बिजनेस स्टैंडर्ड - राहत के कदमों का होगा सीमित असर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, July 12, 2020 12:19 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

राहत के कदमों का होगा सीमित असर

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली March 26, 2020

केंद्र सरकार ने आज कोविड-19 के संकट को देखते हुए गरीब और हाशिये पर खड़े समाज के लिए राहत के कई कदमों की घोषणा की है। हालांकि इनमें से तमाम घोषणाओं का लाभ प्रभावी तरीके से पहुंचने की संभावना कम नजर आ रही है क्योंकि आपूर्ति व्यवस्था कारगर नहीं नजर आ रही है। इसकी वजह से यह तबका 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से ज्यादातर घोषणाएं मौजूदा योजनाओं के लाभार्थियोंं तक सीमित है। अगर कोई व्यक्ति इन योजनाओं का हिस्सा नहीं है, लेकिन इस बंदी की वजह से संकट में है तो उसे लाभों से वंचित रहना होगा। साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मामलों में ये घोषणाएं पिछले कुछ महीने से लागू हो चुकी हैं और इसका कोविड-19 संकट से उपजी समस्याओं का इनसे कोई समाधान नहीं होगा, जिसके लिए उन्होंने मनरेगा का वेतन 20 रुपये प्रतिदिन बढ़ाने का उदाहरण दिया।

सामाजिक क्षेत्र की पेंशन में अगले 3 महीने में एकमुश्त 1,000 रुपये देने का भी मामूली असर होगा क्योंकि यह 330 रुपये प्रति महीने के करीब होती है। केंद्र सरकार पहले से ही गरीब विधवाओं, विकलांगों व अन्य को 200 से 500 रुपये प्रति महीने पेंशन दे रही है और इस घोषणा के बाद अगले 3 महीने तक इसमें 330 रुपये प्रति महीने और जुड़ जाएंगे।

इसी तरह से पीएम-किसान के तहत पहली किस्त समय से पहले 1 अप्रैल से देने की घोषणा भी चल रही योजना का हिस्सा है। मनरेगा के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि मजदूरी नए सीपीआई- ग्रामीण सूचकांक से जुड़ी हुई है, जो मौजूदा स्तर से सामान्यतया ज्यादा है क्योंकि नए सूचकांक में मौजूदा सीपीआई-एएल की तुलना में गैर खाद्य वस्तुओं को ज्यादा महत्त्व दिया गया है। इसके अलावा बड़ा सवाल यह बन गया है कि लॉकडाउन के कारण काम पाकर मजदूर 20 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त कैसे कमा सकेंगे। बहरहाल ज्यादातर लोगों ने चिह्नित लाभार्थियों को राशन की दुकान से अगले 3 महीने तक 5 किलो मुफ्त अनाज (गेहूं या चावल) और 1 किलो दाल अतिरिक्त देने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है।

अंबेडकर विश्वविद्यालय में अध्यापक और भोजन के अधिकार की प्रचारक दीपा सिन्हा ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'मुफ्त राशन स्वागत योग्य कदम है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इसकी आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी, जब राशन की दुकानें भी नहीं खुल रही हैं। उन्होंने कहा कि डिलिवरी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी क्योंकि घर घर डिलिवरी नहीं हो पाती है तो संभवत: स्टॉक नहीं उठेगा। सिन्हा ने कहा, 'बेहतर विचार यह हो सकता है कि सामुदायिक भोजनालय चलाए जाएं। विस्थापित आबादी या श्रमिकों को खाने के पैकेट पहुंचाए जाएं जो अपने घर जाने के रास्ते में हैं।

एफसीआई के पूर्व चेयरमैन अशोक सिंह ने कहा कि सामान्यतया खाद्यान्न के गोदाम राशन की दुकान से 20-30 किलोमीटर दूर होते हैं और अगर वितरण चैनल दुरुस्त किया जाएगा, तभी अनाज पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ राशन दुकानें दो महीने तक का स्टॉक अपने पास रखती हैं। ऐसे में स्थानीय परिवहन बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन चुनौती यह है कि लाभार्थी किस तरह से दुकान तक पहुंच पाएंगे।

भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद में शिक्षक और जानी मानी अर्थशास्त्री ऋतिका खेड़ा ने कहा कि अगले 3 महीने के लिए 500 रुपये प्रति महीने अंतरित करना बहुत छोटा कदम है। उन्होंने कहा, 'मनरेगा की स्थिति को देखेंं तो कार्यस्थल पर सामुदायिक संक्रमण फैलने की संभावना है, अगर काम कराया जाए। ऐसे लोगों को नकद धन दिया जाना चाहिए।

सरकार ने उम्मीद जताई है कि बढ़ी मजदूरी से 5,600 करोड़ रुपये व्यय होंगे और इसका लाभ 5.5 करोड़ परिवारों को मिलेगा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भुगतान की पहुंच गरीब परिवारों तक बहुत कम है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि गरीब आदमी लॉकडाउन के दौरान बैंक तक आएंगे और वह पेंशन आदि ले सकेंगे।

Keyword: Relief Package, Coronavirus, Covid-19, Pandemic, Lockdown, कोविड-19, महामारी, लॉकडाउन, राहत पैकेज सीपीआई, ग्रामीण सूचकांक,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या औद्योगिक उत्पादन में तेज सुधार होने में अभी लगेगा वक्त?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.