बिजनेस स्टैंडर्ड - वेतन देने में मदद चाहती हैं विमानन फर्में
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वेतन देने में मदद चाहती हैं विमानन फर्में

अरिंदम मजूमदार / नई दिल्ली March 24, 2020

विमानन कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को वेतन देने में सरकार की मदद मांगी है क्योंकि कोरोनावायरस महामारी के प्रसार ने अधिकारियों को हवाई परिवहन 31 मार्च तक बंद करने के लिए बाध्य किया है। सूत्रों ने कहा कि विमानन कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों ने सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार विमानन कंपनियों के कर्मचारियों के तीन महीने के वेतन का 50 फीसदी हिस्सा वहन करे। यह मांग सरकार के निर्देश से निकली है, जिसमें कंपनियों से कहा गया है कि वे कर्मचारियों को नौकरी से न निकालें, वहीं कंपनी का कामकाज कोरोनावायरस महामारी के कारण थम गया है।
 
श्रम व रोजगार मंत्रालय की तरफ से जारी एडवाइजरी में कहा गया है, ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में सार्वजनिक या निजी प्रतिष्ठानों के सभी नियोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने कर्मचारियों को नौकरी से न हटाएं खास तौर से आकस्मिक या अनुबंध वाले कर्मचारियों को और न ही उनके वेतन में कटौती करे। विमानन कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि हमें कर्मचारियों को वेतन देने में मुश्किल हो रही है क्योंकि कंपनियां पहले ही काफी कम मार्जिन पर काम कर रही हैं और टिकट बिक्री से मिलने वाले नकदी प्रवाह पर ज्यादातर आश्रित होती है।
 
विमानन कंपनियों को आशंका है कि हवाई परिवाहन पर पाबंदी 31 मार्च के बाद भी जारी रह सकती है और जब यह खुलेगा तो ग्राहकों की मांग कमजोर रहेगी और वे कई विमान खड़े करने पर बाध्य हो जाएंगे। सरकारी आकलन के मुताबिक, भारतीय विमानन कंपनियां अगले दो महीने में अपने बेड़े का महज 30 फीसदी ही परिचालित कर पाएंगी। एक निजी विमानन कंपनी के अधिकारी के मुताबिक, हवाई परिवहन सरकार के निर्देश के बाद बंद कर दिया गया। सरकारी लॉकआउट की अवधि में हमारी नकदी प्रवाह शून्य हो गया है, लेकिन तय लागत उतनी ही बनी हुई है। अन्य कारोबार के उलट अगर विमान नहीं उड़ रहे हैं तो भी हमें पट्टा किराया व वेतन चुकाना पड़ेगा। सरकार को कुछ बोझ उटाना चाहिए, अगर वह कारोबार का अस्तित्व बनाए रखना चाहती है।
 
इंडिगो को छोड़कर भारत की बाकी विमानन कंपनियों के पास लंबे संकट केलिए नकद शेष नहीं है। इंडिगो के सीईओ रोनो दत्त्ता ने मंगलवार को कर्मचारियों को आश्वस्त किया था कि उड़ान बंद होने के बाद भी वह वेतन का भुगतान करेंगे। सरकारी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ऐसी मांग की गई है लेकिन कहा कि सभी कर्मचारियों के वेतन का ध्यान रखना मुश्किल है। इसके बजाय निचले स्तर के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैकेज पर काम किया जा सकता है। विमानन कंपनियों के कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा मसलन सिक्योरिटी एजेंट, लोडर, ड्राइवर, ग्राउंड हैंडलर्स अनुबंध पर काम करते हैं और उन्हें डर है कि उनकी नौकरी जा सकती है।
 
विमानन कंपनियों के कर्मचारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड से अपनी नौकरी के जारी होने को लेकर अपनी बेताबी का जिक्र किया। अगरतला एयरपोर्ट पर चेक इन एजेंट मनोज सैकिया ने कहा, कंपनियां पेरोल वाले स्थायी कर्मचारियों को शायद नहीं निकालेंगी क्योंकि प्रधानमंत्री ने इस बाबत निर्देश दिया है, लेकिन हमारे जैसे अनुबंध वाले कर्मचारियों के लिए भविष्य अनिश्चित है। गोएयर पहले से ही अनुबंध वाले विदेशी पायलटों को मार्च के पहले हफ्ते के बाद से निकालना शुरू कर कर चुकी है। दिल्ली की स्पाइसजेट ने करीब 20 पायलटों के नोटिस अवधि में कमी का फैसला लिया है, जिन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा है। अधिकारी ने कहा, मुश्किल समय की अभी शुरुआत हुई है। ऐसा नहीं है कि जब पाबंदी हटेगी तो हम पूरी उड़ान देखेंगे। उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल होने में कम से कम छह महीने लग सकते हैं। ऐसे में सरकार के तत्काल हस्तक्षेप की दरकार है।
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