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कर्ज चुकाने पर ध्यान देंगी एनबीएफसी

श्रीपाद ऑटे और सुब्रत पांडा / मुंबई March 27, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नकदी प्रवाह बढ़ाए जाने के उपायों से नकदी किल्लत झेल रहे बैंकिंग क्षेत्र को काफी राहत मिलेगी क्योंकि इसके कुछ हिस्से का उपयोग ऋणदाताओं द्वारा अपनी ऋण देनदारी की अदायगी की जाएगी। ऐसे समय में जब सावधि ऋण के पुनर्भुगतान में मोहलत दिए जाने से नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ सकता था।

भारतीय रिजर्व बैंक ने आज नीतिगत उपायों के जरिये प्रणाली में पर्याप्त नकदी प्रवाह सुनिश्चित करने की कोशिश की है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि वह रीपो से जुड़ी दर पर 1 लाख करोड़ रुपये के लिए 3 वर्षों की लक्षित टर्म रीपो के लिए नीलामी आयोजित करेगा। इसके अलावा नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में छूट और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) के तहत सुविधा बढ़ाए जाने से प्रणाली में प्रत्येक से 1.37 लाख करोड़ रुपये प्रवाहित होंगे।

इन तीनों उपायों से कुल मिलाकर प्रणाली में 3.74 लाख करोड़ रुपये प्रवाहित होंगे। रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंकों द्वारा लंबी अवधि के रीपो स्कीम के तहत ली जाने वाली रकम को निवेश ग्रेड के बॉन्डों, वाणिज्यिक और गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्रों में लगाई जाएगी। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारमण ने कहा, 'निकट भविष्य में कई एनबीएफसी के पास नकदी प्रवाह की समस्या होगी क्योंकि उनके सामान्य संग्रह प्रभावित होंगे। जब तक लॉकडाउन रहता है तब तक एनबीएफसी के ऋण वितरण पर काफी असर रहेगा और उनका संग्रह भी कम होगा। लेकिन किराया, वेतन, ऋण बाजार की अदायगी आदि स्थायी खर्च को उन्हें निपटाना होगा।'

कॉरपोरेट बॉन्ड का एक बड़ा हिस्सा यानी लगभग 60 फीसदी हिस्सा एनबीएफसी द्वारा जारी होता है। इंडिया रेटिंग्स के प्रमुख (वित्तीय क्षेत्र की रेटिंग) प्रकाश अग्रवाल ने कहा, 'बॉन्ड बाजार आवास वित्त कंपनियों सहित एनबीएफसी के लिए रकम जुटाने का एक प्रमुख स्रोत है। अब तक बॉन्ड बाजार द्वारा अदायगी के लिए कोई मोहलत नहीं दी गई है। इसलिए हमारा मानना है कि एनबीएफसी द्वारा अतिरिक्त बैंक उधारी का उपयोग वे अपने बॉन्ड बाजार की देनदारी को चुकाने में करेंगी।'

एनबीएफसी (और सभी ऋणदाताओं) को सावधि ऋण पर मोहलत दिए जाने की उम्मीद है क्योंकि इससे वित्तीय कंपनियों को पूंजी अथवा बॉन्ड बाजार की अपनी देनदारी को पूरा करने में मदद मिलेगी। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही नकदी संकट से जूझ रहा है।

बैंक उधारी के अलावा लॉन्ग टर्म रीपो ऑपरेशन (एलटीआरओ) भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इक्रा के प्रमुख (वित्तीय क्षेत्र की रेटिंग) अनिल गुप्ता ने कहा, 'एलटीआरओ के जरिये रकम बैंकों के नकदी प्रवाह को प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि यह आरबीआई से एक नए वित्तपोषण के रूप में आ रहा है और इसकी लागत भी कम है।'

नकदी प्रवाह में सख्ती, कम जोखिम के कारण बॉन्ड प्रतिफल में काफी बढ़ोतरी हुई। गुप्ता ने कहा कि एनबीएफसी को मिलने वाली इस रकम से प्रतिफल को सामान्य स्तर पर लाने में मदद मिलेगी। इस प्रकार इस एलटीआरओ को मिलने वाली प्रक्रिया काफी अहम होगी। कुछ उद्योग विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अपने ग्राहकों को मोहलत देने वाले एनबीएफसी बैंकों द्वारा एनबीएफसी दी गई मोहलत पर निर्भर होंगी। मौजूदा परिस्थितियों में एनबीएफसी और एचएफसी के ऋण वितरण में वृद्धि की संभावना नहीं है लेकिन लॉकडाउन अवधि समाप्त होने के बाद समग्र मांग में तेजी आने की उमीद है।

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