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कोविड-19 के लिए एंटीबॉडी आधारित जांच किट बना रहे हैं

समरीन अहमद /  March 25, 2020

बीएस बातचीत

कोविड-19 वैश्विक महामारी फैलने के मद्देनजर सरकार ने इस वायरस का पता लगाने के लिए भारत में पीसीआर-आधारित किट के विनिर्माण की मंजूरी दी है। एंटीबॉडी-आधारित परीक्षण जैसे कई अन्य तरीके भी हैं, जो बड़े पैमाने पर तेजी से जांच के लिए उपयुक्त हैं। बायोकॉन की सीएमडी किरण मजूमदार शॉ ने समरीन अहमद से बातचीत में कहा कि कंपनी की अनुसंधान शाखा सिनर्जी ऐसे किट विकसित करने के लिए काम कर रही है। शॉ कोविड-19 को नियंत्रित करने में निजी क्षेत्र की भागीदारी का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने कोविड-19 डेटाबेस तैयार करने और भविष्य में संचारी रोगों से निपटने की तैयारी के लिए आरऐंडडी पर अधिक खर्च करने की आवश्यकता पर जोर दिया। पेश हैं मुख्य अंश...


सरकार ने कोरोनावायरस की जांच के लिए निजी प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी है। क्या इसके लिए निर्धारित 4,500 रुपये की कीमत उचित है?
यह बिल्कुल उचित है क्योंकि यह यह मूल्य आयातित किट की लागत के आधार पर निर्धारित की गई है।

मौजूदा परिस्थिति में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को और क्या कदम उठाने चाहिए?
हमें अभी काफी लोगों की जांच करने की आवश्यकता है, इसलिए निजी प्रयोगशालाओं को मंजूरी देना काफी महत्वपूर्ण कदम है। अब उन्हें निजी अस्पतालों को इसके लिए मंजूरी देने की आवश्यकता है क्योंकि हमें अस्पताल बिस्तरों की बेहद आवश्यकता है। जाहिर तौर पर सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं। हमें बड़ी तादाद में चिकित्सा पेशेवरों की आवश्यकता होगी और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बिना सरकार क्षमता का विस्तार करने में समर्थ नहीं होगी।

कोविड-19 महामारी की रोकथाम में भारतीय उद्योग जगत क्या भूमिका निभा सकता है?

हमें टीके के बिना इसके प्रसार को रोकना होगा। हरेक कंपनी कम से कम इतना तो कर सकती है कि वह अपने कार्यालय अथवा फैक्टरी जाने वाले कर्मचारियों को पूरी तरह से कम कर दें। जो लोग इसे बंद कर सकते हैं उन्हें दो सप्ताह के लिए ऐसा अवश्य करना चाहिए। बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कंपनियां वित्तीय योगदान कर सकती हैं। सीएसआर के तहत उन्हें जांच, वेंटिलेटर की खरीद और बीमारी से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने के लिए रकम देनी चाहिए। लॉकडाउन के दौरान पूरे भारत को सहयोग करने की आवश्यकता है। जब तक हमें उपचार नहीं मिलेगा तब तक इस महामारी से निपटना मुश्किल होगा। इसलिए इसे नियंत्रित करने का एकमात्र तरीका एक बड़े पैमाने पर लॉकडाउन है, जैसा सरकार ने किया है। इस दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी को घर से काम करने के लिए कहा जाना चाहिए।

कोविड-19 के लिए बायोकॉन त्वरित जांच निदान पर काम कर रही है। यह क्या है?
इस वायरस का पता लगाने के लिए कई तरह की जांच विकसित की जा सकती है। भारतीय प्रयोगशालाओं ने रियल-टाइम पीसीआर किट तैयार करने की दिशा में वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया है। हमारी प्रयोगशाला और कोसारा जैसी कंपनी हर सप्ताह सैकड़ों-हजारों किट का निर्माण कर सकती हैं। हमें उम्मीद है कि उस किट के जरिये जांच में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसा ही एक किट एंटीबॉडी आधारित किट है, जो तेजी से जांच करने में मदद कर रहा है। यह किट तीन बातें तुरंत बता सकता है कि आप संक्रमित हैं या नहीं, क्या आप संक्रमित हैं और ठीक हो रहे हैं और क्या आप ठीक हो गए हैं। ये किट पीसीआर जांच से भी अधिक सटीक हैं क्योंकि सुधार के चरण को भी इंगित करते हैं। हम एंटीबॉडी-आधारित इस जांच को विकसित करने के लिए सिनजेन के जरिये प्रयास कर रहे हैं।

कोविड-19 रोगियों का डेटाबेस तैयार करना आगे कितना महत्वपूर्ण साबित होगा?
हमें कोविड-19 की मौजूदा स्थिति से सीखने और स्वस्थ होने का विश्लेषण करने के लिए आंकड़ों की जरूरत है कि किसने कैसा प्रदर्शन किया। महामारी संबंधी डेटा एक वैश्विक महामारी के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि बीमारी कैसे फैलती है, क्यों फैलती है, जीवित, खराब स्वच्छता, खराब स्वास्थ्य या बुढ़ापे जैसी परिस्थितियों में क्या करना था। इन सब का विश्लेषण करने की जरूरत है। अगर हमारे पास ऐसा डेटाबेस नहीं होगा तो हमें केवल आंकड़ों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

कोविड-19 के बाद का विश्व कैसा होगा?
मुझे उम्मीद है कि हम एक साफ-सुथरे देश के रूप में काम करेंगे और घर से काम करने के मॉडल के बारे में अधिक गंभीरता से सोचेंगे। मैं यह भी उम्मीद करती हूं कि कोविड-19 के बाद नियमित तौर पर हाथ धोना एक आवश्यकता बन जाएगा।
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