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जीडीपी अनुमान पर करेंगे विचार, अभी वक्त

अरूप रॉयचौधरी /  March 23, 2020

मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने अरूप रॉयचौधरी से कहा कि कोविड-19 के कारण देश के कुछ इलाकों में लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी, जो कम से कम 31 मार्च तक चलेगा। प्रमुख अंश..

 
यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना गंभीर मामला है? क्या प्रभाव के हिसाब से इसकी तुलना 2008 की वैश्विक आर्थिक से की जा सकती है?
 
अगर भारत के ििहसाब से देखें तो आपको आंकड़े देखते समय आज की तुलना में कल को लेकर भी सावधान रहना होगा। लेकिन आज के आंकड़ों के मुताबिक अगर आप अन्य सभी देशों की स्थिति को देखें और सांख्यिकीय मॉडलों का पालन करें तो अभी रास्ता है। पहला स्टेज-1 है, उसके बाद स्टेज-2 होता है। हम इस समय स्टेज-2 में हैं। और मुझे लगता है कि यह अच्छी खबर है कि इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक हमारे यहां कम्युनिटी में प्रसार नहीं हो रहा है। सामुदायिक प्रसार से यह बहुत तेजी से बढ़ता है। इसलिए इस हिसाब से देखें रैखिक वृद्धि हो रही है और सामुदायिक प्रसार नहीं है। मैं भविष्य के बारे में कुछ कहने को लेकर सावधानी बरतूंगा। लेकिन आज के हिसाब से देखें तो आंकड़ों से लगता है कि हम अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।  स्वास्थ्य समस्या के साथ ही इसका आर्थिक असर भी होगा। उदाहरण के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कह रहे हैं आपको उतार चढ़ाव को बराबर करने की जरूरत है। आव स्वास्थ्य संसाधनों और लोगोंं की संख्या में तालमेल बिठाकर ऐसा कर सकते हैं। लेकिन इस खाईं को पाटने के लिए लॉकडाउन जैसे कदम उठाने की जरूरत होगी। इसका भी आर्थिक असर होगा। इस तरह से देखें तो साफतौर पर दोनों में संबंध है।  ऐसे में मेरे विचार से वैश्विक वित्तीय संकट और वैश्विक महामारी में अंतर है। वैश्विक वित्तीय संकट केवल वित्तीय क्षेत्र की समस्या थी। और जब संकट वित्तीय क्षेत्र से बाहर निकलता है तो यह लंबा खिंच जाता है। 
 
क्या यह वक्त है कि 2019-20 और 2020-21 के जीडीपी अनुमान पर फिर से विचार किया जाए? 
 
यह वक्त अनिश्चितता का है, जिसमें सब कुछ अज्ञात है। आप एक दिशा में विचार कर सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी आंकड़े में अहम त्रुटि की संभावना है। इस तरह की अनिश्चितता में मात्रात्मक अनुमान दरअसल बहुत कठिन है। इस पर हम आंतरिक आकलन कर सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि इसमें त्रुटि की बहुत संभावना है। अप्रैल और मई भी प्रभावित हो सकता है। बहरहाल अभी नए आंकड़ों के बारे में अनुमान लगाना बहुत जल्दबाजी होगी, क्योंकि स्थिति लगातार बदल रही है।
 
क्या इसका असर कर राजस्व व विनिवेश से होने वाली आमदनी पर पड़ेगा?
 
इसका असर होगा। फिर भी अच्छी बात यह है कि लक्ष्य पूरे साल का है। इन मसलों पर पहले ही काम किया जा चुका है। मुझे लगता है कि समय भी प्रभावित हो सकता है। इन सभी विषयों पर हम विचार करेंगे। मुझे लगता है कि इस समय अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन मुझे लगता है कि यह साल भर के लिए किया जाना चाहिए। 
 
आर्थिक हिसाब से सरकार आगे क्या करने जा रही है?
 
व्यापक रूप से देखें तो मुझे लगता है कि केंद्र, रिजर्व बैंक और वित्तीय क्षेत्र को तालमेल की जरूरत है। व्यापक तस्वीर को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए जाने चाहिए और साथ ही उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रखना होगा, जो बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 
Keyword: Corona virus, china, india, lockdown,,
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