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महामारी के दौर में बिना छुए भुगतान ही सही

बिंदिशा सारंग /  March 22, 2020

भारत में कहावत है कि लक्ष्मी चंचल होती है, एक जगह ठहरकर नहीं रहती। नकदी यानी नोटों के मामले में यह बात एकदम सही है क्योंकि दिन भर नोट एक हाथ से दूसरे हाथ में जाते रहते हैं। मगर जब कोरोनावायरस महामारी बन गया हो और हजारों-लाखों लोगों की जान पर बन आई हो तो भीड़भाड़ या मेलजोल से परहेज तो करना ही चाहिए, नकद लेनदेन से भी किनारा करने में भी समझदारी है। इसका उदाहरण भी सामने है। कुछ देशों ने नकदी को पहले ही दूर कर दिया है और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने या तो नोटों के बंडल जला दिए हैं या उन्हें वायरस की आशंका से मुक्त करने के लिए तेज गर्मी में रखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भुगतान के ऐसे तरीके अपनाने को कहा है, जिनमें किसी अन्य व्यक्ति के साथ संपर्क नहीं होता है। 

यह सब देखने के बाद सोमवार को जब भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने ग्राहकों को डिजिटल लेनदेन अपनाने की सलाह दी तो ज्यादा लोगों को ताज्जुब नहीं हुआ होगा। मास्टरकार्ड में एक्सेप्टेंस डेवलपमेंट विभाग के उपाध्यक्ष विकास सरावगी कहते हैं, 'मौजूदा स्थितियों में कॉन्टैक्टलेस कार्ड समझदार उपभोक्ताओं के लिए भुगतान का नया विकल्प हो सकते हैं।' सर्वत्र टेक्नोलॉजीज के प्रबंध निदेशक और संस्थापक मंदार अगाशे की राय भी कुछ ऐसी ही है। वह कहते हैं, 'इन हालात में कॉन्टैक्टलेस यानी संपर्करहित भुगतान ही सही रास्ता है और भुगतान के लिए यूपीआई, आईएमपीएस, आरटीजीएस, मोबाइल वॉलेट तथा नेट बैंकिंग बेहतर हो सकते हैं क्योंकि ये मानवीय संपर्क कम करने में अच्छा खासा योगदान कर सकते हैं।' 

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस 

यूपीआई बैंक का ब्योरा दिए बगैर ही धन दूसरे के खाते में भेजने की सुविधा आपको प्रदान करता है। यूपीआई में भुगतान के लिए बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड के बजाय एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (वीपीए) का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में भुगतान का यह तरीका पिछले कुछ समय में बेहद लोकप्रिय हो गया है। यदि आप इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं तो आपको कुछ बातें जरूर ध्यान रखनी चाहिए। यूपीआई में एक फीचर है, जिसमें आप या विक्रेता इस्तेमाल करने वाले को रकम इकट्ठा करने का अनुरोध भेज सकता है। यदि रकम आपके खाते में भेजी जा रही है तो आपको लेनदेन को ऑथराइज करने यानी अपनी रजामंदी देने की जरूरत नहीं है। मगर इस सुविधा की वजह से ही एक खास तरह की धोखाधड़ी भी जोर पकड़ रही है। यदि धोखाधड़ी करने वाला किसी तरह आपसे आपकी निजी पहचान संख्या (पिन) पूछ लेता है तो आपके खाते से रकम निकाली जा सकती है। अगाशे आगाह करते हैं, 'चाहे जो भी हो जाए, अपना पिन कभी किसी को नहीं बताएं। यदि आप पिन किसी को देते हैं तो समझिए कि आपने ताले की चाबी किसी और को पकड़ा दी।' 

नेट बैंकिंग

कोरोनावायरस फैलने के कारण भारतीय रिजर्व बैंक भी हरकत में आ गया है और उसने रकम भेजने, सामान खरीदने और बिल भुगतान आदि के लिए एनईएफटी, आईएमपीएस तथा यूपीआई की सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध करा दी है। इन्फ्रासॉफ्ट टेक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी राजेश मिरजनकर समझाते हैं, 'वॉलेट और ऑनलाइन लेनदेन में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी फिशिंग के जरिये ही होती है। आपको यदि कोई ईमेल आया है तो उसमें चाहे जो भी लिखा हो और किसी का भी हवाला दिया गया हो, कभी अपने बैंक खाते की लॉगइन संबंधी जानकारी या दूसरा ब्योरा ईमेल पर किसी को नहीं भेजें। इसी तरह आपको ईमेल या एसएमएस पर कोई लिंक भेजा गया हो तो उसे क्लिक भी नहीं करें।'

