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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए होगी मुश्किल तिमाही

नम्रता आचार्य और ईशिता आयान दत्त / कोलकाता March 23, 2020

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मुश्किल तिमाही के कगार पर हैं। कोरोनावायरस के कारण मौजूदा व अगली तिमाही में काफी ज्यादा पुनर्गठन हो सकता है, वहीं इंटर क्रेडिटर करार के तहत खातों के समाधान में नाकामी से उच्च प्रावधान की जरूरत बैंकरों की चिंता में और इजाफा करेगा। इसके अतिरिक्त एनसीएलटी में समाधान के लिए ले जाई गई कंपनी भूषण पावर से रिकवरी पर कोई स्पष्टता न होने से वे बैंक दोबारा लाल निशान में जा सकते हैं जो महीनों के नुकसान के बाद हाल में लाभ में पहुंचा था। बैंकरों ने ये बातें कही। पिछली तिमाही में एस्सार स्टील के समाधान से कई बैंकों को राहत मिली थी, जिसके जरिये बैंकोंं को करीब 42,000 करोड़ रुपये मिले। भूषण पावर से बैंकों को मौजूदा तिमाही में करीब 20,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी। हालांकि उन्हें अब इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि कंपनी अभी भी कानूनी संघर्ष में फंसी हुई है।

 
जेएसडब्ल्यू को कानूनी तौर पर सलाह दी गई है कि अपील लंबित होने के दौरान समाधान योजना का क्रियान्वयन आवश्यक नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई की अगली तारीख अप्रैल के मध्य में है। बैंकरों को उम्मीद है कि इस तिमाही में समाधान पूरा हो जाएगा। एक सार्वजनिक बैंक के आला अधिकारी ने कहा, कोरोनावायरस के कारण एमएसएमई, आतिथ्य, विमानन जैसे क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई बैंक इसके कारण नुकसान में जा सकते हैं। इसके अलावा बैंकों को उन खातों पर ज्यादा प्रावधान करना होगा, जिसका समाधान इंटर क्रेडिटर करार के तहत नहीं हुआ है।
 
बैंकों के पास उन्हें एनसीएलटी भेजने का विकल्प है, लेकिन ज्यादातर मामले में समाधान की कीमत, परिसमापन कीमत जितनी कम है। अधिकारी ने कहा, ऐसे में बैंकों के लिए तिमाही काफी मुश्किल भरी होगी। अगर भूषण पावर का समाधान हुआ होता तो बैंकों को बड़ी राहत मिलती। एक अन्य सार्वजनिक बैंक के प्रमुख ने हालांकि कहा कि हमें अभी भी अल्पावधि में भूषण पावर के समाधान की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के पिछले आंकड़ों के मुताबिक, 72 बड़े खातों के 3.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का समाधान आईसीए के तहत होने का अनुमान है। बैंकरों ने कहा कि काफी खातों का समाधान अभी नहीं हो पाया है।
 
एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल में बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, आईसीए पर लेनदारों के बीच किसी तरह की सर्वसम्मति नहीं है। कई बैंकों ने आईसीए पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं जबकि छह महीने बीत चुके हैं। 7 जून 2019 के आरबीआई के परिपत्र में बैंकों के लिए अनिवार्य बनाया गया था कि 2,000 करोड़ रुपये ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों की तरफ से भुगतान में चूक की पहली तारीख के 30 दिन के भीतर वे आईसीए पर हस्ताक्षर कर लें। 30 दिन की समीक्षा अवधि के बाद समाधान योजना लागू करने के लिए 180 दिन की अनुमति दी गई थी, जो जनवरी के पहले हफ्ते में समाप्त हो गई। समयसीमा में चूक के बाद बैंकों को 20 फीसदी प्रावधान करना पड़ा और 30 दिन के भीतर मामला एनसीएलटी भेजना पड़ा। इसके बाद भी अगर 365 दिन में कोई समाधान नहीं निकलता तो 15 फीसदी अतिरिक्त प्रावधान करना होगा।
 
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कई महीनों के दबाव के बाद रिकवरी के संकेत दिखाने शुरू किए हैं। वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने दिसंबर 2019 में लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि सार्वजनिक बैंक 2019-20 में लाभ में आ गए और सितंबर में समाप्त पहली छमाही में 3,221 करोड़ रुपये का मुनाफा अर्जित किया। सार्वजनिक बैंकों ने वित्त वर्ष 2017-18 और वित्त वर्ष 2018-19 में क्रमश: 1.55 लाख करोड़ रुपये और 1.54 लाख करोड़ रुपये का परिचालन लाभ अर्जित किया था। हालांकि एनपीए के प्रावधान के कारण उन्होंने क्रमश: 2.41 लाख करोड़ रुपये व 2.36 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया और इस वजह से उनका शुद्ध नुकसान क्रमश: 85,370 करोड़ रुपये और 81,752 करोड़ रुपये रहा। हाल में लोकसभा में ठाकुर ने कहा था, इस वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में पीएसयू बैंकों का शुद्ध लाभ 507 करोड़ रुपये रहा। एक सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, मौजूदा आर्थिक हालात के कारण अगली तिमाही में पुनर्गठन का दबाव काफी ज्यादा रह सकता है।
Keyword: Corona virus, china, india, Bank,,
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