बिजनेस स्टैंडर्ड - अनाज-दाल पर बंदी का असर
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अनाज-दाल पर बंदी का असर

राजेश भयानी / मुंबई March 23, 2020

जरूरी जिंस बाजारों, इनके आयातकों, प्रोसेसरों को श्रमिक किल्लत और परिवहन से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सब्जियों, खाद्य तेल, अनाज और दलहन समेत कई बाजारों और उनकी प्रोसेसिंग से संबंधित कंपनियों को या तो श्रमिक उपलब्ध नहीं होने से, या परिवहन संसाधनों से जुड़ी समस्याओं की वजह से कारोबारी दबाव से जूझना पड़ रहा है। बाजार के दिग्गजों का मानना है कि यदि इस तरह की दिक्कतें लंबे समय तक बनी रहीं, तो उपलब्धता अन्य बड़ी समस्या साबित हो सकती है। 
 
पिछले कुछ दिनों से मुंबई में अनाज की ढुलाई दोगुनी बढ़कर प्रतिदिन एक लाख बोरे (30 किलोग्राम वजन वाले) हो गई। अब, कई राज्यों में लॉकडाउन किए जाने के बाद ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि वे उत्पादन केंद्रों से अनाज उठा सकते हैं, पर वापसी में जब वे खाली जाते हैं तो  यह आशंका बनी रहती है कि वे यह साबित करने में सक्षम नहीं हो सकेंगे कि उनके वाहन को जरूरी सामान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया था और इस वजह से उन्हें बीच में ही रोका जा सकता है। कई ट्रांसपोर्टर चालक उपलब्ध नहीं होने की समस्या बता रहे हैं। मुंबई के थोक बाजार में, 10 दिन के लिए अनाज का स्टॉक उपलब्ध है और कारोबारियों का मानना है कि परिवहन समस्याएं इस अवधि के अंदर दूर हो सकती हैं।
 
नवी मुंबई की अनाज मंडी मंगलवार तक बंद है और यह बुधवार को भी बंद रह सकती है, क्योंकि कोरोनावायरस के डर से श्रमिक अपने घर चले गए हैं। नवी मुंबई एपीएमसी के निदेशक नीलेश वीरा ने कहा, 'श्रमिकों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है। हमने सरकार से श्रमिकों को वापस लाए जाने के प्रयास में उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त मात्रा में सैनिटाइजर, मास्क आदि मुहैया कराने को कहा है, लेकिन अब तक इसका कोई जवाब नहीं मिला है।' न्यू मुंबई वेजीटेबल मार्केट के एक प्रतिनिधि ने कहा कि उनका बाजार कल खुलने की संभावना है, पर श्रमिकों के अभाव से सड़क किनारे कई खुदरा सब्जी विक्रेता इस व्यवसाय से बाहर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि थोक बिक्री बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और इसके उठाव के लिए कारोबारियों का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति और वितरण से संबंधित समस्या राज्य में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 
 
दालों की मांग बनी हुई है, क्योंकि पोल्ट्री उत्पादों के बजाय दालों की मांग बढ़ी है और चने की कीमतें बढ़ रही हैं। चने को 'दालों का राजा' के तौर पर जाना जाता है। हालांकि कई दाल मिलों को समान समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कुुछ केंद्रों में श्रमिक नहीं आ रहे हैं या ट्रांसपोर्टर माल नहीं उठा रहे हैं। सरकारी कोटे के तहत दालों का आयात किया जा चुका है और यह सीमा शुल्क अधिकारियों की मंजूरी के लिए पड़ा हुआ है। एक आयात ने कहा कि इस संबंध में सीमा शुल्क विभाग ज्यादा सक्रियता के साथ काम नहीं कर रही है जिससे समस्या बढ़ रही है। 
 
इंडिया पल्सेज ऐंड ग्रेन्स एसोसिएशन के वाइस-चेयरमैन बिमल कोठारी ने कहा, 'मेरा मानना है कि आज लॉकडाउन का पहला दिन है और इसलिए व्यापार से संबंधित समस्याएं कोरोनावायरस की गंभीरता को देखते हुए काफी कम हैं। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ दिन में हालात सामान्य हो जाएंगे।' वहीं आटा मिलें भी इससे अलग नहीं हैं और उन्हें भी इसी तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। भारी मांग के बाद आटा मिलों को पूरी क्षमता के साथ परिचालन करना पड़ रहा है। एक आटा मिल का कहना है कि सबसे बड़ी आटा विक्रेता एफएमसीजी कंपनी के पास भारी मांग आ रही है, लेकिन उन्हें पैकिंग मैटेरियल की आपूर्ति नहीं की जा रही है। उनकी समस्या यह है कि अधिकारी पैकिंग मैटेरियल को अनिवार्य जिंस के तौर पर मानने को तैयार नहीं हैं।  भारत अपने खाद्य तेल का तीन-चौथाई हिस्सा आयात करता है। लेकिन रुपये में गिरावट ने पिछले कुछ सप्ताहों में तेल को महंगा बना दिया है, जिससे इसकी मांग में भी कमी आई है।
Keyword: Corona virus, china, india, lockdown, FMCG,,
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