बिजनेस स्टैंडर्ड - 12 लाख करोड़ डॉलर का हो सकता है नुकसान
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12 लाख करोड़ डॉलर का हो सकता है नुकसान

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली March 23, 2020

कोरोनोवायरस (कोविड-19) वैश्विक महामारी की वजह से अमेरिकी कंपनियों को 4 लाख करोड़ डॉलर का झटका लगने की आशंका है। अमेरिकी हेज फंड ब्रिजवाटर एसोसिएट्स की एक ताजा रिपोर्ट में ऐसा कहा गया है। ब्रिजवाटर एसोसिएट्स लगभग 350 संस्थागत ग्राहकों के 160 अरब डॉलर के वैश्विक निवेश का प्रबंधन करता है। ब्रिजवाटर के अनुसार इसका वैश्विक प्रभाव कहीं अधिक है। ब्रिजवाटर के सह-मुख्य निवेश अधिकारी ग्रेग जेन्सन ने एक रिपोर्ट में लिखा है, 'अभी हमें लगता है कि अमेरिका में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों के राजस्व में लगभग 4 लाख करोड़ डॉलर की गिरावट आएगी। यह एक बहुत ही खतरनाक गिरावट है। यदि इसे कम नहीं किया गया तो इसका दूरगामी प्रभाव दिखेगा। चूंकि दुनिया भर में कॉरपोरेट राजस्व को इस प्रकार का झटका लगने जा रहा है, इसलिए कुल मिलाकर वैश्विक स्तर पर यह करीब तिगुना यानी करीब 12 लाख करोड़ डॉलर के नुकसान की आशंका है।' 
 
इस लिहाज से अमेरिकी कंपनियों की पूंजीगत खर्च योजना में 900 अरब डॉलर (सकल घरेलू उत्पाद का 4 फीसदी) की कटौती होने और पुनर्खरीद एवं विलय-अधिग्रहण मद में करीब 600 अरब डॉलर (जीडीपी का 3 फीसदी) की कटौती होने की आशंका है। रोजगार में भी उल्लेखनीय कटौती होगी क्योंकि कंपनियां नियुक्तियों में कमी करेगी जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। ब्रिजवाटर का कहना है कि ये अुनमान तीन उपायों की गणना के आधार पर जाहिर किए गए हैं। पहला, एक साधारण रियायती नकदी प्रवाह मॉडल के उपयोग से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण राजस्व नुकसान को नियंत्रित करता है। दूसरे के तहत अनुमानों में वृद्धि का उपयोग किया जाता है (जहां कंपनियों या विश्लेषकों ने उन्हें बताया है) और बाजार मूल्य निर्धारण का उपयोग करते हुए उसे आगे बढ़ाया जाता है। तीसरे के तहत माना गया है कि अमेरिका में उन क्षेत्रों के राजस्व को झटका लगेगा जिससे संबंधित क्षेत्रों को चीन में पहले ही झटका लग गया है। ब्रिजवाटर की रिपोर्ट में कहा गया है, 'बिना किसी उल्लेखनीय राजकोषीय अथवा मौद्रिक हस्तक्षेप के 4 लाख करोड़ डॉलर का मतलब अमेरिका के जीडीपी में इस साल 6 फीसदी से अधिक की गिरावट होगी। हमें दूसरी तिमाही में सबसे अधिक गिरावट दिखेगी और उस दौरान गतिविधियों में 2019 के अंत के स्तर के मुकाबले 10 फीसदी से अधिक की कमी दिखेगी।' 
 
जेन्सन का कहना है कि दूसरी तिमाही में अमेरिकी कंपनियों की वार्षिक वृद्धि में 30 फीसदी से अधिक की गिरावट दिख सकती है। परिणामस्वरूप बहीखाते से अधिकतर कॉरपोरेट मुनाफे और नकदी का सफाया हो जाएगा। ब्रिजवाटर ने अपने सुझाव में कहा है, 'जब क्षेत्र और कंपनी स्तर पर जाकर राजस्व में गिरावट को नकदी प्रवाह अंतर का आकलन करते हैं तो हमें ऊर्जा, यात्रा एवं पर्यटन में लगभग 2 लाख करोड़ की कमी दिखती है। साथ ही यह बड़ी और छोटी कंपनियों के बीच समान रूप से विभाजित दिखता है। कई कंपनियां ऋण के जरिये इस अंतर को पाटने की कोशिश करेंगी जिससे उनका ऋण बोझ बढ़ेगा।' 
 
वित्तीय उद्योग की बढ़ेगी चिंता
 
जेन्सेन का मानना है कि इन परिस्थितियों में कंपनियां दिवालिया होने लगेंगी। उनके आकलन के अनुसार, बाजार को करीब 850 अरब डॉलर का नुकसान होगा जिसमें से करीब एक तिहाई का झटका केवल बैंकों को लगेगा। उन्होंने कहा, 'भले ही इससे वित्तीय प्रणाली अथवा बैंकों की स्थिति कमजोर न हो क्योंकि उनके पास काफी पूंजी और नकदी प्रवाह होती है लेकिन यह सख्ती बरतने के लिए वित्तीय क्षेत्र पर काफी दबाव डालेगा।' जेन्सन का मानना है कि इस झटके से निपटने के लिए विभिन्न सरकारों की क्षमता अलग-अलग होती है और आगे चलकर बाजार इससे काफी हद तक संचालित होगा। इस लिहाज से अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस मामले में काफी सक्रियता दिखाते हुए अल्पकालिक कॉरपोरेट ऋण खरीद को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। हाल में उसने अल्पकालिक दरों में 0 फीसदी से 0.25 फीसदी के दायरे में कटौती की है।
 
जहां तक भारत का सवाल है तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी बाजार की चिंताओं को दूर करने के लिए उपाय किए हैं। उसमें कहा गया है कि भारत सरकार से आर्थिक प्रोत्साहन के लिए मांग बढ़ रही है। विश्लेषकों का कहना है कि कमजोर राजकोषीय स्थिति के कारण सरकार अभी अधिक आक्रमकता नहीं दिखा रही है। जेफरीज के महेश नंदुरकर ने एक हालिया रिपोर्ट में लिखा है, 'हमें लगता है कि सरकार जल्द ही आर्थिक सहायता के लिए उपाय करेगी लेकिन कर संग्रह में कमी आने से राजकोषीय स्थिति सीमित हो सकती है। यदि सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 1 फीसदी कम करने का निर्णय लेती है इससे 18 अरब डॉलर के खर्च की गुंजाइश होगी।'
Keyword: Corona virus, china, india, america,,
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