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हाजिर बाजार में चांदी महंगी

राजेश भयानी / मुंबई March 22, 2020

चांदी की कीमतें शुक्रवार के निचले स्तरों के मुकाबले बढ़ी हैं। यह धातु हाजिर बाजार में आयातित लागत से काफी अधिक (प्रीमियम) पर बिक रही है। हाजिर डिलिवरी के लिए प्रीमियम शनिवार को करीब तीन से चार फीसदी बढ़ गया। इसकी वजह यह है कि कम कीमतों पर मांग अधिक है, जबकि आपूर्ति सीमित है। यहां तक कि एमसीएक्स पर चांदी के छोटे वायदा (एक किलोग्राम) आयात लागत से अधिक पर बिक रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में चांदी का उपलब्ध स्टॉक कम है। इन छोटे वायदा का इस्तेमाल खुदरा निवेशकों द्वारा डिलिवरी लेने के लिए किया जा सकता है। 

जब चांदी का भाव 34,000 रुपये प्रति किलोग्राम से कम था, तब मांग में भारी बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि जिन डीलरों ने एक-दो सप्ताह पहले ऊंची कीमत पर चांदी खरीदी थी, वे प्रीमियम मिलने और घाटे को कम करने तक अपने स्टॉक को रोकने को तरजीह दे रहे हैं। चांदी के प्रमुख उत्पादक देश कोरोनावायरस से संबंधित चुनौतियों से जूझ रहे हैं, इसलिए आयात भी कम हो गया है। जब चांदी की कीमतें कम होती हैं तो भारत आम तौर पर हर साल 6,000-7,000 टन चांदी का आयात करता है। हिंदुस्तान जिंक 500 टन की आपूर्ति करता है। अन्य कंपनियों द्वारा उत्पादित और पुरानी चांदी की रिसाक्लिंग से आपूर्ति सीमित है। जनवरी के उत्तराद्र्ध में चीन के लॉकडाउन की घोषणा करने और उसके बाद पेरू और चीली जैसे अन्य उत्पादक देशों के ऐसे ही कदम उठाने के बाद आयात घटने लगा था। 

ब्रिटेन, हॉन्ग-कॉन्ग, स्विटजरलैंड कुछ अन्य प्रमुख उत्पादक देश हैं। वैश्विक व्यापार में अवरोध से भारत का चांदी आयात और घटा है। इस कैलेंडर वर्ष के पहले दो महीनों के दौरान चांदी का आयात बहुत कम करीब 250 टन रहा है। करीब 600 टन चांदी का आयात कंसाइनमेंट आधार पर हुआ है। यह चेन्नई बंदरगाह और कांडला मुक्त व्यापार जोन के गोदामों में भरा हुआ था। कंसानमेंट आधार पर आयात में आपूर्तिकर्ता चांदी भेजता है और यह बिकने के बाद विदेशी आपूर्तिकर्ता बैंक को भुगतान किया जाता है। 

सरकार ने कुछ दिनों पहले चांदी का शुल्क मूल्य 533 डॉलर प्रति किलोग्राम से घटाकर 402 डॉलर प्रति किलोग्राम किया था। यह करीब 34,000 रुपये प्रति किलोग्राम होता है, जिस पर इस महीने के अंत तक 12.5 फीसदी शुल्क वसूला जाएगा। डीलर इसमें कमी का इंतजार कर रहे थे। इस लॉट का बड़े डीलरों ने स्टॉक किया था, जिसे ऊंचे प्रीमियम पर धीरे-धीरे निकाला जा रहा है। 

एक आयातक ने कहा, 'आयात शृंखला खाली है और बाजार में उपलब्ध स्टॉक कम है। हमें निकट भविष्य में बड़ा आयात होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। कुछ समय आपूर्ति में अवरोध बने रह सकते हैं।' मांग बढ़ रही है। ऐसे में अगर कीमतें चढ़ती हैं, जिसका संकेत शुक्रवार के कारोबार से भी चलता है तो कुछ पुराना स्टॉक बाहर आ सकता है। हालांकि मौजूदा कीमतें ज्यादा आकर्षक नहीं हैं।

जीएफएमएस इंडिया और यूएई के वरिष्ठ विश्लेषक (कीमती धातु मांग) देवजीत साहा ने कहा, 'हमारा मानना है कि चांदी की आपूर्ति कम बनी रहेगी और बाजार में डिलिवरी के लिए वसूले जा रहे प्रीमियम में और बढ़ोतरी होने के आसार हैं क्योंकि वैश्विक मांग भी बढ़ रही है। हमारा अनुमान है कि बाजार की मौजूदा स्थिति में भी मार्च तिमाही में मांग 1,000 टन रहेगी।'

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