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फर्मों को राहत देने के लिए बैंक मांग रहे आरबीआई से मंजूरी

देव चटर्जी और अभिजित लेले / मुंबई March 20, 2020

विश्वव्यापी कोरोनावायरस महामारी के कारण कंपनी जगत नकदी प्रवाह पर असर महसूस कर रहा है, ऐसे में भारतीय बैंक उधार लेने वालों को राहत की पेशकश के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से मंजूरी मांग रहे हैं। साथ ही बैंक चाह रहे हैं कि मार्च तिमाही में प्रभावित क्षेत्रों को फंसे कर्ज के तौर वर्गीकृत न किया जाए।

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि बैंक विमानन, पर्यटन, छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों जैसे क्षेत्रों का आकलन कर रहा है, जिस पर कोरोनावायरस महामारी का नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था पर भी इसका कुछ असर होगा। एक सूत्र के मुताबिक, बैंक छोटे व मझोले आकार वाली कंपनियों को आसान उधारी की पेशकश करने के लिए तैयार है, जिसने मौजूदा तिमाही में ज्यादा दबाव का सामना किया है क्योंकि आपूर्ति शृंखला में अवरोध और ग्राहकों के अभाव से उनकी बिक्री प्रभावित हुई है। एक बैंकर ने कहा, कर्ज पुनर्भुगतान में देरी के लिए कंपनियां मोहलत चाह रही हैं और हमने इसके लिए आरबीआई की मंजूरी मांगी है। चूंकि यह अप्रत्याशित घटना है, लिहाजा हमें लगता है कि कंपनियों को राहत देने का मामला बनता है।

बोफा सिक्योरिटीज का अनुमान है कि एक महीने की बंदी से भारत के सकल घरेलू उत्पाद पर सालाना 50 आधार अंक का असर होगा। रेटिंग फर्म मूडीज ने भी भारत व विदेश में बंदी से कंपनी के नकदी प्रवाह पर असर को लेकर चेताया है और कई कंपनियां कर्ज भुगतान में चूक करेंगी।

बैंकर इसे लेकर भी चिंतित हैं कि औद्योगिक क्षेत्रों को उधारी की रफ्तार घटकर 1.6 फीसदी रह गई है क्योंकि मध्यम व बड़े उद्योगों में क्रमश: 2.5 फीसदी व 1.8 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है। इसके अलावा कुल औद्योगिक उधारी में करीब 70 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले बड़े क्षेत्रों की उधारी की रफ्तार नकारात्मक से लेकर निचले स्तर पर रही है, जिनमें बुनियादी ढांचा, पेट्रोलियम, रसायन, धातु और खाद्य प्रसंस्करण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त तीसरी तिमाही में इन औद्योगिक क्षेत्रों की हिस्सेदारी फंसे कर्ज में सबसे ज्यादा रही है, जो उधारी की रफ्तार पर और असर डाल रहा है। कंपनियों के वित्तीय प्रमुख ने कहा है कि महामारी से मार्च तिमाही में भी अवरोध पैदा हो सकता है। बजाज ग्रुप के समूह निदेशक (वित्त) पी. बनर्जी ने कहा, यह परिदृश्य काफी खराब है। कंपनियों को दो साल के लिए मूलधन के पुनर्भुगतान पर मोहलत मिलनी चाहिए और ब्याज भुगतान पर छह महीने की। ब्याज दरों को समायोजित कर कर्ज की मौजूदा शुद्ध वैल्यू को भी संरक्षित किया जाना चाहिए।

विमानन, हवाईअड्डे, होटल, मॉल, मल्टीप्लेक्स, रेस्टोरेंट और रिटेलरों समेत उच्च जोखिम वाले सेवा क्षेत्रों को मोहलत मिलनी चाहिए। क्रिसिल ने गुरुवार के नोट में चेतावनी देते हुए कहा है, कुछ प्रभावित कंपनियां लागत कटौती के कदम उठा सकती हैं, लेकिन यह शायद पर्याप्त नहीं होगा। स्टील, रत्न व आभूषण, निर्माण व इंजीनियरिंग और वस्त्र जैसे क्षेत्रों पर कोरोनावायरस महामारी का शायद सीधा असर नहीं होगा, लेकिन मौजूदा वैश्विक व देसी आर्थिक मंदी का मांग और बिक्री से मिलने वाली कीमत पर असर होगा।
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