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ईएमआई रियायत से अस्थायी राहत से बैंकों पर दबाव पडऩे के आसार

हंसिनी कार्तिक / मुंबई March 27, 2020

शुक्रवार को आरबीआई द्वारा ऋणों की ईएमआई पर 3 महीने की रोक की घोषणा को देशव्यापी लॉकडाउन से मुकाबले के लिए बेहद जरूरी करार देते हुए बैंकों और उद्योग के पर्यवेक्षकों ने कहा कि इससे बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता के संदर्भ में जरूरी राहत मिलेगी। चूंकि कई बैंक इसे लेकर आशंकित हैं कि लॉकडाउन के प्रभाव की वजह से उनके ग्राहकों की अदायगी क्षमता प्रभावित हो सकती है, लेकिन शुक्रवार की पहल से इस तरह की आशंका दूर हो गई है।

फेडरल बैंक में रिटेल लेंडिंग ऐंड काडï्र्स के वरिष्ठï उपाध्यक्ष नीलुफर मुलानफिरोज का कहना है, 'यदि ग्राहकों और कंपनियों के लिए ब्याज का बोझ तीन महीने के लिए घटता है तो इसका बैंकों और उनके ग्राहकों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।' हालांकि इससे चुनौती भी जुड़ी होगी। स्पार्क कैपिटल के अभिनेश विजयराज का मानना है कि इससे बैंकों की बुक वैल्यू या नेटवर्थ 0.5-2 प्रतिशत तक प्रभावित होगी, वैसे यह ईएमआई रोक के विकल्प को अपनाने वाले ग्राहकों की संख्या पर निर्भर करेगा। इसलिए, बैंकों को परिसंपत्ति गुणवत्ता दबाव का सामना नहीं करना पड़ सकता है, लेकिन उनकी आय के विवरण पर दबाव दिखने की आशंका है।

जिस अन्य पहलू पर ध्यान दिए जाने की जरूरत होगी वह है अल्पावधि परिसंपत्ति देयता प्रबंधन (एएलएम)। आप यह कह सकते हैं कि बैंकों को 75 आधार अंक की रीपो दर कटौती और 90 आधार अंक की रिवर्स रीपो कटौती का लाभ मिलेगा जिससे देनदारियों को कम दर पर पुनर्गठित करना जरूरी होगा, जिसमें परिसंत्तियां अपेक्षित आय हासिल नहीं करेंगी, लेकिन यह बैंकों की तेजी से दरें बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगा। एक निजी बैंक के टे्रजरी प्रमुख ने कहा, 'सभी इंस्ट्रूमेंट कम दरों को स्वत: समायोजित नहीं करते हैं जिससे बैंकों के मुनाफे पर कुछ दबाव पड़ सकता है।' इसके अलावा, नकदी आरक्षित अनुपात (सीआरआर) मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) में कमी से भी बैंकों को बफर तैयार करने और एएलएम संबंधित असमानता को दूर करने के लिए ज्यादा पूंजी हाथ में आएगी। विश्लेषकों का कहना है कि बैंकों को आरबीआई निर्देश में कहा गया है कि यह अतिरिक्त राहत उन्हें ऋण वृद्घि की रफ्तार मजबूत बनाने के लिए ही दी गई है।

कम गैर-ब्याज आय के तौर पर भी बैंकों को झटका लग सकता है। गैर-ब्याज आय को ग्राहकों द्वारा किए गए सौदों से मदद मिलती है और बैंक अक्सर ग्राहक से निर्धारित शुल्क वसूलते हैं। कमजोर शुद्घ ब्याज आय  के परिवेश में, गैर-एनआईआई राजस्व से बैंकों को भारी मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक जैसे निजी बैंकों और बैंक ऑफ बड़ौदा तथा भारतीय स्टेट बैंक जैसे सरकारी बैंकों ने भी पिछली तीन तिमाहियों में एनआईआई राजस्व के मुकाबले गैर-एनआईआई राजस्व में अच्छी वृद्घि दर्ज की है।

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