपोरेट क्षेत्र में फं से कर्ज की समस्या से आपूर्ति शृंखला पर दबाव बढ़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप बीबीबी और बीबी ऋण बुक में ज्यादा डाउनग्रेड और अधिक एनपीए की समस्या सामने आएगी।Ó उनका कहना है कि मौजूदा अनिश्चितता को लेकर संशय बढ़ रहा है और यह किसी एक उद्योग पर केंद्रित नहीं हो सकता है, हालांकि रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी मौजूदा समय में ज्यादा कमजोर नजर आ रहे हैं।

पहले से ही दबाव झेल रहे छोटे एवं मझोले उद्योगों (एसएमई), असुरक्षित खुदरा ऋणों, सूक्ष्म वित्त, और दूरसंचार जैसे सेगमेंट में चिंताएं बढ़ गई हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों  का मानना है कि दिसंबर तिमाही के विपरीत मौजूदा समय में बैंकों के लिए समाधान की ज्यादा संभावना नहीं है। दिसंबर तिमाही में एस्सार स्टील समाधान प्रक्रिया के जरिये बैंकों के पास बड़ी रकम थी।

इसके परिणामस्वरूप, फि लिपकैपिटल के विश्लेषकों  ने यह अनुमान जताया है कि एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक जैसे प्रमुख बैंकों के लिए कुल ऋण बुक अनुपात 4.3-8.4 के दायरे में रह सकता है और यह परिसंपत्ति गुणवत्ता का बेहद कमजोर उदाहरण हो सकता है।

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