लेकिन नेट बैंकिंग में भी दिक्कत हो सकती है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि वेबसाइट पर ट्रैफिक बहुत होने या सर्वर डाउन होने जैसी तकनीकी खामियों की वजह से रकम दूसरे खाते में नहीं पहुंच सके। साथ ही इसमें आईएफएससी कोड, खाता संख्या और दूसरे विवरण की जरूरत भी पड़ती है। पूरा ब्योरा भरने के बाद उसे ठीक से जांचना भी जरूरी होता है। 

मोबाइल वॉलेट

2016 में नोटबंदी का ऐलान होने के बाद मोबाइल वॉलेट की लोकप्रियता एकाएक बढ़ गई। पेटीएम से लेकर फोनपे और मोबिक्विक समेत तमाम मोबाइल वॉलेट इस समय काम कर रहे हैं। मनीटैप के मुख्य कार्य अधिकारी और सह-संस्थापक बाला पार्थसारथी कहते हैं, 'मोबाइल वॉलेट का फायदा यह है कि आप डेबिट या क्रेडिट कार्ड के बिना भी इससे भुगतान कर सकते हैं। इसमें कार्ड संख्या, सीवीवी, पिन या मोबाइल नंबर आदि की जरूरत भी नहीं पड़ती है। इसमें ऐसी किसी भी जानकारी की जरूरत नहीं पड़ती है और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं की जा सकती है। इसमें भुगतान करने पर कैशबैक या छूट भी हासिल हो जाती है।' मगर मिरजनकर की सलाह है कि वॉलेट का इस्तेमाल करते समय एक सावधानी जरूर बरती जाए। मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले को एसएमएस या मैसेज एप्लिकेशन पर किसी अज्ञात स्रोत से आने वाले चित्र या लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। साथ ही किसी लोकप्रिय ऐप या मोबाइल वॉलेट को डाउनलोड करने में ही समझदारी है। मिरजनकर कहते हैं, 'रिमोट स्क्रीनिंग का कोई भी साधन न तो इंस्टॉल करें और न ही उसे इस्तेमाल करें। ये माध्यम वास्तव में जरूरत पडऩे पर सुविधाजनक होते हैं मसलन दूर से ही तकनीकी सहायता हासिल करने के लिए। मगर किसी चालबाज ने अगर दूर से ही आपके फोन आदि में सेंध लगा दी तो वह खाता साफ कर सकता है।' 

कार्ड से भुगतान

टैप ऐंड पे कार्ड पूरी तरह संपर्क रहित कार्ड होता है, जिसे दुकानदार वाईफाई कार्ड भी कहते हैं। इसकी मदद से आपको मशीन में पिन नहीं डालना पड़ता और 2,000 रुपये तक का लेनदेन पिन के बगैर ही हो जाता है। लेकिन सामान्य कार्ड से ऑनलाइन या ऑफलाइन लेनदेन करने में आपको सावधानी बरतनी चाहिए। 

क्विक हील टेक्नोलॉजीज के संयुक्त प्रबंध निदेशक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी संजय काटकर कहते हैं कि किसी भी तरह का डिजिटल भुगतान करने से पहले फोन या डिवाइस में अच्छा एंटीवायरस सॉफ्टवेयर जरूर डाल लें और मुफ्त सॉफ्टवेयर के फेर में पडऩे के बजाय खरीदकर डालें। यह आपको किसी बड़े रेस्तरां में एक बार के भोजन से महंगा नहीं पड़ेगा। 

एक से ज्यादा बैंक

निजी क्षेत्र के कई बड़े बैंकों को तकनीकी गलती का सामना करना पड़ा है। इसीलिए केवल एक बैंक के भरोसे नहीं रहें। दो या तीन बैंकों का इस्तेमाल करें। छोटे भुगतान के लिए ई-वॉलेट ठीक है, होम डिलिवरी के लिए यूपीआई अच्छा है और बड़ी रकम देने के लिए कॉन्टैक्टलेस कार्ड, नेट बैंकिंग या दुकानों का क्यूआर कोर्ड ठीक रहेगा। आखिरी बात, नकदी सुरक्षित नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि अपने पास नकदी रखी ही नहीं जाए। पेपॉइंट इंडिया के प्रबंध निदेशक केतन दोशी कहते हैं, 'इसमें कोई दोराय नहीं कि इस समय कॉन्टैक्टलेस होना ही अच्छा है। जब मुसीबत आती है तो दुकानदार नकदी ही मांगते हैं।' अगर एटीएम में नकदी नहीं है तो परचून की दुकानों में माइक्रो एटीएम का इस्तेमाल करें।
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