बिजनेस स्टैंडर्ड - डिफॉल्ट के खतरे से निपटने का अवसर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, June 04, 2020 11:34 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

डिफॉल्ट के खतरे से निपटने का अवसर

सुदीप्त दे /  March 22, 2020

वैश्विक महामारी के मद्देनजर बैंकिंग संबंधी संविदात्मक देनदारी में बड़े पैमाने पर चूक की आशंका ने लेनदारों को तत्पर रहने के लिए प्रेरित किया है। इसी क्रम में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार को गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की श्रेणी में रखे गए खातों को रियायत देने और ऋण अदायगी में तमाम सहुलियत देने का सुझाव देने की योजना बना रहा है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि लेनदार और उधारकर्ता दोनों के लिए बैंकिंग संबंधी डिफॉल्ट में जटिलता इस बात को लेकर है कि बैंकिंग कानून एवं विनियम आमतौर पर जमानत कवर पर केंद्रित है और उसमें वैश्विक महामारी जैसी परिस्थितियों के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

साइरिल अमरचंद मंगलदास की पार्टनर लीना चाको ने कहा, 'ऋण संबंधी अधिकतर संविदात्मक अनुबंधों में आपात स्थितियों के लिए कोई प्रावधान नहीं है जिससे ऋण अनुबंध को तत्काल निरस्त किया जा सके और अदायगी संबंधी दायित्वों में रियायत दी जा सके।'

विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग संबंधी संविदात्मक दायित्वों में मुख्य तौर पर लेनदारों के साथ अनुबंध होता है। धीर ऐंड धीर एसोसिएट्ïस की पार्टनर वर्षा बनर्जी ने कहा, 'इस प्रकार का अनुबंध लागू ब्याज दर के साथ ऋण अदायगी का तरीका बताता है। यदि बैंकिंग संबंधी संविदात्मक दायित्व की शर्तें पूरी नहीं की जाती है तो डिफॉल्ट संबंधी प्रावधान प्रभावी होता है।'

विशेषज्ञों का कहना है वैश्विक महामारी जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कोई विशेष बैंकिंग नियामकीय दिशानिर्देश नहीं है। कुछ ऋण अनुबंधों, विशेष तौर पर कॉरपोरेट अथवा बहीखाते के वित्त पोषण से संबंधित मामलों में किसी अप्रत्याशित परिस्थिति में अनुबंध को निलंबित करने का प्रावधान है। इसके तहत लेनदारों को उनके ऋण की अदायगी के लिए सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसी प्रकार, ईपीसी यानी इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण, ओऐंडएम यानी परिचालन एवं रखरखाव और आपूर्ति से संबंधित वित्तीय अनुबंधों में आमतौर पर किसी अप्रत्याशित परिस्थिति में अनुबंध को निलंबित करने का प्रावधान होता है।

हालांकि सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर स्पष्टï किया है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी भी एक ऐसी अप्रत्याशित परिस्थिति है जिसमें अनुबंध शर्तों को निलंबित करने का प्रावधान होना चाहिए लेकिन कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर मामलों में ऐसी किसी राहत के लिए कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में ऋण दस्तावेजों के तहत उधारकर्ता को ऋण अदायगी में कोई राहत नहीं मिलती है।

जहां तक लेनदारों का सवाल है तो किसी उधारकर्ता द्वारा भुगतान में डिफॉल्ट किए जाने से ऋण दस्तावेजों में डिफॉल्ट की अन्य तमाम घटनाएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे विपरीत परिस्थितियां पैदा होंगी, वित्तीयअनुपात में असंतुलन पैदा होगा, परियोजना दस्तावेजों के अनुपालन में विफलता और समय पर वाणिज्यिक परिचालन हासिल करने में अक्षमता आदि समस्याएं दिखेंगी। खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने कहा, 'लेनदारों द्वारा बकाये की वसूली में असमर्थता के कारण ऋणदाता बैंकों की उधारी देने की क्षमता भी प्रभावित होगी।'

श्रीवास्तव ने कहा कि लेनदारों को परियोजना दस्तावेजों की गंभीरतापूर्वक समीक्षा करते हुए संभावित डिफॉल्ट की परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई परियोजनाओं के लिए ताजा ऋण देने से पहले किसी आपात परिस्थिति में प्रावधानों को निलंबित करने का समय-सीमा पर असर का भी आकलन करना चाहिए। आरबीआई और सरकार को दिए अपने सुझाव में आईबीए ने कहा है कि ऋण को एनपीए की सूची में शामिल करने के लिए समय-सीमा में 90 दिनों का विस्तार देने, सावधि ऋण एवं कार्यशील पूंजी ऋण के ब्याज के भुगतान में छह महीनों की मोहलत देने और आईबीसी के तहत समाधान के लिए कंपनियों को समय-सीमा में विस्तार देने की आवश्यकता है।

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि उधारकर्ताओं को अपने गंभीर ऋण अनुबंधों पर तत्काल नए सिरे से गौर करने की आवश्यकता है ताकि यह पता चल सके कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के मद्देनजर उन्हें कोई वास्तविक रियायत मिल सकती है अथवा नहीं। 

श्रीवास्तव ने कहा, 'ऋण अनुबंध में ऐसा प्रावधान होना चाहिए कि उधारकर्ता को ऐसी किसी आपात परिस्थिति में रियायत के लिए सूचित करना होगा। उधारकर्ता को तत्काल लेनदारों को इसकी जानकारी देनी होगी और उसे इस संबंध में मोहलत का आग्रह करना होगा।'

चाको ने कहा कि भुगतान में डिफॉल्ट के लिए रियायत के अलावा उधारकर्ताओं को विशेष राहत की भी दरकार हो सकती है। साथ ही उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विशेष परिस्थिति में किए गए डिफॉल्ट के कारण आगे की देनदारियों में कोई डिफॉल्ट न होने पाए।

आमतौर पर जिन अनुबंधों में किसी आपात परिस्थिति में निलंबन का प्रावधान नहीं होगा उनमें भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 56 के तहत अनुबंध खत्म करने का प्रावधान होता है। हालांकि बनर्जी ने कहा कि बैंकिंग संबंधी अनुबंध दायित्वों के मामले में अनुबंध शर्तों का निलंबन करना कठिन हो सकता है क्योंकि वह ऋण राशि के पूर्व भुगतान पर आधारित है।

कई कानून विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी बैंकिंग क्षेत्र के सभी हितधारकों के लिए अपने अनुबंध दायित्वों पर नए सिरे से गौर करने का एक अवसर है। श्रीवास्तव ने कहा, 'इससे उन्हें अपने संबंधित अधिकारों एवं दायित्वों को भुनाने में मदद मिलेगी ताकि निकट भविष्य में कोविड-19 जैसी परिस्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी की जा सके।'
Keyword: Coronavirus, china, Covid-19, Bank, RBI, Debt, SBI, Lender, IBA, RBI,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मंडी से बाहर उपज बेचने की अनुमति से किसानों को होगा लाभ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.