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केंद्र ने दिए निर्माण मजदूरों को धन देने के निर्देश

सोमेश झा / नई दिल्ली March 24, 2020

असंगठित क्षेत्र को राहत देने की दिशा में पहला कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने आज राज्यों को निर्देश दिया है कि जनकल्याण कोषों के इस्तेमाल न हुए धन का इस्तेमाल निर्माण क्षेत्र के मजदूरों के बैंक खातों में हस्तांतरित करें। कोविड-19 के कारण हुई नाकेबंदी की वजह से मजदूरों के संकट को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाए हैं। इसके अलावा सरकार ने नियोक्ताओं को भी राहत देने की घोषणा की है। सरकार ने 8 श्रम कानूनों और 10 केंद्रीय कानूनों के तहत 2019 के लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 अप्रैल 2020 कर दी है। मुख्य केंद्रीय श्रम आयुक्त की ओर से 20 मार्च को जारी पत्र में कहा गया है कि वैश्विक महामारी को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह फैसला किया है कि अगर प्रतिष्ठान फरवरी के अंत तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए हैं तो उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। 
 
श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया है कि वे भवन व अन्य निर्माण कामगारों के कल्याण उपकर कोष के 52,000 करोड़ रुपये राशि का इस्तेमाल करें। देश में करीब 3.5 करोड़ निर्माण मजदूर हैं, जो बिल्डिंग ऐंड अदर कंस्ट्रक् शन वर्कर्स (बीओसीडब्ल्यू) वेलफेयर सेस ऐक्ट 1996 के तहत पंजीकृत हैं। उपकर कोष का प्रबंधन संबंधित राज्य सरकारें करती हैं, जो अपने इलाके के निर्माण मजदूरों के रजिस्टर को भी अद्यतन करती हैं। निर्माण मजदूरों से जुड़ी मेडिकल सहायता, पेंशन, मकान बनाने के लिए कर्ज, बीमा, उनके बच्चोंं की शिक्षा, मातृत्व लाभ के अलावा अन्य सुविधाओं की योजना राज्य सरकारें बनाती हैं। बहरहाल तमाम राज्य सरकारों ने इस धन का उपयोग नहीं किया है और इसके लिए उच्चतम न्यायालय केंद्र व राज्य सरकारों की खिंचाई भी कर चुका है। 
 
सरकार ने एक दुर्लभ कदम उठाते हुए अधिनियम की धारा 60 का इस्तेमाल करते हुुए राज्य सरकारोंं को निर्देश जारी किया है कि वे 'योजना तैयार करके निर्माण कर्मचारियों के खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से पर्याप्त धन का हस्तांतरण करें।' दूसरे शब्दों में कहें तो राज्य सरकारें केंद्र का आदेश मानने के लिए बाध्य हैं। श्रम मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है, 'निर्माण मजदूरों को जारी की जाने वाली राशि के बारे में संबंधित राज्य व केंद्र शासित प्रदेश कर सकते हैं। इस मोड़ पर वित्तीय सहायता से हमारे निर्माण कर्मचारियों को हुए आर्थिक संकट को आंशिक रूप से कम किया जा सकता है। इससे महामारी से लडऩे को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा।' 
 
केंद्र सरकार के दिशानिर्देश के तत्काल बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निर्माण मजदूरों को 5,000 रुपये नकदी हस्तांतरण की घोषणा की है। श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि देश में करीब 5 करोड़ निर्माण मजदूर हैं और इस अधिनियम के तहत ज्यादा कामगारों को पंजीकृत करने के लिए राज्य सरकारें अभियान चला सकती हैं, जिससे जिन निर्माण मजदूरों का पंजीकरण नहीं हो सका है, उन्हें भी नकदी अंतरण का लाभ मिल सके।  कुछ राज्य सरकारों ने पहले ही उपकर का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को राहत देने की घोषणा की है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने हर पंजीकृत निर्माण मजदूर को तत्काल 3,000 रुपये की राहत देने की घोषणा की है। वहीं हिमाचल प्रदेश भी इस तरह के मजदूरों को तत्काल एकमुश्त 1,000 रुपये देगा। 
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