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इस साल नियुक्ति की रफ्तार धीमी रख सकती हैं आईटी फर्में

देवाशिष महापात्र और नेहा अलावधी / बेंगलूरु/नई दिल्ली March 20, 2020

कोरोनावायरस के वैश्विक प्रसार के कारण पैदा हुई अनिश्चितता के कारण आईटी सेवा कंपनियों की तरफ से कॉलेज परिसरों से नए इंजीनियरिंग ग्रैजुएट की नियुक्ति में गिरावट हो सकती है। मानव संसाधन क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, नए ग्रैजुएट की जॉइनिंग की तारीख भी अलग-अलग हो सकती हैं क्योंकि कंपनियां मांग के परिदृश्य का आकलन करने के बाद ही कर्मचारियों को जोड़ सकती हैं।

स्टाफिंग फर्म सीआईईएल एचआर सर्विसेज के सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा, ऑफर लेटर हासिल कर चुके फ्रेशर्स की नियुक्ति की तारीख में देर का अनुमान है। अगर अमेरिका और यूरोप के उïद्योग पर अगले आठ हफ्ते तक असर जारी रहता है तो नियुक्ति पत्र का निरादर भी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अगले कुछ हफ्ते तक वायरस पर लगाम नहीं कसी जाती तो इंजीनियरिंग ग्रैजुएट की नियुक्ति में 20 से 30 फीसदी की गिरावट हो सकती है।

मांग के अनुमान से देश की चार आईटी कंपनियों ने पिछले साल 50,000 से ज्यादा फ्रेशर्स की नियुक्ति की। नए ग्रैजुएट की नियुक्ति भी ज्यादातर आईटी कंपनियों की इस पहल का हिस्सा था ताकि अपने कर्मचारियों के पिरामिड को सही आकार का बनाया जा सके, जहां मध्यम  स्तर के कर्मचारियों की संख्या हाल के वर्षों में ज्यादा हो गई है।

आईटी फर्मों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने मौजूदा वित्त वर्ष में करीब 30,000 नए ग्रैजुएट को जोड़ा है। कंपनी के प्रबंधन ने कहा है कि वह अगले वित्त वर्ष में इस आंकड़े को बढ़ाकर 39,000 करने जा रही है। इसी तरह इन्फोसिस ने इस वित्त वर्ष में 18,000 को नौकरी की पेशकश की है, वहीं विप्रो ने कहा है कि वह इस वित्त वर्ष में करीब 20,000 नए ग्रैजुएट को जोड़ेगी।

पारीख कंसल्टिंग के आईटी आउटसोर्सिंग एडवाइजर और संस्थापक पारीख जैन ने कहा, नए ग्रैजुएट को कंपनी में शामिल करने की तारीख अब अलग-अलग हो सकती है क्योंकि कंपनियां मांग में नरमी के कारण सतर्क हो सकती हैं। ऐसे में यह बैच में हो सकता है। उन्होंने कहा, वास्तविक असर अब अगले साल की नियुक्तियों पर दिखेगा, जो कोरोनावायरस के प्रसार के बीच मांग परिदृश्य पर निर्भर करेगा।

आईटी उद्योग मांग में सुस्ती से दो-चार हो रहा है क्योंकि अमेरिका समेत कई विकसित देशों ने कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने की खातिर सामाजिक दूरी बनाने के लिए अपने प्रतिष्ठानों को बंद करना शुरू कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप आईटी फर्म बड़े सौदे हासिल करने में देरी का सामना कर रही है और रिपोर्ट बताती है कि करीब 3-4 अरब डॉलर के सौदा पर हस्ताक्षर इस महीने टाल दिए गए।

फ्रेशर्स की नियुक्ति मांग के परिदृश्य पर निर्भर करेगी, लेकिन विशेष कर्मियों की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार में भी देर हो रही है क्योंकि कंपनियां आमने-सामने साक्षात्कार लेने में सक्षम नहीं हो पा रही। टीमलीज डिजिटल के प्रमुख (स्पेशलाइज्ड स्टाफिंग) सुनील चेम्मनकोटिल ने कहा, सबसे बड़ा मसला यह है कि भारत की किसी भी कंपनी के पास ई-नियुक्ति की प्रक्रिया नहीं है, ऐसे में चयन के बाद भी उम्मीदवार कंपनी से नहीं जुड़ पा रहे हैं। अभी ज्यादातर क्लाइंटों ने अप्रैल के पहले हफ्ते तक ज्वाइनिंग टाल दी है।
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