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इक्कीस दिन के लिए बंद हुआ देश

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली March 24, 2020

समूचा भारत अगले 21 दिन तक पूरी तरह बंद रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देर शाम देश के नाम संदेश में कहा कि मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात 12 बजे से देश का हरेक जिला, गांव, गली-मोहल्ला पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक तरह से कफ्र्यू ही होगा, लेकिन कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए ऐसा करना ही होगा। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और आवश्यक सेवाएं इस दौरान जारी रहेंगी। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि कोविड-19 के प्रकोप से निपटने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिनका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा। इस रकम से कोरानावायरस जांच सुविधा, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा परिधान, उपकरण, सघन चिकित्सा कक्ष शैया, वेंटिलेंटर आदि का इंतजाम किया जाएगा। साथ ही चिकित्सा/अद्र्घ चिकित्साकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे पहले 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कफ्र्यू का ऐलान किया गया था, जिसे कुछ स्थानों पर 23 मार्च सुबह 6 बजे तक बढ़ा दिया गया था। बाद में दिल्ली, गाजियाबाद, गौतमबुद्घ नगर समेत कई जिलों में बंदी यानी लॉकडाउन आगे तक बढ़ा दिया गया था। प्रधानमंत्री की आज की घोषणा के बाद आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों के अलावा सभी देशवासियों को 21 दिन तक घरों में ही रहना होगा।
 
मोदी ने कहा, 'बेहद विकसित देश भी इस बीमारी के सामने बेबस साबित हुए। उन देशों का अनुभव बताता है कि कोरोना को फैलने से रोकना है तो उसके संक्रमण चक्र को तोडऩा ही होगा। चक्र को तोडऩे के लिए सोशल डिस्टेंसिंग यानी एक-दूसरे से दूर रहना ही इकलौता उपाय है। उन देशों में लोगों ने सरकार के निर्देशों को माना और हफ्तों घरों से बाहर नहीं निकले, जिसके बाद स्थिति सुधरने लगी है।' उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार इस वायरस से संक्रमण के लक्षण कई दिन बाद दिखते हैं और तब तक संक्रमण कई लोगों में फैल चुका होता है। इसीलिए 21 दिन यानी 3 हफ्ते तक घरों में बंद रहने से संक्रमण का चक्र तोडऩे में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, 'यदि 21 दिन नहीं संभले तो देश और परिवार 21 साल पीछे चला जाएगा। कई परिवार हमेशा के लिए तबाह हो जाएंगे। इसलिए तीन हफ्ते के इस लॉकडाउन का पूरी गंभीरता से पालन किया जाए। 21 दिन तक भूल जाएं कि घर से बाहर निकलना क्या होता है और घर के भीतर ही रहें। इसीलिए मेरी हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि देश में जो जहां है वहीं रुक जाए।'
 
मोदी ने कहा कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है। वे प्रयास कर रहे हैं और उनके पास संसाधन भी हैं, लेकिन वायरस इतनी तेजी से फैल रहा है कि प्रयासों के बाद भी विपदा बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आने के बाद मामलों की संख्या 1 लाख तक पहुंचने में 67 दिन लगे, लेकिन 1 से 2 लाख होने में केवल 11 दिन लगे और अगले 4 दिन में आंकड़ा 3 लाख तक पहुंच गया। चीन, अमेरिका, इटली, कनाडा, स्पेन जैसे देशों की बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं भी इस वायरस का मुकाबला नहीं कर सकीं। इसलिए बचने का इकलौता रास्ता यही है कि घर के बाहर लक्ष्मण रेखा खींच लें और उसे तीन हफ्ते तक बिल्कुल नहीं लांघें।
 
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कोरोनावायरस के खिलाफ इस निर्णायक लड़ाई की देश को बड़ी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी। लेकिन देश को बचाने के लिए यह कीमत अदा की जाएगी मगर देशवासियों की जान खतरे में नहीं पडऩे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह जनता कफ्र्यू के दौरान आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति सामान्य बनाने का प्रयास रहा, उसी तरह अगले 21 दिन तक भी आपूर्ति जारी रखने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए राज्य सरकारों से बात की गई है, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाएं ही रहेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महामारी से निपटने के लिए निजी क्षेत्र भी सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि निजी पैथोलॉजी लैब और अस्पताल इस लड़ाई में देश और जनता के साथ हैं और कई कंपनियां भी मदद कर रही हैं। उन्होंने जनता से डॉक्टर, नर्स, अद्र्घ चिकित्साकर्मी, पैथोलॉजिस्ट, वार्ड बॉय, एंबुलेंस चालक, सफाई कर्मी, मीडियाकर्मी, पुलिस बल का सहयोग करने के लिए कहा क्योंकि वे लोगों की सेवा के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। इस बीच एनएसई ने कहा कि बंदी के बावजूद बुधवार को शेयर बाजार खुले रहेंगे।
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