बिजनेस स्टैंडर्ड - भारतीय रिजर्व बैंक ने खरीदे 10,000 करोड़ रु. के बॉन्ड
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, July 15, 2020 03:22 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

भारतीय रिजर्व बैंक ने खरीदे 10,000 करोड़ रु. के बॉन्ड

अनूप रॉय / मुंबई March 20, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को 10,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे। बैंकिंग नियामक द्वितीयक बाजार से हालांकि 30,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड की और खरीद करेगा। यह खरीद व्यवस्था में नकदी झोंकने के लिए हो रही है ताकि कोरोनावायरस के कारण सुस्ती के बीच बाजार में सामान्य कामकाज होता रहे।

केंद्रीय बैंक को शुक्रवार के ओपन मार्केट ऑपरेशन के लिए 45,049 करोड़ रुपये की बोली मिली, हालांकि आरबीआई ने 10,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे। यह प्रतिक्रिया बताता है कि बाजार को आरबीआई के नकदी के सहारे की दरकार है, जो उसने पूरा करने का वादा किया है।

आरबीआई ने एक बयान में कहा, ओपन मार्केट परचेज ऑक्शन 20 मार्च को किया गया, जो सकारात्मक रहा। आरबीआई ने कहा, कोरोनावायरस के कारण वित्तीय बाजार के कुछ निश्चित क्षेत्र पर दबाव अभी भी काफी ज्यादा है और वित्तीय स्थिति सख्त बनी हुई है। आरबीआई की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि बाजार के सभी क्षेत्र पर्याप्त नकदी व टर्नओवर के साथ सामान्य कामकाज करे।

साथ ही केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह दो और ओएमओ का आयोजन करेगा, पहला 24 मार्च को 15,000 करोड़ रुपये का और फिर 30 मार्च को 15,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदेगा ताकि और नकदी झोंकी जा सके। पहली नीलामी में खरीदे गए बॉन्ड दिसंबर 2022 और जनवरी 2029 के बीच परिपक्व होंगे।

ऐसा नहींं है कि बैंंकिंग क्षेत्र नकदी की कमी से जूझ रहा है। वास्तविकता यह है कि व्यवस्था में नकदी अभी 2.93 लाख करोड़ रुपये है। आरबीआई के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। लेकिन बॉन्ड बाजार का प्रतिफल बढ़ा है क्योंकि विदेशी निवेशकों ने सुरक्षित ठिकानों की तलाश में अपना निवेश बेचा है। बॉन्ड के डीलरों ने कहा, ऐसे समय में बॉन्ड बाजार को देसी निवेशकों पर निर्भर रहने की दरकार है जो बॉन्ड में निवेश करने के लिए नकदी का सहारा चाह रहे हों। इसके अलावा आरबीआई के इस कदम से मजबूती में मदद मिलेगी क्योंकि बाजार को संकेत मिल जाएगा कि केंद्रीय बैंक किसी भी जरूरत को पूरा करने के लिए मौजूद है।

इस हफ्ते आरबीआई ने कहा था कि वह लंबी अवधि के रीपो परिचालन (एलटीआरओ) से 1 लाख करोड़ रुपये व्यवस्था में झोंकेगा और डॉलर की अदला-बदली के जरिए डॉलर की लिक्विडिटी में इजाफा होगा, जिसकी शुरुआत 2 अरब डॉलर अदलाबदली से होगी। 25,000 करोड़ रुपये एलटीआरओ का पहला चरण बुधवार को हुआ। तीन साल के एलटीआरओ में कुल 27,096 करोड़ रुपये की बोली मिली। आरबीआई पहले ही अपने पहले ऑपरेशन में एलटीआरओ के जरिये 1 लाख करोड़ रुपये की नकदी झोंक चुका है।

ओएमओ की घोषणा के बाद 10 साल के बॉन्ड का प्रतिफल घट गया। यह प्रतिफल 6.26 फीसदी पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर 6.41 फीसदी से नीचे है। डॉलर के मुकाबले रुपया 75.20 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर 74.99 से नीचे है।
Keyword: BSE, Bombay Stock Exchange Ltd., NSE, National Stock Exchange of India Ltd., Share Market, Sensex, RBI, Bond, Open Market Operation, Bank Regulator,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दूरसंचार क्षेत्र में फिर छिड़ेगी शुल्क दरों को लेकर जंग?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.